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Sunil #86
संगीन जुर्म
तरक्की करने की नीयत से घर से निकली एक नौजवान लड़की की अत्यन्त रहस्यपूर्ण कहानी जो सीढ़ी-दर-सीढ़ी पतन के गर्त में गिरती चली गयी । फिल्म अभिनेत्री बनने की इच्छुक वह लड़की फैशन मॉडल, पोर्नस्टार, कैबरे डांसर के धंधों में नाकाम होने के बाद कालगर्ल बनी लेकिन कालगर्ल भी न बनी रह सकी ।
- GenresAudiobook
161 pages, Kindle Edition
First published July 1, 1982
About the author
Surender Mohan Pathak
335 books398 followersSurender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
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Community Reviews
Displaying 1 - 3 of 3 reviews
May 11, 2021
ACHLA comes to Rajnagar to become heroine and doesn't keep in touch with her family. Her father comes to Sunil for help. When Sunil starts looking for her her photographer is killed. Can Sunil find her and killer?
A very enjoyable thriller and whodunit.
सुनील को पत्रिका के मध्य में दो पृष्ठों पर फैली हुई एक ‘पिनअप’ तस्वीर दिखाई दी । तस्वीर में एक बहुत ही संक्षिप्त-सी बिकिनी ड्रैस पहने एक युवती अंकित थी । वह पंजों के बल बैठी हुई थी, अपनी दोनों बांहें उसने ऊंची उठाई हुई थीं और उसके हाथों की उंगलियां उसके बालों में धंसी हुई थीं । उसके खूबसूरत होंठों पर एक सैक्सी मुस्कराहट थी और वह बेहद मदभरी आंखों से कैमरे की तरफ देख रही थी । उसका जिस्म भरा-पूरा था और तस्वीर खींचने के लिए फोटोग्राफर ने विशेष रूप से ऐसा एंगल चुना था जो उसके वक्ष के उभार, कमर के खम और कूल्हों के भारीपन को और ज्यादा नुमायां कर रहा था । तस्वीर के नीचे एक ब्रेसियर और पैंटी बनाने वाली कम्पनी का विज्ञापन छपा हुआ था । प्रत्यक्षत: उस युवती के शानदार जिस्म को केवल मॉडल के तौर पर उस विज्ञापन में इस्तेमाल किया गया था । सुनील ने पत्रिका के आवरण पर एक निगाह डाली । वह राजनगर से ही प्रकाशित होने वाली एक फिल्मी पत्रिका थी जिसका नाम था ‘फिल्म-ग्लैमर’ । युवती के हुलिए से शादीलाल द्वारा तैयार किए विज्ञापन में छपा गुमशुदा युवती के नख-शिख का वर्णन पूरी तरह से मेला खाता था ।
सुनील ने पत्रिका बन्द कर दी और फिर शादीलाल की तरफ देखा । शादीलाल ने उससे निगाह नहीं मिलाई । वह भर्राये स्वर में बोला - “यह मेरी बेटी अचला देवगण की तस्वीर है ।” “ओह !” - सुनील बोला - “और आप इसी तस्वीर को छोटा करवाकर अपने विज्ञापन में लगवाना चाहते थे ?” “जी हां । लेकिन सारी तस्वीर नहीं । सिर्फ चेहरा ।” “आपके पास अपनी बेटी का कोई कैमरा फोटोग्राफ नहीं है ?”
