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Sunil #61
पिशाच का प्रतिशोध
राजनगर से बाहर से आए एक व्यापारी ने जब ब्लास्ट के स्पेशल कोरस्पोंडेंट सुनील को टिप दी कि राजनगर में एक कॉल गर्ल्स का ऐसा सुनियोजित रैकेट सक्रिय था जिसमें शामिल लड़कियों को अपने ग्राहकों के पैसे पर भी हाथ साफ कर डालने से गुरेज नहीं था तो इसे उसने एक लुटे हुए आदमी की खीज भर माना । लेकिन जब उसने तहकीकात आगे बढाई तो कई लोगों को ये बात रास नहीं आई ।
140 pages, Kindle Edition
First published July 1, 1976
About the author
Surender Mohan Pathak
335 books398 followersSurender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
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Community Reviews
Displaying 1 - 1 of 1 review
March 25, 2021
4/5
The name of novel is totally misleading and it is not a horror story. It is a simple murder mystery.
Maybe Pathakji thought Kedarnath or the MLA was a Pishach.
I realized that not all call girls are abla naris. Some come to this profession voluntarily and for money only.
A very fast paced and enjoyable read.
“क्या आपने कभी इस सन्दर्भ में केदारनाथ से कोई बात की है ?” - सुनील ने पूछा । “एक बार पहले भी किसी तुम्हारे जैसे नौजवान ने हमारे मन में केदारनाथ के प्रति संशय का बीजारोपण किया था ।” - शास्त्री बोला - “तब हमने इस बारे में केदारनाथ से बात की थी । उसने यही जवाब दिया था कि उसका इस धन्धे से कोई सम्बन्ध नहीं । उसने कहा था कि बार एक ऐसा स्थान होता है जो कभी-कभी अनायास ही इस प्रकार की गतिविधियों का केन्द्र बन जाता है । उसने कहा था कि वह ऐसी लड़कियों पर खास निगाह रखेगा जो कि काल गर्ल हो सकती हैं ।”
“लेकिन उससे सबन्धित जो बातें मैंने आपको बताई हैं उससे तो यही लगता है कि वह आपको भी अन्धेरे में रख रहा है । वह आपके नाम की ओट लेकर खुद यह धन्धा कर रहा है ।” “लेकिन जो आदमी ऐसा करता हो, वह अपनी छोकरियों को ग्राहकों का माल लूटने के लिए प्रेरित करके अपने धन्धे को खामखाह बदनाम क्यों करेगा ?” “सम्भव है लड़कियां उसका कहना न मान रही हों । वे स्वेच्छा से ऐसा कर रही हों ।”
“असम्भव । अगर ऐसा हो रहा है तो यही इस बात का पर्याप्त प्रमाण है कि केदारनाथ का इस धन्धे में हाथ नहीं । वह यह धन्धा चला रहा हो और वह छोकरियों को अपने काबू में न रख सके, उन्हें अपनी मनमानी करने से न रोक सके, ऐसा नहीं हो सकता ।” “आपकी निजी राय यही है कि केदारनाथ का इस धन्धे में हाथ नहीं हो सकता ।” “हां ।” “क्या इसमें उसके साथी जंग बहादुर का हाथ हो सकता है ?”
“तुम उसे भी जानते हो ?” “जी हां ।” “केदारनाथ की जानकारी में आये बिना जंग बहादुर यह काम नहीं कर सकता । लेकिन क्या एक और बात नहीं हो सकती ?” “क्या ?” “क्या पता केदारनाथ की इसमें कोई निजी दिलचस्पी न हो । वह आगे किसी और पर मेहरबान हो रहा हो । यानी कि इस काम का कर्ता-धर्ता कोई और हो और नाम ठिकाना और टेलीफोन केदारनाथ का इस्तेमाल कर रहा हो ।” “लेकिन साहब बुरा काम तो बुरा ही है, चाहे इसे कोई कर रहा हो ।”
The name of novel is totally misleading and it is not a horror story. It is a simple murder mystery.
Maybe Pathakji thought Kedarnath or the MLA was a Pishach.
I realized that not all call girls are abla naris. Some come to this profession voluntarily and for money only.
A very fast paced and enjoyable read.
“क्या आपने कभी इस सन्दर्भ में केदारनाथ से कोई बात की है ?” - सुनील ने पूछा । “एक बार पहले भी किसी तुम्हारे जैसे नौजवान ने हमारे मन में केदारनाथ के प्रति संशय का बीजारोपण किया था ।” - शास्त्री बोला - “तब हमने इस बारे में केदारनाथ से बात की थी । उसने यही जवाब दिया था कि उसका इस धन्धे से कोई सम्बन्ध नहीं । उसने कहा था कि बार एक ऐसा स्थान होता है जो कभी-कभी अनायास ही इस प्रकार की गतिविधियों का केन्द्र बन जाता है । उसने कहा था कि वह ऐसी लड़कियों पर खास निगाह रखेगा जो कि काल गर्ल हो सकती हैं ।”
“लेकिन उससे सबन्धित जो बातें मैंने आपको बताई हैं उससे तो यही लगता है कि वह आपको भी अन्धेरे में रख रहा है । वह आपके नाम की ओट लेकर खुद यह धन्धा कर रहा है ।” “लेकिन जो आदमी ऐसा करता हो, वह अपनी छोकरियों को ग्राहकों का माल लूटने के लिए प्रेरित करके अपने धन्धे को खामखाह बदनाम क्यों करेगा ?” “सम्भव है लड़कियां उसका कहना न मान रही हों । वे स्वेच्छा से ऐसा कर रही हों ।”
“असम्भव । अगर ऐसा हो रहा है तो यही इस बात का पर्याप्त प्रमाण है कि केदारनाथ का इस धन्धे में हाथ नहीं । वह यह धन्धा चला रहा हो और वह छोकरियों को अपने काबू में न रख सके, उन्हें अपनी मनमानी करने से न रोक सके, ऐसा नहीं हो सकता ।” “आपकी निजी राय यही है कि केदारनाथ का इस धन्धे में हाथ नहीं हो सकता ।” “हां ।” “क्या इसमें उसके साथी जंग बहादुर का हाथ हो सकता है ?”
“तुम उसे भी जानते हो ?” “जी हां ।” “केदारनाथ की जानकारी में आये बिना जंग बहादुर यह काम नहीं कर सकता । लेकिन क्या एक और बात नहीं हो सकती ?” “क्या ?” “क्या पता केदारनाथ की इसमें कोई निजी दिलचस्पी न हो । वह आगे किसी और पर मेहरबान हो रहा हो । यानी कि इस काम का कर्ता-धर्ता कोई और हो और नाम ठिकाना और टेलीफोन केदारनाथ का इस्तेमाल कर रहा हो ।” “लेकिन साहब बुरा काम तो बुरा ही है, चाहे इसे कोई कर रहा हो ।”
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