Jump to ratings and reviews
Rate this book

प्रभु कैसे मिलेंगे ?: ( संभवतः कर्म और भक्ति के मार्ग से … ) “दैनिक प्रार्थना” और उसकी कहानी

Rate this book
कहते हैं कि हमें मनुष्य जीवन, चौरासी लाख योनियों में भटकनें के बाद मिलता है और इस मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी सफलता प्रभु को प्राप्त कर लेना है। प्रभु-प्राप्ति के बाद, मनुष्य इस आवागमन के चक्र से छूट जाता है। किन्तु क्या हम, इस मनुष्य जीवन रुपी नाव को, भव-सागर को पार करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं ? श्री रामचरितमानस और श्री भगवद्गीता ऐसे ग्रन्थ हैं जिनमें प्रभु प्राप्ति के सरल साधन दिए गए हैं। ये दोनों ही ग्रन्थ, ऐसे ख़ज़ाने हैं जिनमें से आप चाहे जितने हीरे, मोती और जवाहरात निकाल लीजिये, फिर भी, ये ख़ज़ाने ज़रा भी कम नहीं होंगे। दैनिक प्रार्थना और नित्य पाठ के रूप में, छोटे-छोटे कदम बढ़ाते हुए, हम कुछ ही समय में प्रभु तक पहुँच जाएंगे। रोज़ाना चंद मिनट निकाल कर इस दैनिक प्रार्थना और नित्य पाठ को, सुबह-

40 pages, Kindle Edition

Published June 30, 2019

1 person is currently reading

About the author

Devendra Mohan Mathur

4 books1 follower

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
1 (50%)
4 stars
1 (50%)
3 stars
0 (0%)
2 stars
0 (0%)
1 star
0 (0%)
Displaying 1 of 1 review
1 review
July 7, 2019
मन की बात , अपनों का साथ

सहज भाषा का प्रयोग और भक्ति की परिकाष्ठा का अदभुत जोड़ है इस पुस्तक में।हां इस पुस्तक को वह लोग ना ही पड़ें जो केवल ज्ञान अर्थात लॉजिकल सोच ही समझते हैं क्यूंकि" प्रभु कैसे मिलेंगे" की भाषा हृदय की वाणी है , भावपूर्ण है न कि बुद्धि और ज्ञान प्रधान । सर्वप्रिय श्री देवेन्द्र जी को कोटि कोटि साधुवाद।
Displaying 1 of 1 review

Can't find what you're looking for?

Get help and learn more about the design.