वो फांसी कोठी में बैठा पल-पल करीब आती अपनी निश्चित मौत का इन्तजार कर रहा था । चौतरफा अन्धेरे से घिरा वो शख्स अपनी नापाक जिन्दगी के ऐसे पड़ाव पर पहुंचा हुआ था जहां उसकी कोई हस्ती, कोई हैसियत, कोई औकात नहीं थी । ऐसे शख्स को एकाएक अहसास हुआ कि वो किसी की जिन्दगी में जगमग कर सकता था । और फिर उसने ऐसी घात लगाई कि सब बस देखते ही रह गये !
Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
एक क्राइम फिक्शन नावेल में आपको पढने के लिए क्या चाहिए या यूँ कहूँ की क्या-क्या चाहिए। एक मर्डर हो और उसकी तहकीकात एक डिटेक्टिव करे और अंत में करिश्मासाज तरीके से कातिल का पर्दा फास हो जाए। लेकिन अगर इस कहानी में कोर्ट रूम ड्रामा हो, वकीलों की बहस हो और एक घाघ अपराधी हो जो षड्यंत्रों के जाल को ऐसे बुनता हो कि शिकार खुद-ब-खुद उसमे फंस जाए, तो कहानी एक अविस्मरणीय मनोरंजन को जन्म देती है। एक क्राइम फिक्शन नावेल में गर कोर्ट रूम ड्रामा हो, एक डिटेक्टिव की शानदार तहकीकात हो, एक कातिल द्वारा लगाई गयी अटूट घात हो, किसी कि जिन्दगी कि डोर इन्साफ कि तराजू में अटकी हुई हो और उस डोर को बचाए रखने के लिए जो जद्दोजहद कि जाए, ऐसे मसाले से तैयार हुई कहानी सच में बेमिसाल होती है।
वहीँ सोने पर सुहागा वाली बात ये हो जाए कि इस कहानी में फिलोस्फर डिटेक्टिव सुधीर कोहली हो, वो अपना खास, खासुलखास, एन दिल्ली का खास हरामी, जिसकी पूछ दिल्ली में और दिल्ली के करीब ४० कोस तक है, तब तो मजा ही आ जाए। अगर सुधीर हो किसी कहानी में तो उसकी चुलबुली लेकिन शरीफ सेक्रेटरी रजनी तो होगी ही जिसके चुटीले संवाद से दिल खिलखिला उठता है। वहीँ अगर सुधीर कोहली इस नावेल का केंद्रीय किरदार है तो निश्चय सी बात है कि खास उसकी टाइप की महिलायें जरूर होंगी। जी हाँ, इस कहानी में भी कुछ ऐसे ही किरदार हैं। वैसे इस नावेल की एक खास बात यह भी है “निम्फोमेनियाक” के बाद दूसरी बार पाठक साहब ने इस नावेल में सुधीर के पास्ट को दिखाया है।
Bahut hi umda novel jisme na sirf Sudhir ki typical smart talk , chuhalbaji bhari hai balki , court room scenes , badhiya kirdaar Aur sansabikhej plot bhi hai . the plot is very interesting , the humour and smart talk keeps u interested and the end is very different . the roles of Natasha khanal, magistrate have come out very nicely