कई फिल्मों के दृश्य हमें ये बता जाते हैं कि सही क्या है और गलत क्या है. ये तब और स्पष्ट हो जाता है जब वहीँ पर कोई भगवद्गीता का वो श्लोक दोहरा दे, जिससे वो घटना सम्बद्ध है. मेरा प्रयास था ऐसी ही फिल्मों की कहानियों और दृश्यों को आपके सामने दोबारा लाना, जो आपने देखी हैं, आपको याद भी हैं, लेकिन वहां जो शिक्षा छुपी है, उसपर आपका ध्यान नहीं गया. हिंदी-अंग्रेजी फिल्मों के जरिये भगवद्गीता के श्लोकों पर ध्यान दिलाना अजीब लग सकता है, लेकिन ये उतना मुश्किल नहीं. हर रोज के जीवन के लिए भी भगवद्गीता उतनी ही उपयोगी है, जितनी कि संन्यास की और अग्रसर किसी व्यक्ति के लिए.
“Geetayan” written by Anand Kumar ji is A MUST READ book for everyone.
To review this book I have read it twice. No! I understood and enjoyed the book even reading once but second time I read it to…… to find out why I read it twice- you have to read it atleast once.
“Geetayan” as suggested by title is a book about Bhagavad Gita. But I have never ever ever read Bhagavad Gita with this interest earlier! Anand Kumar ji is well know on twitter for his sarcasm, wit and sharp sense of humor. This book unwinds another side of him as a deep thinker and extra ordinary writer.
“Geetayan” has 45 chapters and 180 pages but every chapter-every page has more words to interpret than written. Anand Kumarji has written about Bhagavad Gita in a total novel way in the context of CINEMA. Every chapter of Geetayan talks about one classic-interesting Hollywood or Bollywood movie in a very interesting way and while narrating story of the movie indirectly takes us to the world of Bhagavad Gita. The movies picked up are classic and the way author has told the story of movie in short-crisp way makes it more interesting. At the end of every chapter author ends story of movie and smartly tells us how this story gives same message as a particular adhyaya and shloka of Bhagavad Gita. So every chapter of this book is gold that not just talks about a classic piece of cinema but about Bhagavad Gita adhyay and shloka in simple words but required depth. Every shloka and adhyay is explained in very simple words and also related shlokas are attached to make it more relevant. Author has made sure to keep balance of explaining sould of Bhagavad Gita with enough depth and keep it interesting at the same time.
Tare Zameen Pe,The last Samurai, The Terminal, Lucy, Inception, Citizen Can, the remains of the day, Greyhound, Badlapur, Cypher, The Shawshank Redemption, Rocky, Finding Forest, The Karate Kid, The girl with Dragon Tattoo, Alita the battle angel, Mere Apne, Forest Grump, Musafir, Ankush, Dushman- are few of the movies explored in Geetayan. If you have watched these movies- you must read this book to know how it relates with Bhagavad Gita. And if you have not watched these (or some of these) movies(Like me :P) than you MUST READ this book- than make a list of movies- watch the movies and read the book again to get relevance!
Geetayan is a superb book that unwinds depth of Bhagavad Gita in the simplest possible words in super interesting way. A must read book for everyone and a perfect gift option for all your friends and family!
