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Mouth Organ

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किताब के बारे में

यह क़िस्सों की किताब है। कुछ कपोल कल्पना, कुछ आपबीती, कुछ दास्तानगोई, कुछ बड़बखानी। अँग्रेज़ी में जिसे कहते हैं- 'नैरेटिव प्रोज़’। वर्णन को महत्व देने वाला गद्य, ब्योरों में रमने वाला गल्प। कहानी और कहन के दायरे से बाहर यहाँ कुछ नहीं है। यह ‘हैप्पी कंटेंट’ की किताब है। कौतूहल इसकी अंतर्वस्तु है। क़िस्सों की पोथी की तरह किसी भी पन्ने से खोलकर इसे पढ़ा जा सकता है।



लेखक के बारे में

13 अप्रैल 1982 को मध्यप्रदेश के झाबुआ में जन्म। शिक्षा-दीक्षा उज्जैन से। अँग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर। कविता की दो पुस्तकों ‘मैं बनूँगा गुलमोहर’ और ‘मलयगिरि का प्रेत’ सहित लोकप्रिय फ़िल्म-गीतों पर विवेचना की एक पुस्तक ‘माया का मालकौंस’ प्रकाशित। यह चौथी किताब। अँग्र

192 pages, Paperback

Published August 10, 2019

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About the author

Sushobhit

18 books4 followers

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Displaying 1 - 10 of 10 reviews
Profile Image for प्रिया वर्मा.
37 reviews1 follower
August 8, 2021
गली-कूचे-नुक्कड़-दरीचों से बतकही शुरू कर के लेखक केरल के किसी दूर-दराज़ अनजान शहर के प्लेटफॉर्म पर ले जाकर बिठा देता है- फिर किस्से कहता है- दिल्ली, आगरा, मांडू से समरकंद तक और ग़ालिब से लेकर शेक्सपियर तक सारी मन की धुनों को माउथ ऑर्गन पर बजाता है।
मूलतः ये सारी किस्सागोई उस की फेसबुक वॉल पर पढ़ी हुईं थीं मैंने, पर इस तरह बंधा बंधाया मिलना, पढ़ना यूँ लगा कि जैसे सन्नाटे में किसी खुशमिजाज़ मनमौजी पढ़ाकू लड़के की सपनीली दुनिया की चित्रकारी की नोटबुक सामने खुली पड़ी हो, मैं एक एक चित्र को डूब कर देख रही हूं, पढ़ रही हूं, महसूस कर पा रही हूँ।
Profile Image for Niraj Pal.
Author 5 books6 followers
January 9, 2021
सुशोभित

नए लेखकों में सुशोभित के लिखने का तरीका कुछ अलग है। वह नए शब्दों के साथ ही साथ क्लिष्ट शब्दों को भी बखूबी के साथ प्रयोग करते हैं। माउथ ऑर्गन पढ़ते हुए थोड़ी निराशा हुई क्योंकि बहुत सारी कहानियाँ फेसबुक पर पहले ही पढ़ ली गईं थीं। सुशोभित को फेसबुक के इतर भी लिखना होगा। नए पाठकों के लिए कहानियाँ अच्छी बन पड़ी हैं लेकिन क्लिष्ट शब्दों की समझ भी जरूरी है अन्यथा कहानियों का भाव उन्हें समझ नही आएगा।
Profile Image for Anchal Saksena.
Author 5 books9 followers
September 19, 2019
किताब कैसी है मुझे पता नहीं। मतलब मैं इसे अच्छी या बुरी के बीच परिभाषित नहीं कर सकती। पर ये कह सकती हूँ कि रुचिकर नहीं लगी। पहले कुछ अध्याय गहरे थे, गंभीर थे बिल्कुल जैसे मानव कॉल का लेखन हो। पर फिर आगे मेरा मन नहीं लगा। मुझे अजीब सी अरुचि हो गयी। मैं खुद को किताब से जोड़ नहीं पाई। लेखन और लेखनी दोनों उम्दा है पर किताब से बंधे रहने के लिए मात्र इतना काफी नहीं होता।
17 reviews
March 26, 2023
सुशोभित के अनुसार कहानी कही जाती है। कहने की खास शैली कहन बन जाती है और लेखक अपनी कहन से पहचाना जाता है । इस किताब को आप किसी भी पन्ने से खोलकर पढ़ सकते हैं । रोचक , दिलचस्प और ज्ञानवर्धक । सुशोभित के इन किस्सों में भाषा पर उनकी पकड़ और विषय का गहन अध्ययन झलकता है । जीवन दर्शन से लेकर , भोजन रति , दैनिक जीवन की घटनाएं , इतिहास सब एक साथ । कितने ही प्रसंगों के लिए गूगल का सहारा लेना पड़ा ताकि संदर्भ समझ आ सके । जैसे - उत्तरी मोल्दावीया के चित्रित मठ में इंका सभ्यता का ज़िक्र आने से उसे अलग से पढ़ना पड़ा ।पढ़ने के दौरान बिंब उभर आते हैं - जैसे नववधू का पूरा प्रसंग जहाँ सुशोभित ख़ूबसूरती से लिखते हैं कि नववधू के चेहरे पर एक साथ कामना और बिछोह , स्वप्न और संशय , जीवन और मृत्यु एक साथ दिखता है । आप कुछ समय ठहर कर कल्पना करते हैं और विस्मित हो जाते हैं । बायस्कोप के बाद सुशोभित का यह दूसरा गद्य पढ़ा । हालांकि उन्हें दो सालों से फेसबुक पर पढ़ रही हूँ । भाषा और विषय वस्तु पर उनकी पकड़ पाठक को आकर्षित करती है और उनकी अगली पुस्तक पढ़ने के मोहपाश में जकड़ लेती है।
Profile Image for Ved Prakash.
189 reviews28 followers
July 5, 2021


