भारतीय उप महायुद्ध में उपनिवेशवादी शासन की नींव 1757 में पड़ी जब पलासी के युद्ध मिलनी में अंग्रेज़ों की विजय हुई। लेकिन तत्काल ही उस विजय को चुनौती भी शुरू हो गई। 1763 का संन्यासी विद्रोह का आरंभ बिंदु है जो लंबे समय (1800) तक चला। 1957 में ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध जो महाविद्रोह फूटा था, वह कोई आकस्मिक घटना नहीं थी। संन्यासी विद्रोह से शुरू होनेवाली अनेक विद्रोहों की एक सौ साल की लंबी श्रृंखला की वह विस्फोटक परिणति थी जिसमें आम किसान से लेकर देशभक्त राजे-महाराजे तक एक झंडे के नीचे शरीक हुए थे। 1857 के पूर्व के सभी जन विद्रोह ब्रिटिश हुकूमत के अथवा भारत में ब्रिटिश शासन के मददगार सामंतों और भूस्वामियों के खिलाफ थे।
प्रस्तुत पुस्तक में इसी प्रकार के सत्तर से भी अधिक विद्रोहों के जीवंत इतिहास का विवेचन किया गया है जिसमें उनके सामाजिक-राजनीतिक कारणों की पड़ताल भी की गई है। उपनिवेशवादी इतिहासकारों ने इन विद्रोहों को डाकुओं और लुटेरों का कार्य कहकर उपनिवेशवादियों के कुकर्मों पर पर्दा डालने की कोशिश की है। लेकिन प्रस्तुत पुस्तक में उन्हीं के द्वारा पेश किए गए तथ्यों का वैज्ञानिक विवेचन कर उनके विपरीत निष्कर्ष निकाले गए हैं जिससे उनकी बातों का खंडन होता है।
पुस्तक इतिहास के अध्यापकों और छात्रों के लिए तो उपयोगी है ही, इसे आधुनिक भारत के इतिहास में दिलचस्पी रखने वाला कोई व्यक्ति पढ़कर अपनी जानकारी बढ़ा सकता है।
अयोध्या सिंह प्रसिद्ध पत्रकार तथा लेखक हैं। छात्र-जीवन से ही वामपंथी आंदोलनों से जुड़े रहे। लंबे अर्से तक कलकत्ता से प्रकाशित होने वाले प्रगतिशील साप्ताहिक पत्र 'स्वाधीनता' के संपादक रहे हैं। समय-समय पर प्रगतिशील पत्रिकाओं में लिखते रहते हैं। उनकी मुख्य पुस्तकें हैं- 'साम्राज्यवाद' का उदय और अस्त', 'राष्ट्रीय आंदोलन का संक्षिप्त इतिहास', भारत का स्वाधीनता 'संघर्ष', फासीवाद', भारत : समाजवाद के लिए संघर्ष' आदि। इस समय वे पश्चिम बंगाल हिंदी अकादमी के अध्यक्ष हैं तथा अकादमी से प्रकाशित होनेवाली साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका 'धूमकेतु' के संपादक हैं।
Bharat Ka Mukti Sangram (Hardcover) by Ayodhya Singh: During the 15 th century, Portuguese, Spanish, French, Dutch, British ventured towards India by sea route. First to enter India was Vasco da Gama by Portuguese ship towards Africa. Ibn Majid joined him in Malindi, East Africa and showed him the route to Calicut. he reached Calicut on 17th May, 1498. Had Ibn Majid not shown the route, Vasco Da Gama would have returned back from Africa to Portugal. In the year 1500, Portuguese constructed a factory in Calicut. From 1500 onward, European businessmen moved to India. Their ships not only did business but also looted other ships. Their first attack was on Arab ships. It is a well researched book on the freedom struggle of India from 1800 to 1947. The author has quoted large number of books to prove the authenticity of the description of various incidents related to British atrocities during freedom struggle. It is a valuable document about freedom struggle against the British. The book is a must read for all.