देश के सरकारी स्कूलों में चुपचाप काम कर रहे अनेक शिक्षक है जो बच्चो की शिक्षा की संवेदनशीलता को गहराई से अनुभव करते है| वे अपनी भूमिका को न सिर्फ समझते है बल्कि उस पर खरा उतरने के लिए लगातार कोशिश भी करते है| यह किताब ऐसे ही कुछ शिक्षकों के अनुभवों का संकलन है| शिक्षको के ये स्मरण दिखाते है कि किस तरह सिमित संसाधनों व तमाम दूसरी चुनौतियों से ये शिक्षक अपनी आन्तरिक प्रेरणा से जूझते है और नए व् रचनात्मक तरीकों से उनसे पार भी पाते है|
------------- A book about initiatives taken by primary school teachers of UP Govt. about their hardships and work done at root level, and it’s impact on students life
जन्म : 1972, राजस्थान में करौली ज़िले के रायसना गाँव में।
प्रकाशन : ‘अपनों में नहीं रह पाने का गीत’ (कविता-संग्रह) ‘साहित्य अकादेमी’, नई दिल्ली से प्रकाशित। बच्चों के लिए गीत, कविता, कहानियों की पच्चीस किताबें प्रकाशित।
बज्जिका, छत्तीसगढ़ी, बैगा, अवधी, कुडुख, धावड़ी, भीली, बघेली इत्यादि लोक-भाषाओं में बच्चों के लिए लगभग चालीस किताबों का सम्पादन-पुनर्लेखन।
कहानीकार डॉ. सत्यनारायण के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित मोनोग्राफ़ ‘राजस्थान साहित्य अकादेमी’ से प्रकाशित।
सम्मान : ‘युवा कविता समय सम्मान’ (2012), ‘सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार’ (2010), ‘बिग लिटिल बुक अवार्ड’ (2019) से सम्मानित।