ब्रेकिंग न्यूज़: आज दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन इलाक़े के जॉगिंग पार्क में सुबह के तक़रीबन 6:15 बजे एक महिला की लाश बरामद हुई। कौन है यह महिला?
देश की लोकप्रिय न्यूज़ एंकर, मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक जाना-माना चेहरा, और नेशनल न्यूज़ चैनल की टीआरपी के लिए एक बड़ी ज़रूरत, नैना वशिष्ठ ख़ूबसूरत थी, एम्बिशियस थी, बहादुर और कामयाब भी। ज़ाहिर है नैना से सभी प्यार करते थे, लेकिन कुछ ईर्ष्या भी। और शोहरत के दाम तो देने पड़ते हैं।
ऐसे में उसका क़त्ल हुआ तो शक के घेरे में कई लोग आ गए...
टीवी की दुनिया की चमक-दमक के पीछे की सच्चाइयों से रूबरू कराता जाने-माने पत्रकार संजीव पालीवाल का यह उपन्यास आपको आख़री पन्ने तक सस्पेंस में रखेगा।
An average novel, Considering this is a murder mystery... And if you have been reading this genre for a long time... You will very easily know who the murderer is at just 33% of the novel...
The starting 100 Pages did bore me as it took a lot of time to establish all the characters...
The author does deserve the appreciation for Creating a Character like "Naina", Who is a really Complicated Character... She is both a Victim and Vicious at once...
Author यह कबूल करते हैं आभार में की नोवेल उन्हें force करके लिखाया हैं.वो कई बार फंसते हैं जिससे उनके दोस्त जान पहचान ke लोग निकालते हैं. ये बातें आपको नॉवेल के कुछ ही पन्नों में महसूस होगी. कहानी खुद repeat करती हैं. एक ही रस के किरदारों की भरमार हैं. Detective mystery तो दूर थ्रिलर के सन्दर्भ में भी ये निरस और ऊबाऊ नॉवेल हैं. इसे पूरा पढ़ना खुद पर जुल्म करने jaisa है
मैं पहले ये बता दू, की मुझे कभी सरप्राइज की आदत नहीं हैं। लेकिन ये किताब सप्राइज गिफ्ट हैं, लम्बे समय तक मैं सोच रही थी, कौन है जिसे ये पता है। मैं इन दिनों, कौन सी किताब पढ़ना चाहती हूं । खैर शायद वो इकलौती लड़की है जिसे ये पता होता हैं, मैं क्या पढ़ रही हूं क्या पढ़ना चाहती हूं, और वो है @ritika_maurya._
खुबसूरत तोहफ़ा के लिए शुक्रिया दोस्त @ritika_maurya._
नैना:
यह एक मर्डर मिस्ट्री किताब हैं, इस कहानी के मुख्य पात्र हैं: नैना वशिष्ठ, सर्वेश राज, गौरव वर्मा , नवीन शर्मा।
नैना : साधारण से जीवन को जीने के लिए इच्छुक महिला रहती है। जो प्रेम विवाह के बाद सर्वेश के साथ दिल्ली आ जाती हैं। सर्वेश एक पत्रकार का किरदार रहता हैं। जो हमेशा बड़ा सपना देखता , रॉयल लाइफ का , और चाहता हैं दोनो काम करे, जिससे हम ज्यादा कमाई हो सके हैं। एक वक्त के बाद नैना वशिष्ट नेशनल न्यूज़ में काम करने लगती है। नैना वशिष्ट के सीनियर गौरव वर्मा और नवीन हैं, नैना का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर गौरव वर्मा के साथ हैं, नवीन उस के खास मित्र हैं, नैना को गौरव वर्मा धोखा दे रहा हैं , ये जान के नैना बखौला जाती है, और गौरव वर्मा को बर्बाद करने का धमकी देती है, साथ ही जब नवीन को गौरव और नैना के अफेयर के बारे में पता चलता है, तो नवीन खुद को धोखे में महसूस करता हैं , वो नवीन जिसे लगता है, की नैना उससे प्यार करती हैं,
नैना और उस के पति के बिच अब प्यार तो दूर उसकी शादी भी सही नही चल रही है, और नैना अपने पति को घर से निकल जाने की धमकी देती हैं।
चौथा किरदार : राजस्थान के उपमुख्यमंत्री । उनके साथ भी नैंना हमबिस्तर हो चुकी है, और वो उन्हें फोन पर बताती है कि उन के बच्चे की मां बनने वाली है।
यह घटनाएं एक ही दिन होती है। अगले ही दिन नैंना का मर्डर हो जाता है। हत्या की सूई इन चारों पर जाती है,
कौन हैं कातिल? सर्वेश?? गौरव वर्मा?? नवीन??? या फिर कोई और????
