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उम्मीद के रंग

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देश के सरकारी स्कूलों में चुपचाप काम कर रहे अनेक शिक्षक है जो बच्चो की शिक्षा की संवेदनशीलता को गहराई से अनुभव करते है| वे अपनी भूमिका को न सिर्फ समझते है बल्कि उस पर खरा उतरने के लिए लगातार कोशिश भी करते है| यह किताब ऐसे ही कुछ शिक्षकों के अनुभवों का संकलन है| शिक्षको के ये स्मरण दिखाते है कि किस तरह सिमित संसाधनों व तमाम दूसरी चुनौतियों से ये शिक्षक अपनी आन्तरिक प्रेरणा से जूझते है और नए व् रचनात्मक तरीकों से उनसे पार भी पाते है|

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A book about initiatives taken by primary school teachers of UP Govt. about their hardships and work done at root level, and it’s impact on students life

172 pages, Paperback

First published July 1, 2020

2 people want to read

About the author

Prabhat

14 books
जन्म : 1972, राजस्थान में करौली ज़‍िले के रायसना गाँव में।

प्रकाशन : ‘अपनों में नहीं रह पाने का गीत’ (कविता-संग्रह) ‘साहित्य अकादेमी’, नई दिल्ली से प्रकाशित। बच्चों के लिए गीत, कविता, कहानियों की पच्चीस किताबें प्रकाशित।

बज्जिका, छत्तीसगढ़ी, बैगा, अवधी, कुडुख, धावड़ी, भीली, बघेली इत्यादि लोक-भाषाओं में बच्चों के लिए लगभग चालीस किताबों का सम्पादन-पुनर्लेखन।

कहानीकार डॉ. सत्यनारायण के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित मोनोग्राफ़ ‘राजस्थान साहित्य अकादेमी’ से प्रकाशित।

सम्मान : ‘युवा कविता समय सम्मान’ (2012), ‘सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार’ (2010), ‘बिग लिटिल बुक अवार्ड’ (2019) से सम्मानित।

सम्प्रति : शिक्षा के क्षेत्र में स्वतंत्र कार्य।

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