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KAKA KI PHULJHADIYAN
आज हिन्दी साहित्य में काका हाथरसी को कौन नहीं जानता । काका का बचपन कष्टमय जरूर था, पर इन्होंने किसी को महसूस होने नहीं दिया । बाद में चलकर इनकी हास्य व मार्मिक कविताएं सामान्य-जन तक प्रचलित हुई । आज इनके हजारों शिष्य हिन्दी के उच्च साहित्यकार हैं । जगह-जगह साहित्यिक मंचों से इनकी कविताएं बड़ी रोचकता से पड़ी व सुनी जाती हैं । काका कहने मात्र से आज इन्हीं का बोध होता है ।काका हाथरसी (18 सितंबर 1906 - 18 सितंबर 1995) भारत के हिंदी व्यंग्यकार और हास्य कवि थे। उनका असली नाम प्रभु लाल गर्ग था। उन्होंने कलम नाम काका हाथरसी के तहत लिखा। उन्होंने "काका" को चुना, क्योंकि उन्होंने एक नाटक में चरित्र निभाया, जिसने उन्हें लोकप्रिय बना दिया और "हाथरस" अपने गृहनगर हाथरस के नाम के बाद। उनके पास 42 क्रेडिट हैं, जिनम
151 pages, Kindle Edition
Published June 30, 2017
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