ज्योतिष शस्त्र एक विज्ञान है क्योकि विज्ञान की तरह ज्योतिष भी नियमो के आधार पर कार्य करता है। जिस प्रकार विज्ञान मे नित नये अनुसन्धान होते रहते है उसकी प्रकार ज्योतिष शस्त्र मे लगातार अनुसन्धान चलते रहते है। ऐसा ही एक अनुसन्धान दक्षिण भारत के महान ज्योतिष मार्तण्ड श्री के॰ एस॰ कृष्णमूर्ति जी ने किया था। वैसे तो उनकी यह नयी ज्योतिष पद्धति भारतीय ज्योतिष के प्राथमिक सिद्धान्त पर ही आधारित थी, परंतु उन्होने अपने ही अयनांश का का प्रयोग किया, जो लहरी अयनांश से लगभग 6 कला कम है। इसे केपी अयनांश कहा जाता है। इस पद्धति मे उन्होने किसी ग्रह के नक्षत्र स्वामी तथा उपनक्षत्र स्वामी पर विचार करने पर विशेष बल दिया है। किसी विशेष भाव के मुख्य कारक ग्रह, उसके नक्षत्र स्वामी तथा उसके उपनक्षत्