आजादी से पहले के सालों में जायें तो इस इलाके के लोग बताते हैं कि सिंगरौली में जंगल इतना घना हुआ करता था कि बनारस के राजा को अगर किसी को सजा देनी होती थी तो वो उसे सिंगरौली के जंगल में छुड़वा देते थे। एकबार इन जंगलों में जो जाता था, फिर उसकी वापसी नहीं हो पाती थी। फिलहाल जमीनी हकीकत यह है कि सिंगरौली में परंपरागत जंगल क्षेत्र का विनाश होता चला गया है और अब बस जंगल के नाम पर कोयला और बिजली कंपनियों द्वारा लगाये गए यूकेलिप्टस के पेड़ हैं। पुरे इलाके में सबकुछ बड़ी-बड़ी कंपनियों के इशारे पर ही चलता है। आपको अंदाजा लगाना मुश्किल होगा कि ये वही इलाका है जहां कुछ दशक पहले लोग खेती पर निर्भर थे और यहां के स्थानीय समुदाय की जीविका का सबसे बड़ा साधन जंगल था। सिंगरौली फाइल्स उन लड़ाइयों का दस्तावेज है जो स्थानीय लोग उर्जा कंपनियों के अत्याचार के खिलाफ लड़ रहे हैं। अविनाश उनके बीच रहकर उन लड़ाइयों के गवाह रहे हैं।