प्रकट में तो यह उपन्यास एक हिन्दू लडक़े और मुस्लिम लडक़ी की प्रेम कहानी है, जिसकी छोटे शहर से चलकर बड़े शहर तक की यात्रा रोमांच, रोमांस और इनके बीच जीवन-यथार्थ के अच्छे-बुरे और कड़वे-मीठे अनुभवों से गुज़रती है। अनचाहे, अनजाने ही ऐसी स्थिति बनती है कि नायक, वह हिन्दू लडक़ा दोस्तों के बीच शाहरुख और मुस्लिम लडक़ी यानी नायिका, काजोल के नाम से पुकारी जाने लगती है। यह एक आम घटना है जो अक्सर कहीं भी घटित होती है। प्रेम प्राय: असफलता से नालबद्ध है। अक्सर ऐसे प्रेम की परिणति हताशा की राह चलकर शराबखाने से होती हुई ‘देवदासीय मृत्यु’ है। लेकिन इस उपन्यास में प्रेम उस शक्तिपुंज की भाँति अदृश्य रूप से मौजूद है जो एक अद्र्धशिक्षित लडक़े को फिल्मों जैसी आभासी दुनिया से बाहर लाकर तमाम हताशा, कुंठा और अभावो&