1984 में कुछ ऐसा हुआ जिसने देश को टूटने के कगार पर ला दिया।
सिख समुदाय और सम्पूर्ण भारत के पवित्र स्थल स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना के प्रवेश और उसके कारण देश के भविष्य में कभी भी उत्पन्न ना हो, इसके लिए इस इतिहास को जानना आवश्यक है। ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसा ऑपरेशन एक अंतिम विकल्प था या ऐसे हालात बनाए गए? क्या सियासी पैंतरों की बलि देश के नागरिक और हमारे सांस्कृतिक स्थल चढ़ गए? क्या यह पंजाब के हृदय में सदा के लिए एक ज़ख़्म दे गया? क्या यह कांग्रेस पार्टी पर एक धब्बा बन कर रह गया? क्या यह भारत में पहली बार एक प्रधानमंत्री की हत्या का कारण बना? क्या यह देश के भिन्न भिन्न क्षेत्रों में एक साथ पनप रहे अलगाववाद का हिस्सा थी? क्या इसमें 1971 के युद्ध से बिखरे पाकिस्तान की साज़िश थी? आख़िर क्या और क्यों था ऑपरेशन ब्लू स्टार?
बोंज़ुरी बाइट्स Bonzuri Bytes प्रस्तुत करता है 'गांधी परिवार' के बाद Lotus Series की अगली पेशकश।
लोटस सीरीज का पार्ट-2 "ऑपरेशन ब्लू स्टार"। यह भारतीय इतिहास का एक ऐसा पन्ना है जो फिर कभी न दुहराया जाए इसलिए इसे पढ़ना व समझना जरूरी है।
क्या राजनितिक दावपेंच व धार्मिक कट्टरता का द्वन्द ऐसे मोड़ पे आ खड़ा हुआ जँहा ऑपरेशन ब्लू स्टार के अलावा कोई विकल्प नहीं था? आखिर ऑपरेशन ब्लू स्टार का निर्णय क्योँ लिया गया, इसके उत्तर की तलाश में इतिहास को साथ जोड़ते हुए प्रवीण झा बहुत कम शब्दों में हर महत्वपूर्ण घटनाओं का जिक्र व उनके आपसी सम्बन्ध जोड़ते हुए चलते हैं।
हर घटना के सही-गलत का निर्णय व्यक्ति विशेष व उसके पूर्वाग्रह पर निर्भर कर सकता है। इतने संवेदनशील विषय को पढ़ के पाठक के मन में एक ही शब्द आता है, काश.....। खैर, प्रवीण झा हर विषय पर सटीक व कम्पैक्ट लिखते हैं, ऑपरेशन ब्लू स्टार के कारण व अंजाम को समझने के लिए अच्छी पुस्तक है।
यह किताब इस विषय की सबसे कमजोर और सिलेक्टिव तथ्यों पर आधारित है। यह किताब तथ्यों को छुपाने के लिए ज़्यादा और दिखाने के लिए कम लिखी गई महसूस होती है। किताब की लंबाई कम रखने के चक्कर में कुछ महत्वपूर्ण और बड़े तथ्य या तो पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिए गए हैं या शायद लेखक ने अपनी शोध में उन्हें लाना जरूरी ही नहीं समझा। लेखक द्वारा पुस्तक में दी गई रेफरेंस बुक्स से ही देखकर पता चलता है कि उसने सिर्फ एक ख़ास किस्म के नॉरेटिव को पेश करती किताबें और कुछ अखबारों और पत्रिकाओं की खबरें ही पढ़ी हैं। लेखक ने यूं तो पहले ही माफी मांग ली है लेकिन किताब के कुछ पन्ने पढ़कर ही समझ आ जाता है की लेखक कि पूर्ण धारणा के साथ किस मकसद के साथ किताब लिख रहा है। अंततः यह किताब पहले से प्रचलित एक ख़ास किस्म के राजनीतिक नॉरेटिव को आगे बढ़ने का ही काम करती है। इस से बेहतर पक्षपात रहित जानकारी इंटरनेट पर सुलभ उपलब्ध है। मुझे इस किताब पर ख़र्च हुए पैसों से ज़्यादा ख़र्च हुए कीमती समय और ऊर्जा का अफ़सोस है। शायद ही पंजाब का या देश भर मैं इतिहास की शोध करने वाला कोई विद्वान इस किताब को सत्यापित करने की चूक करेगा।
'ऑपरेशन ब्लू स्टार' पर लिखी गयी यह पुस्तक महत्वपूर्ण है। हालांकि इस पुस्तक में बहुत से तथ्य छूट गये हैं, जैसे पाकिस्तान का भिंडरावाले को हथियार देना। इस पुस्तक का विस्तृत संस्करण आना चाहिए। निकृष्ट राजनीति और एक अर्ध शिक्षित तथाकथित धर्म गुरु ने पंजाब को आग में झोंक दिया।
प्रवीण झा की एक और शानदार किताब, सरल भाषा में लिखी, एक छोटी कहानी की तरह जिसे एक ही बैठक में पढ़ा जा सका। बहुत अच्छा शोध, कितनी जगहों से जानकारी एकत्र कर उसे एक सरल छोटी किताब में पिरोना बहुत प्रशंसा योग्य है! ये किताब हर भारतीय को पढ़नी चाहिए, बिना राजनीतिक द्वेष के।
Author did justice to this sensitive subject. I went from knowing very little about this subject to knowing a lot after reading this book. Highly recommended. Looking for reading more from the author.