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महासमर Mahasamar : Paritranaya Sadhunaam

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वह एक पत्रकार था। अपने पेशे के प्रति समर्पित कर्मठ पत्रकार। जो अपने अखबार के संपादक के निर्देश पर एक गुप्त अभियान पर था। एक ऐसे अभियान पर जिसका मकसद हंगामा खड़ा करना था। ये एक ऐसा अभियान था जिसमें या तो झूठ का पर्दाफाश करना था या सच को झूठ साबित करना था। एक दुर्घटना को एक घोटाला साबित करना था या फिर उसे संदेह के दायरे में लाना था।


और उस अजीबोगरीब अभियान पर काम करने के दौरान कब एक रहस्यमयस्नाइपर, एक फौजी, एक प्राइवेट जासूस, एक अंतर्राष्ट्रीय ठग, एक अंतर्राष्ट्रीय अपराधी, एक अंतर्राष्ट्रीय सुपारी किलरएवं एक नामचीन उद्योगपति के साथ-साथ देश की सभी सुरक्षा एजेंसियों सहित सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के कई धुरंधरों का दखल बन गया, इसकी उसने कल्पना तक नहीं की थी।उसको तनिक भी आभास नहीं था

428 pages, Paperback

Published June 1, 2019

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4 (19%)
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1 (4%)
2 stars
4 (19%)
1 star
2 (9%)
Displaying 1 - 4 of 4 reviews
Profile Image for Sameer Mehra.
237 reviews2 followers
March 29, 2022
4/5 stars

सुपौल गांव के बाँध औऱ BRI संस्थान के इर्द गिर्द कहानी की नींव रखी गई हैं. अमन का पत्रकारिता का संघर्ष, साथर्क का सुषमा के लिए जंगल में संघर्ष औऱ ऐसी ही बहुत सारी घटनाएं हैं जो पूरा मनोरंजन करती हैँ.

बहुत ही बड़ी कहानी हैं जिसमें करैक्टर डेवलपमेंट पर ध्यान देकर 3-4 पार्ट्स में सीरीज पूरी की जानी चाहिए थी. कई बार किरदारों के नाम याद नहीं रह पाते, मेरे हिसाब से तो Beginners औऱ यंग पाठक तो नहीं पढ़ पाएंगे.

कुछ कमियों के बाद भी सच कहूँ तो लेखक ने शानदार काम किया हैं औऱ जबरदस्त थ्रीलर किताब लिखी हैं.
Profile Image for Rajan.
637 reviews42 followers
January 25, 2021
अपने परिचय भाषण में डॉ० पालीवाल ने भूजल के निरंतर घटते स्तर, भूजल प्रदूषण, घटती वर्षा आदि विभिन्न मुद्दों को छूते हुए इस बात पर जोर दिया कि हमें अपनी पारंपरिक जल संग्रहण व्यवस्था को पुनर्जीवित करना होगा। उन्होंने सभी मंचासीन गण्य मान विभूतियों का संक्षिप्त परिचय देते हुए, सम्मेलन के उद्देश्यों और संभावित उपलब्धियों के साथ-साथ सम्मेलन के विभिन्न सत्रों का परिचय देते हुए सभी का स्वागत किया। उनके उपरांत वक्ताओं ने जल संकट और उससे उत्पन्न और संभावित समस्याओं का आँकड़ों के साथ उल्लेख करते हुए संरक्षण के लिए अतिशय भूजल दोहन पर अंकुश लगाने, नदियों, जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त करने और जल को व्यापार की वस्तु न बनने देने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की माँग की।






“आप तो जानते ही हैं कि इस देश का सिस्टम किस कदर भ्रष्टाचार में डूबा है। पर्यावरण का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है।” –प्रो० कुछ देर को रुके, फिर सीधे उनकी ओर देखते हुए बोले–“ऐसी अव्यवस्थाओं की सप्रमाण पोल पट्टी खोलें।” “सर, ये हमारा काम नहीं। ये तो एक तरह का स्टिंग अभियान हुआ।” “लेकिन क्या सच को उजागर करना ही सही पत्रकारिता नहीं है?” “सर, पत्रकारिता में बहुत सी चीज़ें आती हैं। जैसे हर कोई हर काम नहीं करता वैसे ही हर पत्रकार हर प्रकार की पत्रकारिता नहीं करता। ये बिलकुल वैसा ही है जैसे एक विशेषज्ञ केवल अपने विषय में ही काम करता है।”






“प्रथम ग्रासे मक्षिका पातः!”–गोकुल शुक्ला बोला–“यह सोचकर जाओगे तो क्या कर पाओगे?” “सर आप मुझे रेत में पिन ढूँढ़ने को कह रहे हैं, जिसका यह भी पता नहीं कि वह है भी या नहीं। मैं अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ूँगा। लेकिन जो चीज़ होगी ही नहीं, वह कैसे खोजी जा सकती है?” “तुम्हें अगर विश्वास होगा कि वह चीज़ है, तभी तुम खोज पाओगे। अगर तुम सोचोगे कि चीज़ है ही नहीं, तो खोजोगे क्या?” “सर, वहाँ पर कुछ भी मिलना नामुमकिन है और आप चाहते हैं कि मैं निर्माण में हुये घोटाले का सबूत ढूँढू। अब जब निर्माण के अवशेष तक ही नहीं हैं, तो सबूत कहाँ होंगे? जब निर्माण ही नहीं, तो उसके घटिया होने को साबित कैसे करेंगे?” “हम नहीं साबित कर सकते, तो वे भी तो साबित नहीं कर सकते कि निर्माण घटिया नहीं था।”







“हूँ।”–अमन ने स्वीकृति में सिर हिलाया–“मगर ये भी कैसी विडम्बना है कि जो योजना बाढ़ से छुटकारा दिलाने के लिये लाई गई, वही बाढ़ की चपेट में आ गई!” “इसमें योजना की कोई कमी नहीं है।”–विजय ने कहा–“दरअसल, राजनीति और बाबूगिरी के चलते जो योजना चार वर्ष में पूरी होनी थी, वह पाँच वर्ष में भी पूरी न हो सकी। बिहार सरकार से पैसा ही बहुत बाद में जारी हुआ। लिहाजा निकास नहरों का केवल सर्वेक्षण का काम ही पूरा हो सका।” “लेकिन इसमें तो विश्व बैंक और ‘ग्लोबल एन्वायरमेंट फण्ड’ का पैसा लगना था न?” “जो पैसा विलायत से मिलता था, वो ही काम मुश्किल से पूरे हुये। योजना आयोग और बिहार सरकार की ओर से घपला ही रहा।”–विजय बोला–“इसलिये निकास नहरें समय से न बन सकीं। अगर वे बन जातीं, तो आज इस क्षेत्र का हुलिया ही कुछ और होता।”
17 reviews1 follower
December 17, 2020
बढ़िया और तेज तर्रार

एक बढ़िया और बड़े फ्रेम की कहानी जो हाल फिलहाल कई घटनाओं से मेल खाती हुई है. हालांकि अलग अलग कहानियाँ कुछ उलझन भी पैदा कर रही हैँ. रोमांच है रहस्य है एक्शन है अच्छी कहानी भी है, कुल मिला कर शुरू में बोर पर जैसे-जैसे आगे बढ़ते गए मजा आता गया.....शानदार 4.5/5
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