कृष्ण बलदेव वैद पुरस्कार से सम्मानित, 2016. *** शाम एक स्कूली छात्र है जो सपने देखता है । उसकी समस्या केवल यह है कि वह जानना चाहता है कि वह जिस दुनिया में बसा है, उसका क्या मतलब है? उसका दोस्त शान उसकी इस यात्रा का साथी है । वे शहर के बाहर बसे अपने पहाड़ी गाँव की गलियों और बाहरी इलाकों में भटकते रहते हैं । पुस्तकों या लोगों के माध्यम से उनके पास जो भी जानकारी उपलब्ध है, वे उसे बड़े चाव से बीनते हैं । इस जानकारी से अजीबो-ग़रीब पैटर्न बना कर वे अपनी वास्तविकता पर नियंत्रण पाने के लिए योजना बनाते हैं। उनका परिवार व गाँव के अन्य लोग उनकी इस योजना के पात्र बन जाते हैं और अपनी वास्तविकता में दरारें प्रकट करना शुरू कर देते हैं। विज्ञान, दर्शन, परियों की कहानियां, लोक-किंवदंतियां और इतिहास के अंश उनकí