Jump to ratings and reviews
Rate this book

नयी सहर की आस में

Rate this book
कविताएं भावनाओं का प्रतिबिम्ब होती है। मैनें सिर्फ वही लिखा जो हालात और वक़्त ने मुझसे लिखवाया। मेरी कविताएं मात्र किसी एक विधा तक सिमित नही है, और इसका एक कारण है की भावनाएँ किसी एक विधा तक सिमटकर नही रहती।

कई ऐसी परिस्थितियां एवं हालात जो इंसान को मजबुर कर देती है गलत राह कर चलने के लिये, ऐसे मे बहुत जरुरी है की इंसान अपना सम्पुर्ण साहस जोड़कर मजबुर से मजबुत होने की तरफ अपना कदम बढ़ाये। परिस्थितियां चाहे जो भी हो लेकिन हमारे अंदर एक नयी सुबह की उम्मिद जीवित रहना जरुरी है। इस संग्रह का शीर्षक "नयी सहर की आस में" चुनने का यह एक मुल कारण है।

66 pages, Kindle Edition

Published October 15, 2019

About the author

Nitin Kalal

9 books4 followers

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
1 (100%)
4 stars
0 (0%)
3 stars
0 (0%)
2 stars
0 (0%)
1 star
0 (0%)
No one has reviewed this book yet.

Can't find what you're looking for?

Get help and learn more about the design.