इं. वानखेड़े ने की देवराज चौहान के साथ डकैती। -- देवराज चौहान मुस्कराया। लियू भी मुस्कराई। जगमोहन के चेहरे पर कड़वे भाव उभरे। “मैं अपनी मां के सीने में चाकू नहीं मार सकता।” देवराज चौहान का स्वर सपाट था –“हिन्दुस्तान मेरी मां का नाम है। इसी की गोद में पला और बड़ा हुआ। यहीं सब साँसें ली है मैंने।” लियू के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई। “और अब डकैतियां करके अपनी मां को ही लूट रहे हो।” लियू जहरीले स्वर में कह उठी। “बच्चे मां से खेलते हैं। मां पर उछल-कूद करते हैं। इससे मां की हड्डियां नहीं टूटती। न ही मां को कोई फर्क पड़ता है। और तुम चाहती हो कि मैं बड़ा सा पत्थर उठाकर अपनी मां के सिर पर मार दूं।” लियू के दांत भिंच गए। देवराज चौहान की नजरें लियू पर ही रहीं। जगमोहन ने उखड़े अन्दाज म