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Parat परत

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‘परत’ हमारे युग का वह सत्य है जिसे जान कर भी कोई जानना नहीं चाहता। लेकिन सत्य यह भी है कि हमने इस सत्य को यूँ ही नकार दिया तो भविष्य हमारा काॅलर पकड़ कर पूछेगा कि तब तुम चुप क्यों रहे|

165 pages, Paperback

First published December 14, 2019

22 people are currently reading
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About the author

Sarvesh Tiwari 'Sreemukh'

4 books12 followers

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Community Reviews

5 stars
27 (60%)
4 stars
8 (17%)
3 stars
1 (2%)
2 stars
4 (8%)
1 star
5 (11%)
Displaying 1 - 13 of 13 reviews
45 reviews1 follower
January 23, 2020
बहुत ही अच्छा लगा ये पुस्तक पढ़कर।
आज के जमाने की कहानी।
हमारे आस पास जाने कितनी शिल्पियाँ हैं। किसी को ज़िन्दगी दोबारा मौका देती है पर अधिकतर को नहीं देती।
पढ़ने के बाद ऐसा लगा जो बात लेखक महोदय ने कही थी शुरू में सच ही कही थी। अगर कहीं पढ़कर हमें रोना आया तो लिखने वाला भी खूब रोया होगा।
इस पुस्तक को पढ़कर ऐसा लगा जैसे इस युग के प्रेमचंद हैं ये।
वैसे तो परिवेश के हिसाब से शब्दों का चयन सही था, पर कहीं कहीं पढ़ते हुए लगा slang थोड़ा ज्यादा हो रहा है।
Profile Image for Sanjog Singh tomar.
41 reviews1 follower
July 19, 2020
बहुत ही मार्मिक है। लेखक ने बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया है। सबको एक बार जरूर पड़ना चाहिए। ऐसी सुंदर कृति उपलब्ध कराने के लिए मैं लेखक का हृदयँ से धन्यवाद देता हूं।
4 reviews
March 4, 2022
अभी मैंने एक काफी अच्छी पुस्तक "परत" को पढ़ा| राजनितिक विज्ञान या समाजशास्त्र के चिंतकों को अक्सर सलाह दी जाती है कि जब भी विचारों में रुकावटें आए तो उन्हें उपन्यास पढ़ने चाहिए| वहाँ से नए सन्दर्भ मिलते है और समाज की जमीनी हकीकत से अवगत होने का मौका मिलता है| सर्वेश तिवारी की किताब 'परत' उन्हीं में से है| इस किताब में लेखक ने ऐसे सामाजिक कुरीतियों को उठाया है जिसे लिखने में अक्सर लोग कतराते है| सिर्फ सही मायने में स्वतंत्र व्यक्ति/लेखक/चिन्तक ही ऐसे मुद्दों को बेबाकी के उठा सकता है|

Read the review in detail here - https://decodingworldaffairs.com/book...

पुस्तक: परत
लेखक: सर्वेश तिवारी "श्रीमुख"
रेटिंग: 4.98/5
मूल्य: Rs 200
Profile Image for Pratibha.
48 reviews1 follower
September 30, 2021
पुस्तक : परत 

लेखक साहित्यकार : सर्वेश तिवारी "श्रीमुख"

भाषा  : हिंदी , काल्पनिक कृति 

प्रकाशक : @harf_publication

आप किसी अखबार को पढ़ते है तो आपको देश भर की तमाम विषय पर आने वाली खबरें एक ही जगह पर पड़ने को मिल जाती है । फिर वो जातिवाद , क्षेत्रवाद, सामंतवाद और  राजनेताओं की शक्ति प्रर्दशन के द्वारा जनता को छलने वाली  राजनीती हो या लव जेहाद की बखिया उधेड़ती खबर हो  या किसी भी गरीब तबके के दुखों का अंत न होने वाला जीवन हो । यह सभी बेहद संवेदनशील दृश्य आपको एक ही किताब "परत " में पड़ने को मिल जायेंगे ।

सर्वेश तिवारी "श्रीमुख "जी  द्वारा रचित पुस्तक "परत " शुरू से लेकर अंत तक अपनी पकड़ बनाए रखती  है। कहानी के पात्रों और सवांदो के साथ स्वयं को जुड़ा अनुभव करते है। लेखन शैली समृद्ध है और शब्दों का चयन के बारे में जितना कहूं न्यायसंगत नहीं होगा वो कम ही होगा ।

