एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद, आयुष कोमा में चला जाता है जब हर कोई उसके बचने की उम्मीद छोड़ देता है, तब अचानक वो जीवन में वापस लौट आता है लेकिन, उस दुर्घटना के बाद से ही आयुष को हर रात एक खौफनाक सपना आने लगता है सबका यही मानना था की आयुष, उस दुर्घटना के सदमे से अब भी पूरी तरह उभरा नहीं है इसी वजह से, उसे ऐसा सपना आता हैं मगर जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, आयुष ये महसूस करने लगता ही की उसके सपने में दिखनेवाली हर बात सच हो रही है आयुष, सोच में पड़ जाता है की आखिर ऐसा क्यों हो रहा है उसके साथ ? क्यों उसे, अपने जीवन में होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास हो जाता है ? इस पहेली का हल ढूंढने की ख्वाहिश, आयुष को ले जाती है जुर्म के एक ऐसे दलदल में, जहाँ उससे न्याय की गुहार लगा रही है किसी की, अधूरी चाहत
दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद आयुष का बाल बाल बचना अपने आप में एक चमत्कार था। आयुष को ऐसा लगा जैसे उसे एक नया जीवन मिला हो। मगर उसे क्या पता था की वह किसी और का ही जीवन जी रहा है। उसे हर पल ऐसा महसूस होता था कि कोई अनजान साया उस पर हर वक्त नजर रखे हुए हैं। आखिर वह किस का साया था? और वह साया आयुष से क्या चाहता ? आयुष इस पहेली का हल ढूंढने निकल पड़ता है। आयुष की यह खोज रहस्य और रोमांच से भरी एक यात्रा का रूप ले लेती है जो इस उपन्यास की कहानी है। उपन्यास में रहस्य को अंत तक बरकरार रखा गया है। जुर्म और बदले की आग के साथ-साथ प्यार और ममता जैसी कोमल भावनाओं को भी इस कहानी में उजागर किया गया है। कथा पात्रों का चित्रण बड़ी खूबसूरती से किया गया है। कुल मिलाकर यह कहानी पाठकों का भरपूर मनोरंजन करती है ।