अपनी एक यात्रा के दौरान मेरा मिलना एक छोटी बच्ची से हुआ जिसके चेहरे पर बचपन से ही एक निशान था। जो दाँए कान से शुरू होकर गाल पर खत्म होता था। उसका रंग सांवला था मगर वो निशान लाल और काले धब्बो से भरा हुआ उभर कर अलग ही दिखता था। उसके चेहरे के इस निशान ने उस बच्ची के माँ-बाप को एक लम्बा सफर तय करके एक अच्छे, बडे और मेंहगे हॉस्पिटल में लाने पर मजबूर कर दिया था। उनकी जुबानी कहूँ तो वो ज्यादा परेशान उसके निशान की वजह से नहीं ब्लाकि इससे थे की वो उनकी लडकी पर है। उन्हें फिर्क थी की ये बदसूरत निशान उस बच्चीे की जिन्दगी में आगे चलकर उसके बदसूरत चेहरे का सबब होगा। लोग उसे देखरक मुँह फेर लेंगे, उसकी शादि कहीं नहीं होगी। उस बच्चीे की ये बात मेरे जहन में रह गई और मैं ये सोचने पर मजबूर हो गया की क्या एक लडकी की ज&