Jump to ratings and reviews
Rate this book

जैन पाठ संग्रह: विभिन्न पाठों का संकलन

Rate this book
स्वाध्याय के अनेक अंगों में आम्नाय भी एक मुख्य अंग है । भेदविज्ञान एवं वीतरागता के पोषक इन पाठों का पठन भी एक प्रकार से स्वाध्याय ही है । ये पाठ हमें पुनः तत्त्वविचार के लिए प्रेरित करते है । इनमें से चयनित कुछ पंक्तियाँ जिन्हें पढ़कर आपका भी मन होगा कि इन्हें अपने प्रतिदिन चर्या का अंग बनाना चाहिए - मैं कौन हूँ? आया कहाँ से? और मेरा रूप क्या? सम्बन्ध दुखमय कौन हैं? स्वीकृत करूँ परिहार क्या?।। (अमूल्य तत्त्व विचार) जो संसार विषैं सुख होता, तीर्थङ्कर क्यों त्यागैं। काहे को शिवसाधन करते, संजम सों अनुरागैं॥ (वैराग्य भावना) आपका गुणगान जो जन करें नित अनुराग से। सब भय भयंकर स्वयं भयकरि भाग जावें भाग से। तुम हो स्वयंभू नाथ निर्भय जगत को निर्भय किया। हो स्वयं शीतल मलयगिरि &#

138 pages, Kindle Edition

Published July 31, 2019

2 people are currently reading
1 person want to read

About the author

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
4 (100%)
4 stars
0 (0%)
3 stars
0 (0%)
2 stars
0 (0%)
1 star
0 (0%)
No one has reviewed this book yet.

Can't find what you're looking for?

Get help and learn more about the design.