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जैन पाठ संग्रह: विभिन्न पाठों का संकलन

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स्वाध्याय के अनेक अंगों में आम्नाय भी एक मुख्य अंग है । भेदविज्ञान एवं वीतरागता के पोषक इन पाठों का पठन भी एक प्रकार से स्वाध्याय ही है । ये पाठ हमें पुनः तत्त्वविचार के लिए प्रेरित करते है । इनमें से चयनित कुछ पंक्तियाँ जिन्हें पढ़कर आपका भी मन होगा कि इन्हें अपने प्रतिदिन चर्या का अंग बनाना चाहिए - मैं कौन हूँ? आया कहाँ से? और मेरा रूप क्या? सम्बन्ध दुखमय कौन हैं? स्वीकृत करूँ परिहार क्या?।। (अमूल्य तत्त्व विचार) जो संसार विषैं सुख होता, तीर्थङ्कर क्यों त्यागैं। काहे को शिवसाधन करते, संजम सों अनुरागैं॥ (वैराग्य भावना) आपका गुणगान जो जन करें नित अनुराग से। सब भय भयंकर स्वयं भयकरि भाग जावें भाग से। तुम हो स्वयंभू नाथ निर्भय जगत को निर्भय किया। हो स्वयं शीतल मलयगिरि &#

138 pages, Kindle Edition

Published July 31, 2019

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