जीवन में लगे हर आग का कारण सिर्फ आपकी गलतियाँ नहीं होती हैं, कुछ आपकी किस्मत भी सुलगा देती है। ये कहानी है बबलू शुक्ला की। जनाब कांट्रेक्टर हैं। 28 के हो गए हैं, पर शादी नहीं हुई अभी तक। खुद कुछ कर नहीं पाए, अम्मा को कुछ करने नहीं देते। ये गाँव के वो युवा हैं, जो इनकी उम्र में अविवाहित रह जाएँ तो लोग युवा कहने से भी कतराने लगते हैं। शादी से डरते नहीं हैं, बस थोड़ा नरबसा जाते हैं। ठेकेदारी की शुरुआत छोटे-मोटे कामों से हुई थी, पर जब से इनको समझ आया है कि रिश्वत देकर सरकारी tender मिल जाते हैं, काम अलग ही level पर पहुँच गया है। इस कहानी में एक लड़का है, एक लड़की है, दो दोस्त हैं, एक गाँव है। वो सब कुछ, जो हो सकता है। पर इसके साथ मिलेगा शुक्ला जी का खुद पर अपार विश्वास, धंधे में आ रही दिक्कतें, रिश्तों की गहराई, नैतिकता पर सवाल और हल्का सा इश्क। बस... हल्का सा।
Ajay Raj Singh is a Chartered Accountant by profession and a storyteller by passion. His current address has Indore's pin code. His literary journey spans across novels, poetry, songs, and philosophical musings. He debuted with the Hindi romantic-comedy novel 10th Fail (दसवीं फेल), followed by his second novel, Aadha Hisaab (आधा हिसाब).
His poetry, ghazals, and musings can be found at 'Ex Writer' on Facebook and Instagram. A traveler at heart, Ajay draws inspiration from new places, cultures, and experiences, weaving them into his stories. He sees literature as an ever-evolving art and likes to considers himself a small part of this continuous transformation.
" इन्सान का दिमाग एकदम क्लियर होना चाहिए कि उसको जीवन में क्या चाहिए । बाकी क्या फरक पड़ता है कि जमाने में क्या हो रहा है , और क्यों !
- अजय राज सिंह ~ 10 वीं फेल
10 वीं फेल - कम शब्दों में कहा जाए तो गणित के माध्यम से जीवन के व्याकरण को समझाने का बेहतरीन प्रयास !!
10 वीं फेल कहानी है , 28 वर्षीय अविवाहित भास्कर शुक्ला उर्फ़ बबलू शुक्ला की .
खैर , " 10 वीं फेल "और " 28 वर्षीय अविवाहित " , दोनों ही बातें आपको इसलिए बताई गयी हैं क्योंकि आगे चल के यही दो बातें कहानी की भूमिका तय करेंगी.
बबलू शुक्ला के पिता के देहांत तब ही हो गया था जब बबलू 3 वर्ष के थे , परिवार में बबलू के अलावा सिर्फ उनकी मां है जिनके साथ बबलू का रिश्ता बेहद ही दिलचस्प संवादों से भरा है .
स्कूल में बबलू शुक्ला का मन ज्यादा लग नहीं पाया था , और जिसका नतीजा ये रहा की बबलू शुक्ला 10 वीं फेल ही रह गए थे .
वैसे जनाब कांट्रेक्टर है , भले ही ठेकेदारी के काम की शुरुआत छोटे - मोटे कामों से हुई हो , पर रिश्वत देकर उन्हें सरकारी टेंडर भी मिलने लगे और जिसके कारण बबलू फस गए सरकारी दावं - पेचों में !
वहीं जीवन के Personal हिस्से में जहां बबलू की अम्मा उनके लिए लड़की तलाश कर रही है , के माध्यम से बबलू के जीवन में आता है पिंकी शर्मा नाम का तूफान !
पिंकी शर्मा , जो अंग्रेजी की teacher हैं , जर्नलिस्म की पढ़ाई पूरी कर चुकीं है , अब इंटर्नशिप का सपना देख रही हैं , क्या एक 10 वीं फेल को पति रूप में स्वीकार करेगी ।
अब आगे क्या होगा , कानूनी पेंच से बबलू किस तरह निकल पाएंगे ?
