मुस्लिम संस्कृति, विचार और सभ्यता की पड़ताल करती यह क़िताब किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचती. तलवार से उपजा विचार कैसे एक महा साम्राज्य में परिणत हुआ और कैसे हिन्दुओं का दमन करके भी मुसलमान बादशाह दमन नहीं कर पाए और कैसे अंत में मुस्लिम बादशाहों को झुक कर मध्यम मार्ग अपनाना पड़ा, इसके अनेकों उदाहरण प्रस्तुत हैं. यह ज़रूर स्पष्ट होता है कि आज जो कुछ है वो नया नही है. इस्लाम के भारत आने के समय से ही दोनों धर्मों में संघर्ष था और यह रहेगा. ज्ञानवर्धक है.
यह पुस्तक जैसा की शीर्षक से ज्ञात होता है - मुहम्मद के समय के अरब के इतिहास, इसके बाद के खलीफाओं का इतिहास, भारत पर प्रारंभिक इस्लामिक हमले, सल्तनत की स्थापना, मुगलों का इतिहास, बंगाल, उत्तर प्रदेश के नवाबों का इतिहास, दक्षिण में हैदर एवं टीपू का इतिहास - इनको संक्षेप में दर्शाया ह। इस पुस्तक कुछ नयी बातें जानने को मिल। जैसे लेखक कहते हैं खानवा की लड़ाई में बाबर हार गया था और उसने राणा सांगा से संधि का प्रस्ताव रख। इसी बीच कुछ सरदारों ने विश्वासघात किया जिसके कारण राणा सांगा हार गए और बाबर विजयी हुआ। दूसरी बात ये औरंगजेब ने एक बार रूपनगर की राजकुमारी का डोला उठवा लिया थ। राजकुमारी ने मेवाड़ के राज सिंह से मदद की गुहार लगाई। राज सिंह अपने 1०० राजपूत सैनिकों की टुकड़ी के द्वारा मुगलों की ५००० की टुकड़ी को परास्त कर राजकुमारी का डोला वापस ले एते हैं। जिससे औरंगजेब क्रोधित होकर चढ़ाई करता हैं लेकिन उसे हारकर वापस आना पड़ता हैं।