संभवतः अधिकांश लोगों का श्रीमद्भगवद्गीता से प्रथम परिचय फिल्मों के माध्यम से होता है। पुरानी फिल्मों में अदालत में गवाह को गीता की शपथ लेकर अपनी बात रखते हुए हमसब ने देखा है।
तो गीता पठनीय के बजाय मूर्ति की तरह एक पूजनीय वस्तु हो जाती है।
कई बार लोग पढ़ने की कोशिश तो करते हैं लेकिन गहरे उतर नहीं पाते और बोर होकर छोड़ देते हैं।
इस पुस्तिका में कुछ मज़ेदार फिल्मों में पात्रों द्वारा किए जा रहे कर्मों को गीता के कुछ चुनिंदा श्लोकों के परिप्रेक्ष्य में देखने की कोशिश की गई है। और इंगित किया गया है कि जीवन की घटनाओं को गीता के परिप्रेक्ष्य में देखना-समझना बेहतर होता है और उसके लिए गीता का अध्ययन जरुरी है।
गीता पढ़ने को प्रेरित करने के लिये बहुत ही सुन्दर पुस्तिका है ये।
#गीतायन श्रीमद्भगवद्गीता पर लेखों का सुंदर व रोचक संग्रह। ४५ लेख है इस पुस्तक में जो गीता जी पर विस्तार से व फिल्मों की कहानियों के माध्यम से गीता दर्शन को सरल कर समझाया गया है। अधिकांश फिल्म की कहानियां हॉलीवुड की फिल्मों की है, कुछ बॉलीवुड की कहानियां भी है। लेखक गीता जी के श्लोकों को समझाने के लिए कहानियों के पात्रों के माध्यम से श्लोकों को सरलता से समझाने का रोचक ढंग लाये है। श्रीमद्भगवद्गीता अब भी पहली बार पढ़ने वालों के लिए कठिन ही होती है। इसे कैसे पढ़े व समझे इस पर भी लेखक अपने लेखों में बहुत से आसान तरीक़े बताते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता वर्तमान में क्यों पढ़ना चाहिए व कितना जरूरी है इस लिए भी यह पुस्तक पढ़ना जरूरी है।
वैसे अधिकांश कहानियां हॉलीवुड की फिल्मों से ली गई है तो बहुत से मेरे जैसे पाठकों के लिए दिक्कत हो सकती है। लेकिन फिर भी इन लेखों की सबसे अच्छी बात यह है कि इन कहानियों के माध्यम से गीता जी के श्लोक बहुत कुछ आसानी से समझ में आ जाते हैं। वर्तमान युवा पीढ़ी को यह पुस्तक बहुत अच्छी लगेगी, ऐसा मुझे विश्वास है। एक अलग ही दृष्टिकोण से लेखक ने इन लेखों को लिखा है जिससे युवा वर्ग जरूर गीता जी के पाठ की ओर अग्रसर होगा। साथ ही गीता दर्शन भी आसानी से समझ आने लगेगा।
#गीतायन के लेखों की भाषा सरल व सहज ही है। ज्यादा मोटी पुस्तक भी नहीं है न ही ज्यादा कीमत। पाठक का किसी विशेष धर्म की पुस्तक समझकर न पढ़ने का मन हो तो एक प्रेरणादायक या मोटिवेशनल पुस्तक की तरह भी गीतायन को पढ़ सकते है। इन छोटे छोटे लेखों के माध्यम से लेखक ने १००-१५० ही श्लोक पढ़वा पाये है लेकिन गीता जी को पूरा समझने व उसका मर्म समझने के लिए संपूर्ण गीताजी पढ़ना होगी। हिन्दी की कुछ कहानियों ने पुस्तक को ओर रोचक बनाया है। श्रीमद्भगवद्गीता को नयी दृष्टि से जानना है तो यह पुस्तक जरूर पढ़े। गीतायन में लेखक ने हर लेख में गीता जी के चुने हुए श्लोक को मोतियों की तरह बड़े सरल ढ़ंग से नये अर्थ के साथ पिरोया है। लेखक Anand Kumar जी को इस रोचक पुस्तक के लिए धन्यवाद व बधाई। उम्मीद है इस पुस्तक का अगला भाग भी जल्द ही लिखेंगे। बाकी लेखक के ही शब्दों में कहें तो यह संक्षिप्त समीक्षा सिर्फ़ इस पुस्तक #गीतायन की नर्सरी स्तर की जानकारी भर है। इस रोचक पुस्तक को पढ़ने के लिए कोशिश करके एक बार गीता जी पढ़े व साथ ही इसे पढ़ेगे तो बहुत अच्छा रहेगा। धन्यवाद
भूपेन्द्र भारतीय 205, प्रगति नगर,सोनकच्छ, जिला देवास, मध्यप्रदेश(455118) मोब. मेल- bhupendrabhartiya1988@gmail.com
श्रीमद्भागवत गीता को अलग दृष्टिकोण से देखने का आनंद जी का अंदाज़ बेहतरीन है। फ़िल्मों की कहानियों के माध्यम से श्रीमद्भागवत गीता समझने में आज के युवाओं को एक नया ही अनुभव भी होगा और उन्हें अच्छे से समझ भी आ जायेगी।
हम फ़िल्में देखतें हैं उसकी कहानी हमारे दिमाग़ में लंबे समय तक रहती है, अब यदि हम उस कहानी को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखने और समझने का प्रयास करेंगे तो ये एक नया ही अनुभव और दृष्टिकोण होगा, जिसे आनंद जी ने इस पुस्तक के माध्यम से प्रस्तुत किया है।