‘मन अदहन’ मधु चतुर्वेदी की 7 कहानियों का संग्रह है। इन कहानियों को पढ़ने का अहसास किसी रोलर कोस्टर की सवारी-सा है। एक तरफ ‘मेरी झिल्ली’ जैसी दिल को कचोट देने वाली मार्मिक कहानी है तो दूसरी तरफ़ लड़कपन की गली मोहल्लों वाली आवारगी से भरपूर ‘पतंगबाज़ी’। ‘बेबी दी की शादी’ जैसा हास्य से भरपूर संस्मरण जिसे हँस-हँसकर पूरा पढ़कर खत्म कर लेने के फौरन बाद दुबारा पढ़ने लगते हैं। आँचलिकता की खुशबू से महकती ‘गाँव की ओर’ में बुजुर्ग नान बऊ का ऐसा किरदार जो सदा के लिए पाठकों के मन में बस जाए। ‘बड़ी आँखों वाली’ में तरुणाई की उस उद्दंडता की कहानी बाद में जिसका सामना करने में स्वयं को शर्मिंदगी हो। कहानी ‘अम्मा की खाट’ हो या पति-पत्नी के बीच रोज़ाना की चुहलबाज़ीयों वाले इश्क़ में भीगी ‘प्यारे पतिदेव’—इन सभी रंगों के छीटे पाठक अपने जीवन में जरूर पाएँगे। सूर्य के प्रकाश के 7 रंगों की ही तरह ये 7 कहानियाँ भी भावनाओं का इंद्रधनुषी मेल हैं।
मधु चतुर्वेदी द्वारा फेसबुक पर लिखे लेखों से प्रभावित होकर मैंने बड़े ही उत्साह के साथ इस पुस्तक को पढ़ना शुरू किया। प्रकाशक के अनुसार यह एक कहानी संग्रह है परंतु मुझे संकलित विषय वस्तु मैं एक भी कहानी नजर नहीं आई। यह पुस्तक संस्मरण से अधिक कुछ नहीं है। कुछ संस्मरण इस तरह लिखे गए हैं जोकि केवल किताब की पृष्ठ संख्या को बढ़ाने के लिए शब्द जुगाली मात्र है। ना ही किसी तरह की कोई रचनात्मकता और ना ही भावनात्मक रूप से जुड़ाव हो पाया। मेरी नजर में एक विफल कोशिश.... कही गई बातों का पुनरावर्तन खींज पैदा कर रहा था।
गांव घर छोड़ कर परिस्थितियों से बंध कर घर से दूर बेस लोगों के कठीन जीवन और समाज मे बसे विरोधाभास और को चित्रित करती कथा को सुंदर रूप से शब्दांवित किया गया है।
साथ ही नगर और गाँव के जीवन रहन सहनका विवरण भी अति सुंदर शब्दों में किया गया है।
📖 पुस्तक समीक्षा 2026 #16 पुस्तक: मन अदहन लेखिका: मधु चतुर्वेदी पृष्ठ: 144 ⭐ मेरी रेटिंग: 4.6/5
मन अदहन सात कहानियों का ऐसा संग्रह है जो मन के किसी कोने को छूकर वहीं अपना स्थायी स्थान बना लेता है। पुस्तक पढ़ते हुए कई बार ऐसा लगा मानो सभी कहानियाँ किसी अदृश्य धागे से एक-दूसरे से जुड़ी हुई हों।
पुस्तक की शुरुआत "बड़ी आँखों वाली" से होती है, जो विद्यार्थी जीवन के अनुभवों और भावनाओं को सहजता से सामने लाती है।
"हमारी शादी" विवाह के बाद एक स्त्री की मनःस्थिति का बेहद मार्मिक और भावनात्मक चित्रण करती है।
मेरी सबसे पसंदीदा कहानी "मेरी झिल्ली" रही। एक उड़िया लड़की की यह कहानी कहानी कम और हकीकत ज़्यादा लगती है। इसे पढ़ते हुए कई बार आँखें नम हो जाती हैं, और अंत में यह एक ऐसा खालीपन छोड़ जाती है जो देर तक साथ रहता है। सच कहूँ तो, झिल्ली का दर्द अभी भी मन में कहीं अटका हुआ है।
"पतंगबाज़ी" आपको सीधे बचपन की गलियों में ले जाती है और कुछ देर के लिए वहीं रोक लेती है। "गाँव की ओर" गाँव के परिवेश, आपसी प्रेम और उससे जुड़े अपनत्व को खूबसूरती से उकेरती है। "बेबी दीदी की शादी" पढ़ते हुए चेहरे पर मुस्कान आ जाती है,
जबकि "अम्मा की खाट" माँ के स्नेह, ममता और लाड़ को इतने आत्मीय शब्दों में प्रस्तुत करती है कि पाठक भावुक हुए बिना नहीं रह सकता। इस संग्रह की सबसे बड़ी खूबी इसकी सादगी और शब्दों का सुंदर चयन है। ये कहानियाँ बिल्कुल वास्तविक लगती हैं—कहीं आपको हँसाती हैं, कहीं भावुक करती हैं और कहीं-कहीं गुस्सा भी दिलाती हैं। हर कहानी अपने पीछे कोई न कोई एहसास छोड़ जाती है।
मन अदहन जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि मन में उबलते विचारों को अपनी लेखनी से पन्ने पर उतार दिया। एक माध्यमवर्गीय परिवार आस पास के लोग सब को बहुत उचित तरीके से चित्रित किया गया है। इसकी हर कहानी से पढ़ने वाला खुद को जोड़ लेता है। खुद को एक पात्र के रूप में देखता हैं। कुछ कहानी ऐसी है कि उसको पढ़ कर आँखे भर जाती हैं।