एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद, आयुष कोमा में चला जाता है जब हर कोई उसके बचने की उम्मीद छोड़ देता है, तब अचानक वो जीवन में वापस लौट आता है लेकिन, उस दुर्घटना के बाद से ही आयुष को हर रात एक खौफनाक सपना आने लगता है सबका यही मानना था की आयुष, उस दुर्घटना के सदमे से अब भी पूरी तरह उभरा नहीं है इसी वजह से, उसे ऐसा सपना आता हैं मगर जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, आयुष ये महसूस करने लगता ही की उसके सपने में दिखनेवाली हर बात सच हो रही है आयुष, सोच में पड़ जाता है की आखिर ऐसा क्यों हो रहा है उसके साथ ? क्यों उसे, अपने जीवन में होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास हो जाता है ? इस पहेली का हल ढूंढने की ख्वाहिश, आयुष को ले जाती है जुर्म के एक ऐसे दलदल में, जहाँ उससे न्याय की गुहार लगा रही है किसी की, अधूरी चाहत