पूरी कहानी भारत के गांवो के परिपेक्ष की है । जिसमें प्रेम के नाम पर लव जिहाद में फंसी लड़की को मुर्गी कहने पर पिता के दर्द और टीस को महसूस कराया है ।जो  लेखक ने बिना डरे लिखा है, और ऐसे कथानक जोड़े है जो पड़ते समय आपकी आंखों से आंसू सहज ही निकलने लगे।

(प्रेम कुछ और सिखाए या ना सिखाए सबसे पहले झूठ बोलना और छल करना सिखाता है,प्रेम संसार का सबसे तेज नशा है जब व्यक्ति नशे मैं हो तो सही राह दिखाने वाले मित्र को भी शत्रु समझता है l)

मुझे अनेकों जगह कथावर की कई पंक्तियां दिल को छू गई है । जो वन लाइनर डायलाग समाज को व्यंग्यात्मक लहजे में समाज को एक गहरा संदेश देती हैं  और साथ ही साथ वर्तमान समाज की परिस्थितियों के प्रतिबिंब को बेनकाब करती हैं। 

"प्रेम कुछ और सिखाए या ना सिखाए सबसे पहले झूठ बोलना और छल करना सिखाता है !! 

"प्रेम संसार का सबसे तेज नशा है जब व्यक्ति नशे मैं हो तो सही राह दिखाने वाले मित्र को भी शत्रु समझता है"

गावों के चुनावों का इतना सजीव चित्रण है जो पड़ने पर यह लगेगा की यह कोई पिक्चर की ही स्टोरी है जो आपको घटित होती दिख रही है। 

कुछ बेहद संवेदनशील वन लाइनर इस तरह है …..

"एक दूसरे को बेहूदा बनाने का नाम ही लोकतंत्र है" तथा "लोकतंत्र में हिजड़ों की भी मांग भरी जाती हैं"। 

"लोकतंत्र मे आदमी ,आदमी नही वोट होता है"। 

"आरक्षण का पेड़ सत्तर वर्ष का बूढ़ा हो गया, लेकिन उसके फल अब भी कुछ सीमित लोग ही खा रहे हैं"!
Profile Image for Suryansh Dwivedi  'Mihir'.
1 review
July 20, 2022
वर्तमान युग के कुत्सित प्रयासों को कुठाराघात करती हुई सर्वश्रेष्ठ उपन्यास।
This entire review has been hidden because of spoilers.
Profile Image for Nishu Thakur.
129 reviews
October 6, 2022
नि: संदेह बेहतरीन नोवेल हैं जो समाज की वास्तविकता को प्रदर्शित करता है।
67 reviews14 followers
October 6, 2022
उन पुस्तकों में से एक जो इस समाज में प्रासंगिक है। अगर हम इसके बारे में बात करें तो भी यही समाज इसे नजरअंदाज करता है।
Profile Image for Ashish Iyer.
875 reviews637 followers
May 6, 2023
सर्वेश तिवारी श्रीमुख की एक और उल्लेखनीय पुस्तक। वे बिहार की ग्रामीण जीवन शैली को खूबसूरती से बयान करते हैं। श्रीमुख अपनी किताबें लिखने के लिए जिस तरह के विषय का चयन कर रहे हैं, उसके लिए मैं पहले से ही उनका प्रशंसक हूं। पुण्यपथ में उन्होंने पाकिस्तानी हिंदू के बारे में लिखा, इस बार इन्होने लव जिहाद पर लिखा है। मुझे पता है कि बहुत से लोग इस विषय पर बात करने में असहज महसूस करते हैं लेकिन यह हकीकत है। आप इससे भाग नहीं सकते। लेखक इन घटनाओं को वास्तविक जीवन में भी देख चुके ���ैं। उन्होंने लव जिहाद के अलावा बिहार के लोगों के रहन-सहन, उनकी जीवनशैली, उनकी समाज, उनकी मानसिकता, उनकी मासूमियत और परिवार के मूल्यों का बड़ी खूबसूरती से दर्शाया है। लेखक ने बिहार में शिक्षा प्रणाली और जातियों के बारे में जिस तरह से उल्लेख किया है, वह मुझे बहुत पसंद आया। जब हिंदी साहित्य की बात आती है तो मुझे श्रीमुख में बहुत संभावनाएं दिखाई देता है।
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