पिंकी शर्मा के साथ उनकी कहानी कुछ आगे बढ़ पाएगी या नहीं ?
जानने के लिए आपको पढ़नी होगी अजय राज सिंह जी की किताब 10 वीं फेल .
अजय राज सिंह जी की ये कहानी बहुत ही मजेदार है , बबलू एक ऐसा किरदार है जो आपका पसंदीदा बनना तय है , पर मैं पिंकी शर्मा से भी काफ़ी impress हूं !!
किरदार , दृश्य और संवाद एकदम जीवंत है !!
पूरी किताब में कुछ भी ऐसा नहीं है जहां आप break लेना चाहेंगे , किताब बहुत बड़ी भी नहीं है और 2 - 3 sitting में आसानी से पूरी की जा सकती है ।
एक बार पढ़ने से मन कतई भरेगा नहीं , आप किताब को कई बार पढ़ना चाहेंगे ये तय है !!
बबलू शुक्ला पाठक का दिल वहीँ जीत लेते हैं जब वो कहते हैं कि - लोगों पर तरस खाने की आदत तो हममें बचपन से थी, सो हमने भी कह दिया, “जाइए गुरुजी, माफ किया आपको।” बस फिर क्या था, दो डंडे और पड़े, और टी.सी. हाथ में। तब से लोग हमको ‘दसवीं फेल’ कहते हैं, और हम खुद को ‘नौवीं पास’।
व्यंग्य और हास्य रस से भरी हुई इस किताब में सब कुछ है। शानदार romantic comedy novel... must read.
हिन्दी किताब यसो कहिलेकाही आक्कलझुक्कल पढ्ने गरिन्छ ! यो किताब दसवी फेल ( अभिषेक बच्चनको फिलिम सङ्ग साईनो त्यति छैन है) चै सानो , हल्का (light read) तर मजेदार लाग्यो ! स्कुल बेलाको आफ्नो नाम मन नपरे फेर्न मन लाग्ने , गुरु सङ्ग हुने हल्का नोकझोक , आमा लाई रिझाउन लाउने मस्का चस्का, क्लास बंक गरेर ( ज्ञानी म चै बंक गरेको बस दो तीन पटक होला त्यो नि प्लस टु र ब्याचलरमा) साथीभाइसङ्ग खेल्न - घुम्न - बदमासी गर्न जाने , झगडा र मिनि लडाइ 😂 , कुराकानी र फिजुलका कामका बातचित, हल्ला गर्दा केटी \ केटाको बेन्चमा बस्न पर्ने सजाय, आदि अनि आमा \ बा सङ्ग को पढाई ( र एग्जामको रिजल्ट) लाई लिएर हुने गफ अनि दर्शन अनि स्कुलमा आगो लागोस् र आफुलाई रामधुलाई पिट्ने सरलाई हिरो भएर बचाउने ( या न बचाउने) सपनाको मिठो nostalgia दिन्छ उपन्यासले ! हिन्दी पनि कति मीठो तवरले बिना कुनै गार्हा शब्द सहि संयोजन गरेको के ! अझ अर्को मजेदार कहानी हुर्कदै गएसी हाम्रो चन्चलता , matured behavior , जिन्दगीका आरोह अवरोहमा भोग्ने साथी , दुख सुख , प्रेम ( infactuation पनि), विछोडका किस्सा कति मजाले लेख्या छन् !
