छोटी सी भूल का नाम आपने शायद सुना होगा.ये कहानी वैसे लगभग वही है और वही नहीं भी है।. आप पढेंगे तो आप जान जाएंगे कि मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ.मैं जतिन भाई का शुक्रिया करता हूँ. उन्होंने बिना झिझक के मुझे ये कहानी दोबारा लिखने की इजाजत दे दी. साथ ही उन्होंने ये भी बोल दिया कि मैं इसे अपने ढंग से लिखूं. इस इजाजत का भरपूर फायदा उठाया है मैंने और इस कहानी को बिलकुल नए तरीके से लिखा है. कोशिश तो मैंने अपनी तरफ से पूरी की है इस कहानी को बिलकुल नये रूप में आपके सामने लाने की. बाकि आप ही पढ़ कर बताना कि ये कोशिश कैसी रही.कहानी के बारे में इतना ही कहूँगा कि ये कहानी मानसी की है. और वो इसे ख़ुद ही सुनाएगी. मैं एक तरफ़ रहूँगा इस झंझट से. और मैं झंझट मोल लूँ भी क्यों? भूल तो मानसी की थी.
CHOTI SI BHUL yeh ek was a se bhari diwangi dikhti hai.
Is kahani me sirf sariri ktrupti ko mahatma diya gaya hai. Jiwanki sachchayi ko prastut Kiya gaya hai. Manushya jab apne Sahuarita se apne man ko trust ker pata to use pane ke liye kayi bar bhatak Java hai. Kabhi kabhi aise samay use kayi musibato ka samna karna pad sakta hai, jise wah bina dare samna karta bhi hai, jise hum Choti Si Bhul kahta hai ye sure Jiwan ko badal ker rakh deta hai.