Jump to ratings and reviews
Rate this book

अगर कल को मैं ना रहॅू

Rate this book
इस कहानी के मुख्‍य पात्र संतोष और प्रिया हैं, प्रिया संतोष की पत्नी का नाम है जो बहुत ही खूबसूरत होती है। संतोष और प्रिया का रिश्‍ता पवित्र है, वह रिश्‍ता ऐसा नहीं है जैसा आज-कल देखने को मिलता है कि लड़का-लड़की एक समय तक ही साथ रहते हैं।बचपन से संतोष ऐसे बहुत से लोगों से मिलता है जिनकी नजर में रिश्‍तों का मतलब कुछ और ही होता है, उसके दोस्त भी उससे कहते हैं कि हम तो बस लड़की से मजे लेते हैं और वो भी उससे पूछ के। यह किताब यह सीख देती है कि कोई भी रिश्‍ता मात्र खेल नहीं होता जो कुछ देर तक चले फिर खत्म हो जाए, लडकियां कोई खिलौना नहीं होती, सच्चा प्यार और सच्चे दोस्त आज-कल की दुनिया में भी मिलते हैं।

304 pages, Kindle Edition

Published August 3, 2017

Loading...
Loading...

About the author

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
0 (0%)
4 stars
0 (0%)
3 stars
0 (0%)
2 stars
0 (0%)
1 star
0 (0%)
No one has reviewed this book yet.