युवा वस्थामा पुगेसी हामीलाई पर्ने गामठाम र घरको विवाह कहिले गर्ने वाला प्रेसर , विवाहभन्दा career लाई focus दिने भन्ने माथापचिसी, दुनियाँका छोरछोरीसङ्ग सधैं हुने तुलना अनि दोश्ती ( दरार र मिलन वाला) का किस्सा गजपको लाग्यो। अर्को रमाइलो कुरो चै हाम्रो जिन्दगीमा तयारीका साथ केही हुन्न भन्ने कुरो नि लाग्यो --- प्रेम , मित्रता , विवाह 😂🤣😃 ---- अलि अलि life lessons , दिलका मामिला र झमेला को नि दामी visualization आउने रहेछ पढ्दै जाँदा ! पढाईमा फेल भए पनि जिन्दगीले धेरै कुरा सिकाउँछ भन्ने कुरो नि आको छ। पढाइभन्दा व्यावहारिक शिल्प , अलि अलि risk मोल्ने आवारापन अनि व्यापार चेत छ भने successful हुन सकिन्छ भन्ने नि आको छ सन्दर्भ । सरकारी कार्यालयमा पैसा ( घुस) बिना कुनै काम नहुने र आफ्नो शक्तिको दुरुपयोग गर्दै कुश्त धन आर्जन गर्ने कर्मचारीको प्रसङ्ग नि आको छ र साथमा कानुनले एक दिन त्यस्ता पात्रलाई सजाय दिन्छ नै भन्ने context नि आको छ। अत: प्रेम कहानी यसमा अधुरो र अपुर्ण लागे तापनि आफैँमा पुर्ण चै छ नै। आखिर ; जिन्दगीमा पहिलो प्रेम जो सङ्ग हुन्छ र जो सङ्गै पूरा जीवन साँच्ने सपना हुन्छ ; त्यो पूरा हुन्न भन्ने romantic प्रसङ्ग नि छ अन्तिम अन्तिम तिर ! अनि; परिस्थिति स्थिति जे जस्तो होस् --- हरपल साथ दिने बन्धु सबलाइ चाहिन्छ है भन्ने सन्देश नि देको छ ---- चाहे त्यो साथीको व्यवहार फन्टुस नै किन नहोस् !
पेसाले CA लेखक को प्रयास पहिलो भए नि मजा दिने रहेछन् यसमा! भारतको देहात ( गाउँ) मा मात्रै पुगिएन --- पात्रहरु मार्फत् गाउँको सेरोफेरोमा आफुलाई ढालियो ----- lifestyle बुझियो, गाउँलेका आनिबानि बुझियो सरल सहज तौरमा। narration को aspect कतै मिलेन जस्तो लागे पनि लेखकले रमाइलो तरिकाले clarify देका छन् ! अलि अलि कमेडी फिलिम हेरे झैँ लाउने के अनि अलि अलि मुन्शी प्रेमचन्दका works को महक नि पाइने। मिठो मर मसला हालेको पकवान झैँ लाग्यो यो उपन्यास ! Dialogue transition नि humourous अनि चट्ट मिलेको लाग्यो। नभनीकन सन्तानको मन बुझ्ने शक्ति आमाको मात्रै हुन्छ भन्ने कुरो नि हजम भयो! दिमागलाई जोर नदिइकन मजाले पढ्न सकिन्छ यो उपन्यास reading slump हुँदा त !
रोचक कुरो लागेको चै गाउँको classification थ्यो ---
१ प्रकार गाउँ --- "गाउँ " वाला पुरै सानो चिया पसल , केही मानिस, भुइँमा बसेर हल्ला गर्ने खुला स्कुल , बारीमा हुने शौचालय, किसान, धनीकोमा हुने कुँवा अनि २-३ घण्टामा आउने थोत्रो बस या गोरुगाडा अनि innocent सफा मन चरित्रका वासिन्दा भएका
२ प्रकार गाउँ - गाउँ जस्तै तर अलि कम वाला अलि ठूलो चिया पसल , एउटा क्लिनिक , कम पढेको र शहरमा डाक्टर बन्न लेबल नपुगेको तर गाउँको हिरो डाक्टर (भगवान् नै अझ) , धनीको मा मारुती 800 , एउटा स्कुल desk bench वाला, ngo ले बनाएको शौचालय तर प्रयोग चै गोदामको रुपमा हुने , शहरको हल्का नजिक , किसानीभन्दा labour काममा लाग्ने , ठुलो स्वर मा गीत बजाउने ,
३ प्रकार गाउँ -- गाउँ कम , शहरको नजिक देखिने गाउँ --- पूरा शहर नभएको राजनीतिले गर्दा , एक दुई english स्कुलहरु , ४-५ क्लिनिक र दोकानहरु, तरकारी बजार, हाट-बजार , गाडी अलि बेसि आउने बस स्टप, बिजुलीको हल्का ज्यादा पहुँच , एउटा फिलिम हल अनि मान्छेहरु आफुलाई त्यति गाम्ले मान्दैनन् 😂🤣
चाहने और होने की बीच की दूरी का नाम जीवन है। हर किसी का सफर इसी दूरी में कही शुरू होकर खतम हो जाता है, पर वो सफर कभी पूरा नहीं होता। उस अधूरे सफर के मुसाफिर के नाम।