ये किताब कई रिश्तों का आइना हैं , कामयाबी और शाहोरत की भागम भाग में कोई सब कुछ खो सकता हैं
जैसे ज़ियादा रौशनी आदमी से उसकी नज़र छीन लेती है.... वैसे ही अगर शोहरत का उजाला ज़ियादा तेज़ हो जाये तो आदमी अपना विवेक (मन कि नज़र) खो देता है..
शायद इसलिए नैना वशिष्ठ को अपनी जान की कीमत देनी पड़ती हैं, लेकिन कातिल कौन हैं???? ये जानने के लिए आप ये "नैना " किताब ज़रूर पढ़े...
रहस्य रोमांच से हिंदी उपन्यासों की शुरुआत होने के बावजूद आज हिंदी में मर्डर मिस्ट्री लिखने वाले लेखक के रूप में संजीव पालीवाल शायद अकेले हैं। इस उपन्यास को लिखते समय एक खतरा यह भी था कि संजीव भी आत्ममुग्धता का शिकार हो जाएं एवं अपने व्यवसाय के ग्लैमर एवं चकाचौंध को ही परोस दें या उसका बचाव करने लगें। न्यूज़ रूम की भाषा एवं मीडिया कर्मियों के व्यवहार को उन्होंने अपने व्यक्तिगत संबंधों के खराब होने के संभावित खतरे उठा कर भी यथार्थ रूप से प्रस्तुत किया है। मुझे यह उपन्यास बहुत ही अच्छा लगा।
The novel begins and progresses very well. It keeps you gripped. But at some places i habe felt that info has been repeated many times. Btw i identified the killer before it came to end thats why three stars. But author writes very well and if next book comes out for this author i would definitely pick it up.
There are not so many hindi crime-suspense book available now days.. It keep you glued and You don't get any ideas.. Its interesting. Very well written..
After being accustomed to reading Surendra Mohan Pathak,This author Sanjeev Paliwal managed to capture the 60 percent Charisma of the Veteran Author. No doubt story was decent and contemporary and well written..immaculate research and Good Charaterisation ,but problem is some how I managed to guess the murderer before climax...apart from this It was too straight jacketed in Dialogues and Charterisation.I missed the titillating one liner of Surendra Mohan Pathak along with the under current of humour and social context. Inspite of this I must say...It was wonderful experience I have the honour of reading 99percent novels of Mr Pathak.Which allows me little liberty to comment on the content Hindi Crime Novels. Best of luck
कई सालों के बाद एक हिंदी उपन्यास पढ़ा, और मानना पड़ेगा, एक क्षण के लिए भी छोड़ने का मन नहीं हुआ। नैना एक जानी- मानी टीवी एंकर की कहानी है जिसका बेरहमी से कत्ल हो जाता है। इसके बाद कुछ कहानी फ्लैशबैक में है, और शेष वर्तमान में कत्ल की जांच- पड़ताल करते इंस्पेक्टर समर प्रताप सिंह के नज़रिए से। वह किस प्रकार केस की तहकीकात करता है, और कैसे अन्ततः खूनी तक पहुंचता है, इसकी यात्रा बेहद रोमांचक है। पूरी तरह से पैसा- वसूल उपन्यास। इसे पढ़ कर मैंने हिंदी भाषा में लिखी गयी और अधिक किताबें पढ़ने का निश्चय किया है।
बस काम चल जाए.....काफी झोल हैं पर ठीक है. पन्ने कुछ कम किए जा सकते थे औऱ थ्रिल तो पूरा गायब ही है. प्रयास अच्छा है पर नैना के किरदार को ज्यादा जगह दे कर फ़ालतू वक़्त जाया हुआ है..
The story could be as short as 100 pages, but the writer repeated it again and again and again around the same three characters, which made it unbearable. A sentence said by husband of the victim - 'य़ह सवाल आप पहले भी पूछ चुके हैं' describes the emotion of readers exactly.
And the best part is..the last page. It made me love the whole book, the book that was giving me cringes in midway. The decision to finish it, no matter what, was worth jt.