लेखक ने पुस्तक परिचय में ही बता दिया है कि ये 'कहन' केटेगरी की पुस्तक है ― नैरेटिव प्रोज है; कुछ खुद की कहानियों में कल्पना की चासनी है तो कुछ कल्पनाओं में खुद की कहानी का अक्स है।

पुस्तक छोटे-छोटे किस्सों का संकलन है। वैसी घटनाएँ जो आपके आस-पास घटित होती है, आपके साथ घटित होती है लेकिन देखने के नज़रिये के फर्क से किसी के लिए वे आम रह जाती हैं और किसी के लिए पूरी कहानी बन जाती है।

लेखक का नजरिया इतना कवित्व वाला, इतना संवेदनशील, इतना विस्तृत है कि उन्हें किसी जगह खड़ी रेलगाड़ी में भी जीवंतता, दुःख-सुख और एक कहानी दिख सकती है। और भाषा तो माशाअल्लाह ― क्लिष्ट और उर्दू वाले शब्द हैं। भाषा ज्ञान के लिए भी पढ़ी जाने लायक पुस्तक।

पढ़कर मैंने यश ही पाया होगा क्योंकि कई जगह, कई कहानियों का पात्र मैं खुद ही बन जा रहा था।

"कई बार कथावाचक अपनी कहानी से उतना नहीं जुड़ पाता, जितना कहानी सुनने वाला जुड़ जाता है। कहानी सुनना भी एक बड़ा यश है।"

(इसी पुस्तक से)

398 reviews14 followers
September 23, 2020
हिन्दी किताबें काफी दिनों के बाद फिर से पढ़ रही हुं। सुशोभित की लिखी हुई लघु कहानियां कहीं दिल को छू जाती है। जाना बहुत सारी नई बातें, कुछ पुरानी यादें भी ताजी हो गई। कुछ कहानियां साधारण दिनचर्या की, कुछ पुरानी कहानियों का अपना तर्जुमा, कुछ देशी, कुछ विदेशी, मन लगा रहा और दिल खुश हो गया।
Profile Image for Dilbag Singh.
Author 15 books1 follower
September 11, 2021
Maza aa ghya read kr ke. kuch kuch bata to pata he nahi the, pata chalta hai mujhe kuch pata he nahi hai.
Profile Image for Vishal Sharma.
88 reviews14 followers
February 25, 2024
एक अलग ही स्वर की किताब, जिसमें स्वाद वही हैं जो कुछ आप जानते हैं और कुछ बिल्कुल अपरिचित। पर एक स्वर रह जाता है, वही जो आपका स्वाद है और वही जो इस किताब का स्वाद है।
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