कहते हैं इश्क़ अक्सर वहीं पनपता है जहाँ उसके होने की संभावना सबसे कम होती है। जुलाई की एक सामान्य सुबह थी। बारिश का मौसम था पर आसमान बिलकुल साफ़ नज़र आ रहा था। इश्क़ तो दूर बारिश भी होने के आसार कहीं नहीं थे। सड़कों पर कुछ देर पहले ही झाड़ू मार कचरा हटाया जा चुका था। इक्का दुक्का दुकानें खुल चुकी थीं वहीं कुछ दुकानों के बाहर के बल्ब अब भी जल रहे थे। सूरज के उगने से पहले शुरू हुई कोचिंग क्लासेज छूटने लगी थीं और स्कूलों में बच्चों का आना शुरू हो चुका था। इन सब से अनजान गौतम अपनी बुआ को रिसीव करने रेलवे स्टेशन की तरफ बढ़ रहा था। खैर वो समय पर स्टेशन तो पहुँच जाता है लेकिन वहाँ उससे एक मिस्टेक हो जाती है जो वजह बनती है उसकी और पूर्वी की मुलाकात की। वही मिस्टेक वजह बनती है गौतम और पूर्वी के बीच इश्क़ की। य