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Mahuacharit

वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह का उपन्यास ‘महुआचरित’ जीवन के अपार अरण्य में भटकती इच्छाओं का आख्यान है। मध्यवर्गीय समाज की सच्चाइयों को लेखक ने विशिष्ट कथा-रस के साथ प्रकट किया है। यह उपन्यास जिस शिल्प में अभिव्यक्त हुआ है वह क में एक नया प्रस्थान निर्मित करता है। छोटे-बड़े किंचित् असमाप्त अपूर्ण वाक्य संकेतों की ओर उन्मुख विवरण और बहुअर्थी बिम्ब इस रचना को महत्त्वपूर्ण बनाते हैं। महुआ की सहेली है उसके मन की छत जहाँ वह खुलती, खिलती और खेलती है। यह कल्पना ही अपने आपमें अनूठी और व्यंजक है। कहना न होगा कि ‘महुआचरित’ को ‘वृत्तान्त का अन्त’ करती कथा-रचना के रूप में रेखांकित किया जा सकता है। अस्सी साल के स्वतन्त्रता सेनानी पिता की पुत्री महुआ की देहासक्ति से विवाह तक की यात्रा और फिर उस

77 pages, Kindle Edition

Published January 1, 2020

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About the author

Kashinath Singh

26 books77 followers
Kashinath Singh, winner of the highly prestigious Sahitya Akademi award for Hindi literature is particularly known for his novel "Kashi Ka Assi"

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Community Reviews

5 stars
41 (34%)
4 stars
36 (30%)
3 stars
31 (26%)
2 stars
6 (5%)
1 star
4 (3%)
Displaying 1 - 9 of 9 reviews
Profile Image for Ravi Shukla.
34 reviews5 followers
May 31, 2023
महुआ के बारे में काफी सीमित शब्दों में चरित वर्णन है। अच्छा भी है, सब क्यों जानना?
6 reviews2 followers
July 21, 2021
Nice book on inner conflict created by societal norms

It's hard to understand connection between consciousness and body. Societal norms prevale over individual feelings. Great story by Kashinath. Must read
Profile Image for Niraj Upadhayaya.
47 reviews2 followers
August 11, 2021
I did not expect it from Kashinath Singh ji

Kashinath singh ji has encashed his name by writing Mahuacharit. It lacks story and when story is not there all the excellence of a master wordsmith, can not save it.
18 reviews
Read
July 20, 2021
क्लासिक नोवेल !

किसी साहित्य का क्लासिक की कटेगरी में आना ही बहुत कुछ कह देता है| शानदार किताब है, बेझिझक होकर उठाइये और पढ़िये|
Profile Image for Raghav Sharma.
202 reviews1 follower
February 17, 2022
बदलते सामाजिक मूल्यों और रिश्तों का प्रतिबिम्ब - जो इस सत्य को नकार रहें है या इससे अनभिज्ञ हैं वे पिछली सदी में जी रहे हैं और जल्द ही उनके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसकने वाली है
1 review
July 11, 2023
काशीनाथ सिंह अपने काल से आगे के साहित्यिकार हैं। यह रचना स्त्री और पुरुष दोनों के मन के द्वंद का प्रतिम्बिब है। हिंदी साहित्य ऐसी रचनाओं से समृद्ध होती है।
16 reviews
March 28, 2023
इस उपन्यास में लेखक ने नायिका के मन में चल रहे अन्तर्द्वन्द्व का बख़ूबी चित्रण किया है मानव मन में उठते विभिन्न विचारों को भी काफ़ी अच्छी तरह दर्शाया गया है और पुरूषों के दोहरे मापदंडों पर भी काफ़ी कुशलतापूर्वक कटाक्ष किया गया है
Profile Image for Rajesh Rahgir.
Author 1 book1 follower
July 30, 2022
Love and envy are presented in trademark simplicity and trademark satire. Kashinath Singh's books are known for the simplicity of storytelling while capturing the mood brilliantly. And this short story is no exception. Under 30 minutes read, go for it.

Profile Image for Shekhar Kumar.
7 reviews
March 19, 2022
महुआचरित काशीनाथ सिंह का एक लघु उपन्यास है, जो लघु तो है परंतु अपने अंदर बहुत गहरी संवेदना लिए हुए है।
कहानी की नायिका 'महुआ' के माध्यम से काशीनाथ जी ने मनुष्य को जरूरतों को पाठकों के समक्ष हु-ब-हु प्रस्तुत किया है। अपनी अस्मिता की खोज में भटकता हुआ इंसान तथा शारीरिक सुख को केंद्र में रखकर ये उपन्यास लिखा गया है, जहां मनुष्य अपनी अस्मिता की खोज में किस तरह बेचैन है तथा भौतिक सुखों के साथ शारीरिक सुखों की क्या अहमियत है, को दर्शाया है।
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काशी का अस्सी की तरह ही यह उपन्यास भी अपने में एक नयापन और अनुठापन लिए हुए है, जो इस उपन्यास को और भी रोचक बना देता है। नए दौर की किताब लिखते वक्त काशीनाथ जी ने नया अंदाज़ ही अपनाया है। जैसे: महुआ की सहेली उसके मकान की छत को दिखाया गया है, जहां वह खुलती है, खेलती है, और खिलती है। यह कल्पना ही अपने आप में अनूठी और व्यंजन है।

धन्यवाद
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