पुस्तक 10 वी फेल अजय राज सिंह द्वारा लिखी गई है, पुस्तक notionpress से प्रकाशित है और कुल 127 पन्नो में है, 1से 2 बैठक काफी है पूरी करने के लिए। 10 वी फेल 28 वर्षीय अविवाहित बबलू शुक्ला नहीं नहीं ये तो होगया वो नाम जिसका नामांकरण खुद किया गया था वैसे नाम भास्कर शुक्ला है, पेसे से ठेकेदार जो सुनना उनका अच्छा लगता नहीं तो बिल्डर बबलू शुक्ला के नाम से फेमस है।
बबलू शुक्ला के पिता का देहांत तब ही होगया था जब वो तीसरी कक्षा के थे पिता जी आर्मी में थे उनकी अम्मा हमेशा भगवान से बोलती की उनको कभी बॉर्डर पे कोई गोली छू भी न पाए और इधर पिताजी चिकनगुनिया से चल बसे थे। अब परिवार में बचे दो लोग शुक्ला जी और उनकी अम्मा दोनो का रिश्ता बड़ा दिलचस्प बन गया था। पढ़ाई में मन न लगने की वजह से शुक्ला जी 10 वी में फिर से फेल होगए और पढ़ाई वही बंद होगायी तबसे वे सबके लिए 10 वी फेल और खुदके लिए 9 वी पास कहलाने लगे। वैसे हमने बताया न शुक्ला जी बिल्डर है, कॉन्ट्रैक्ट पे छोटे मोटे काम से शुरुआत की थी पर धीरे धीरे रिश्वत देकर सरकारी टेंडर भी लेने लगे थे अपने दो दोस्तो के साथ काम में तरक्की कर रहे थे फिर एक बार फस ही गए रिश्वत देकर टेंडर लेने के घोटाले में।
बात करते है इनके अविवाहित जीवन की तो बबलू शुक्ला की अम्मा चाहती है की उनकी शादी होजाए पर बबलू जी हमेशा टाल दिया करते थे ऐसे ही अम्मा ने एक बार पूछ ही लिया तुम शादी करोगे की नहीं कोई सही समय नही होता बनाना होता है अम्मा की बात में बबलू शुक्ला भी दिन रात परेशान होकर हां बोल ही देते है , फिर जाते है लड़की देखने नाम पिंकी शर्मा लड़की जैसे बताई गई थी उसकी बिल्कुल विपरीत शांत के जगह तूफान थी पिंकी जी जर्नलिज्म की पढ़ाई कर चुकी है और अब इंटर्नशिप के लिए अप्लाई कर सेलेक्ट होने का इंतजार कर रही है, बबलू जी से शादी करने में उनको को8 दिलचस्पी न थी वो तो सीधे सीधे मना करदी थी । फिर बबलू जी के ही गांव में इंग्लिश पढ़ाने आ गई थी घर वालो से परेशान होकर, धीरे धीरे शुक्ला जी से मुलाक़ात और बात का सिलसिला बो बढ़ता चला गया। अब आगे क्या होगा क्या पिंकी जी बबलू जी को अपना दिल दे बैठेंगी या फिर दिल्ली की ओर निकल पड़ेगी, या करेगी 10 वी फेल से शादी? क्या शुक्ला जी सरकारी दांव पेंच से बाहर आएंगे या और बुरी तरह से फस जाएंगे? इन सब सवालों के जवाब जानने की लिए पढ़नी पड़ेगी अजय राज सिंह की पुस्तक 10 वी फेल। अजय राज सिंह जी की ये कहानी बड़ी ही मजेदार है। पूरी कहानी में जीवन को गणित के माध्यम से बतलाया गया है। किताब पढ़ कर एक बार में ही मन भर जाए कहना मुश्किल है, किताब के किरदार इतने मजेदार है की बार बार पढ़ने की इच्छा जागेगी। धन्यवाद 🙏 अमीषा❤️
इस किताब को पढ़ना मेरे लिए बहुत ही अलग अनुभव रहा है। शुरुआत के कुछ पन्नों में मैं थोड़ा असहज रही। आपको क्या पसंद आएगा, इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप ढूँढ क्या रहे हैं। जैसा सोचकर मैंने इस किताब को उठाया था, यह वैसी थी नहीं। पर कुछ ही पन्नों में मैं इसके टोन से सहज हो गई। इस किताब में हास्य व्यंग्य कूट कूट कर भरा गया है। किरदारों से जल्द ही लगाव हो जाता है। कहानी साधारण है, और इसमें ज़रा भी 'फिल्मीपना' नहीं झलकता। सबसे अच्छी बात ये थी कि कहीं भी गालियों का प्रयोग नहीं किया गया