जिसकी रिपोर्ट न लिखवाई जाये वो अपराध नहीं होता है। शायद यही सिद्धान्त था कि वो सड़क पर मजबूती के साथ खड़ा हुआ। अगल-बगल से लोग कुछ यूं खुद को समेटे जा रहे हैं मानो सड़क की दूसरी तरफ बदबूदार पानी बह रहा हो ....नेहा की कलाई का खून उधर गिरा है...उस तरफ...शायद उसके घर की खामोशी और तनहाई है उस तरफ ....शायद पीकर पड़े हुए अनिरबन की उल्टियाँ हैं उस तरफ ....या दिया के कपड़े और दिवा के पेट का भ्रूण फिंका है उस तरफ...लोग उन सबसे खुद को बचाते हुए पार होते जा रहे थे और होते रहेंगे... ये रेड लाइट एरिया की सड़क है औ उस तरफ से आपको इशारे किए जा रहे होंगे, आपको बुलाया जा रहा होगा...बगल में ही एक मंदिर है जिस पर रखे लाउडस्पीकर में आरतियाँ बज रही हैं...प्रभात ने विजयी दृष्टि से सड़क की दूसरी तरफ देखा।मानो वो छोटा मंदिर उसके पाप के प
नमस्कार, मैं हर्ष रंजन अपनी रचनाओं के संसार में आपका स्वागत करता हूँ। मेरी कलम मेरे लिए मेरी आवाज, मेरे सपने, मेरी सच्चाई, मेरी गलतियां, मेरा हथियार और मेरे लिए दुनिया की सबसे पहली टाइम मशीन है। इन वाक्यों में मैं की जगह आप होंगे अगर आप इन किताबों के साथ कुछ कदम एक साथ चलने के लिए तैयार हैं। मेरी किताब न तो सर्कस है, न तो आपका ध्यान और आपके यत्न खींचने के लिए कोई व्यूह, न तो ये सत्संग हैं। ये एक बसा हुआ शहर है जहाँ हर एक अनुच्छेद एक गली है और हर शब्द एक मकान। हर एक कविता, हर कहानी अपने आप में एक संसार है। मैं आपको दिल की एक बात बताना चाहूंगा। मैंने हिंदी को उसकी शुरुआत और हिंदी के साहित्य को उसकी शुरुआत से जाना है। ये सफर बहुत रोचक है। कई प्रतिभा आयी और हिंदी को कुछ कदम और आगे बढ़ा गईं। मैंने अपने शब्दों का, अपनी शैली का आविष्कार नहीं किया, मैंने एक परंपरा को एक अनुज की तरह आगे बढ़ाया है। साहित्य के वर्णित विषय और साहित्य की शैली पुरानी हो सकती है पर समय का चक्र उन्हें फिर से उभार लाता है। किताबें पढ़ें और अपने विचार जरूर बताएं। आभार