यात्रा वृत्तांत शैली के बारे में सुना है, लेकिन बहुत पढ़ नहीं पाया हूँ. कभी राहुल सांस्कृत्यायन जी की “ल्हासा की ओर” तथा अन्य चयनित कहानियाँ विद्यालय के पाठ्यक्रम में पढ़ी थी, उसके बाद बहुत नहीं पढ़ी. हाल ही में दो और पुस्तकें पढ़ी -“चीनी यात्री फाहियान का यात्रा विवरण” और “यात्राओं का इंद्रधनुष”. दोनों बहुत ही विभिन्न कालखण्डों में लिखी हुई हैं (7वी और 21वी सदी). लेकिन दोनों ही पाठक को उनमें वर्णित स्थानों और लोगों के बहुत निकट ले जाती हैं.
ज्योति जैन जी द्वारा लिखित “यात्राओं का इंद्रधनुष” अपने शीर्षक के अनुरूप ही भांति-भांति के रंग समाहित किए हुए है. इसमें पहाड़ हैं, फूलों की वादियाँ हैं, वाटर स्पोर्ट्स हैं, और भी बहुत कुछ है. मानसरोवर तक जाने की यात्रा और उस यात्रा में मन का शिवमय हो जाना है. बंजर पहाड़ों, हरी वादियों, रेगिस्तान को पार करते हुए लेह की पगोंग झील तक जाना और उसके निर्मल पानी में खो जाना है. तारकली, गोवा में रंगीन मछलियों का सामीप्य है और पैरासेलिंग में पतंग की तरह उड़ने का रोमांच भी. पर्यटन के द्वारा स्वर्ण भूमि बने थाईलैंड के टापुओं पर नित नए वाटर स्पोर्ट्स हैं. और क्या क्या है, के लिए पुस्तक पढ़नी पड़ेगी.
ये नीरस यात्रा विवरण नहीं है. इसमें फ्लाइट पकड़ने की दौड़ है और नए अनुभवों का रोमांच. जैसे यात्रा के दौरान समय का भान नहीं रहता वैसे ही इस पुस्तक को पढ़ते हुए घड़ी का ध्यान न रहा. पूरा पढ़ने के बाद दुःख भी हुआ कि इतनी जल्दी समाप्त हो गई, पर नए स्थानों और वहां के लोगों के बारे में पढ़कर ख़ुशी भी हुई. पारम्परिक यात्रा वृतांत की अपेक्षा ‘यात्राओं के इंद्रधनुष’ में अनेक चित्र हैं, जो लिखे हुए शब्दों से पृथक नहीं हैं, बल्कि उनके साथ मिलकर एक नया और अद्भुत दृशय बनाते हैं. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो अत्यधिक चित्रों वाली कॉफ़ी टेबल और यात्रा विवरण का मिश्रण है.
एक विशेष उल्लेख अंतिम अध्याय “झाबुआ” का करूँगा, जहाँ ज्योति जैन जी अनेक बार गई हैं. राष्ट्रव्यापी आर्थिक विकास की मुख्य धारा से पिछड़ जाने के बावजूद, कैसे वहां के आदिवासी वर्तमान में अपनी पहचान बचाने (और बनाने) और अपने पर्यावरण की रक्षा के लिए कार्यरत हैं – अपने पारम्परिक ‘हलमे’ और श्रम के जरिए. कैसे हज़ारों लोग मिलकर हाथीपावा की पहाड़ियों पर चंद घंटों में गड्ढे खोदकर वर्षा के जल को भूजल में बदलने की नीँव रखते हैं – वह सामूहिक शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है. यह एक और अन्य महत्वपूर्ण बात दर्शाता है – यात्रा केवल सुन्दर प्राकृतिक या मानव-निर्मित अजूबों तक ही सीमित नहीं. यात्रा एक अनुभव है, एक अनुभव जो हमारे स्व में कुछ नया जोड़ता है. यात्रा प्रकृति के बीच, लोगों के बीच, शहरों में या इन सबके परे – कहीं भी हो सकती है.