है। नए लेखकों को पढ़ने से पहले ये डर ज़रूर लगता है। रिश्वतखोरी के मुद्दे को उठाकर, प्रेम का तड़का लगाकर लेखक ने बहुत ही सुंदर, हल्की-फुल्की कहानी पेश की है। आज कल one liners का चलन हो गया है। लेखक इसमें भी पीछे नहीं हटे। "अंत मे आपके अंदर उतना ही हिस्सा बचता है, जितना प्रकृति का दिया हुआ है।" "भोलेपन और बुद्धिहीनता में एक बहुत बारीक रेखा होती है। कभी कभी समझना मुश्किल हो जाता है कि इंसान इस पार खड़ा है या उस पार।" "चाहने और होने के बीच की दूरी का दूसरा नाम ही जीवन है।" "सवाल गहरा था और इल्ज़ाम संगीन। पर वो भी उनकी मुस्कुराहटों में खो गया।" कुछ बहुत ज्यादा गहरा नहीं, मन को खुश करने जैसा कुछ पढ़ना हो, तो समकालीन लेखन में, मेरे ख्याल में इससे बेहतर अभी कुछ और नहीं है। प्रेम कहानी ढूँढ रहे लोग ज़रूर पढ़ें।
This book is very entertaining and worth a read. The character outline of the characters, the UP dialect and the humour used throughout the chapters is impeccable. The best thing you will find in the book is the live narration that the author did which keeps the readers engaged and never let them bore. If you love reading comedy and looking for something refreshing and rib-tickling comedy then this book is perfect for you. You will find a perfect mixture of humour, innocent love and a few life lessons. मान गए बबलू शुक्ला जी को 😂
Failure always helps to become the winner in life. 10th fail by Ajay Raj Singh. The book plots in the UP region story of an unmarried 28 years old boy Shukla. Due to family reasons, he lost interest in the studies. Later, his life takes a twist in 10 class. One failure changes him all life with a sudden effect.
Nice story with simple plots. The best part of this book is the author does not add any kind of drama. Simple and easy to understanding book. The comedy is too good for the characters.
शुक्ला जी की अम्मा का स्वैग देखने लायक था। बहुत ही खूबसूरती से साथ लिखी गई कहानी, जिसमें बोर करने वाला एक मिनट भी नहीं था। जिसे कॉमेडी पढ़ना है, वो पढ़ें। जिसे इश्क़ पढ़ना है, वो पढ़ें। जिसे कुछ भी नहीं पढ़ना है, वो तो ज़रूर पढ़ें। पढ़ने की आदत लग जाएगी।
Awsome Story. Simple & Sweet. Best part of it was, author didn't try to put filmy masala, as you can find in other books. Romance part was nice, and comedy was outstanding. It felt like I was on a stand-up comedy show. People looking for light hearted, fun, romantic, comedy book, should definitely read this.
For me this book was a hilarious read. I often pick up English book and this Hindi book was a refreshing change. This is a character driven book and it speaks of the life of Bablu Shukla. He is one twisted character who will make you laugh and make you fall in love with him.
Entire review of the book - ofbookbabiesandmore.wordpress.com
The Characters, Dialect and humor everything was great. It was supposed to be a light read but the image it created while reading cannot be termed as 'light'. Turned out to be a very happy and fun read form me.