छात्र और छात्रसंघ महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के दशकों से अनिवार्य घटक हैं, विशेषकर पूर्वांचल और उत्तर भारत में। “राजनैत” छात्र राजनीति पर केन्द्रित एक व्यंग्य उपन्यास है। व्यंग्य भी ऐसा जो दिल को छू जाए। यह उपन्यास नब्बे के दशक के छात्र राजनीति के अनेक परतों को उसी रुप में जीवन्त करता है, जैसा उस समय होता था। वैसे तो छात्र राजनीति पर अनेकों उपन्यास लिखे गये हैं, लेकिन पूर्वांचल और विशेषकर बनारस (वाराणसी) की छात्र राजनीति पर यह अपनी तरह का अनोखा उपन्यास है, जो घटनाओं को वास्तविकता के साथ जीवंत करता है। लिंगदोह समिति के प्रतिवेदन लागू होने से पूर्व छात्रसंघ का चुनाव जैसा होता था, उसकी परत-दर-परत इसमें दिखाई देती है। इसमें स्वनामधन्य गुरु हैं, तो मठाधीश भी है। इसमें छात्र रा&#