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मंशा

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“उम्र” के लेखक यश मजेजी का एक और बेहद शानदार उपन्यास ‘‘मंशा’’ “मंशा” - एक पिता और बेटी का भावुक कर देने वाला उपन्यास। ‘‘पिता और बेटी का ज़माना है ये, आँसुओं से बना आशियाना है ये। मोह के उजालों से रोशन हो रहा है, “मंशा” नाम का ऐसा अफसाना है ये।।’’ उपन्यास मंशा में वर्णित कुछ अंश इस प्रकार हैं - 1. जिस प्रकार बहती हुई हवा की धुन पर थिरकते हुए पेड़ हवा के थमते ही रूककर कुछ झुक जाते हैं मानों अपने इस कृत्य पर झेंप गए हों उसी प्रकार विचारों में खोए हुए श्रीधर बाबू अपनी विचारों की तल्लीनता पर झेंपते हुए उठ खड़े हुए। 2. जिस तरह बरसात होने पर कभी कोई नहीं सोचता कि बरसते पानी में किसी बादल के आँसू भी शामिल हो सकते हैं, पौधों पर ओस की बूँदों में कोई पत्ते के आँसुओं को नहीं ढ़ूँढ़ता, इसी तरह शî

69 pages, Kindle Edition

Published December 5, 2019

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