तुलनात्मक धर्म-दर्शन के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के विद्वान डॉक्टर कूनराड एलस्ट के अनुसार राजनीतिक इस्लाम का मतवाद आज की दुनिया में अधिक समय तक नहीं चल सकता आधुनिक मानव जीवन के लिए,सभी लोगों की पसंद, जरूरी सामान्य वस्तुएं व वातावरण दे सकने की साइंस की संभावना,और इस्लामी विश्वास के पिछड़ेपन की बीच बहुत दूरी है यह दूरी समय के साथ दिनों दिन इतनी बढ़ती जा रही है कि ज्यादा नहीं चल सकती अतः मानवता के इतिहास में ऐसे विश्वास का पीछे छूट जाना एक निश्चित, गणितीय अवश्यंभावीता (मैथमेटिकल सर्टेनिटी) है इसके अलावा भी कई अन्य कारण यही संकेत करते हैं ऐसी स्थिति में विवेकशील लोगों को क्या करना चाहिए? भारत में मुसलमानों के साथ हिंदुओं को कैसा विचार विमर्श करना चाहिए?विविध धार्मिक मान्यताओं तथा उनके दामों का सच क्या है? इन्हीं बिंदुओं पर इस पुस्तक में विचार किया गया है