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Ashok Rajpath
महत्त्वपूर्ण कथाकार अवधेश प्रीत का यह उपन्यास बिहार के कॉलेज और विश्वविद्यालय के शिक्षण-परिवेश को उजागर करता है कि किस तरह प्राध्यापक अपनी अतिरिक्त आय के लिए कोचिंग का व्यवसाय कर रहे हैं! इसके पाश्र्व में छात्र-राजनीति का भी खुलासा होता है—छात्रों की उच्छृंखलता, अनुशासनहीनता और भ्रष्टता से उपजे सवाल पाठक के अन्तर्मन में लगातार विचलन भरते हैं। गाँवों, कस्बों से अपना भविष्य सँवारने आए छात्र विद्या और अनीता जैसी लड़कियों के रोमांस में उलझकर वायावी वैचारिकता की बहसें ही नहीं करते, अपितु शराब और आवारगी में अपने को पूरी तरह झोंक देते हैं। वे कोचिंग के विरोध में आन्दोलन करते हैं, जिससे अशोक राजपथ का जन-जीवन अस्त-व्यस्त और दुकानें बन्द हो जाती हैं, पुलिस प्रशासन इस विरोध की समाप्ति
364 pages, Kindle Edition
Published January 1, 2018
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