“है । कई हैं । लेकिन वे सब कम से कम पांच साल पुराने हैं और पांच सालों में मेरी बेटी की सूरत-शक्ल में बहुत तब्दीलियां आ गई हैं । यह” - उसने पत्रिका की तरफ संकेत किया - “उसकी ताजा तस्वीर मालूम होती है ।” “आपने इस पत्रिका के ऑफिस से अपनी बेटी के बारे में कुछ मालूम करने की कोशिश नहीं की ?” “सबसे पहले मैं वहीं गया था । वहां पहले तो किसी ने मुझसे सीधे मुंह बात भी नहीं की थी । बहुत मिन्नत-समाजत करने के बाद जब वे लोग मुझसे बात करने को तैयार हुए थे तो मुझे यही मालूम हुआ था कि वह एक विज्ञापन था और विज्ञापन में जिस मॉडल की तस्वीर इस्तेमाल की गई थी, उसके बारे में वे कतई कुछ नहीं जानते थे ।”
“आप विज्ञापन देने वाली कम्पनी के पास - मेरा मतलब है उस ब्रा और पैंटी के निर्माता के पास - गए होते जिसके विज्ञापन में आपकी बेटी की तस्वीर दिखाई दे रही है ।” “मैं गया था, जनाब” - वह व्यग्र भाव से बोला - “वहां भी गया था । वहां से मुझे यह सुनने को मिला था कि उनके ऐसे सारे काम एक एडवरटाइजिंग एजेन्सी करती थी । फिर मैं उस एडवरटाइजिंग एजेन्सी में भी गया था, लेकिन उन्होंने मुझे यह कहकर चलता कर दिया था कि अपने मॉडल के बारे में वे लोगों को जानकारी नहीं देते थे ।” “आपने उन्हें बताया होता कि आप उस लड़की के पिता थे ।”
A very enjoyable thriller and whodunit.
सुनील को पत्रिका के मध्य में दो पृष्ठों पर फैली हुई एक ‘पिनअप’ तस्वीर दिखाई दी । तस्वीर में एक बहुत ही संक्षिप्त-सी बिकिनी ड्रैस पहने एक युवती अंकित थी । वह पंजों के बल बैठी हुई थी, अपनी दोनों बांहें उसने ऊंची उठाई हुई थीं और उसके हाथों की उंगलियां उसके बालों में धंसी हुई थीं । उसके खूबसूरत होंठों पर एक सैक्सी मुस्कराहट थी और वह बेहद मदभरी आंखों से कैमरे की तरफ देख रही थी । उसका जिस्म भरा-पूरा था और तस्वीर खींचने के लिए फोटोग्राफर ने विशेष रूप से ऐसा एंगल चुना था जो उसके वक्ष के उभार, कमर के खम और कूल्हों के भारीपन को और ज्यादा नुमायां कर रहा था । तस्वीर के नीचे एक ब्रेसियर और पैंटी बनाने वाली कम्पनी का विज्ञापन छपा हुआ था । प्रत्यक्षत: उस युवती के शानदार जिस्म को केवल मॉडल के तौर पर उस विज्ञापन में इस्तेमाल किया गया था । सुनील ने पत्रिका के आवरण पर एक निगाह डाली । वह राजनगर से ही प्रकाशित होने वाली एक फिल्मी पत्रिका थी जिसका नाम था ‘फिल्म-ग्लैमर’ । युवती के हुलिए से शादीलाल द्वारा तैयार किए विज्ञापन में छपा गुमशुदा युवती के नख-शिख का वर्णन पूरी तरह से मेला खाता था ।
सुनील ने पत्रिका बन्द कर दी और फिर शादीलाल की तरफ देखा । शादीलाल ने उससे निगाह नहीं मिलाई । वह भर्राये स्वर में बोला - “यह मेरी बेटी अचला देवगण की तस्वीर है ।” “ओह !” - सुनील बोला - “और आप इसी तस्वीर को छोटा करवाकर अपने विज्ञापन में लगवाना चाहते थे ?” “जी हां । लेकिन सारी तस्वीर नहीं । सिर्फ चेहरा ।” “आपके पास अपनी बेटी का कोई कैमरा फोटोग्राफ नहीं है ?”
“है । कई हैं । लेकिन वे सब कम से कम पांच साल पुराने हैं और पांच सालों में मेरी बेटी की सूरत-शक्ल में बहुत तब्दीलियां आ गई हैं । यह” - उसने पत्रिका की तरफ संकेत किया - “उसकी ताजा तस्वीर मालूम होती है ।” “आपने इस पत्रिका के ऑफिस से अपनी बेटी के बारे में कुछ मालूम करने की कोशिश नहीं की ?” “सबसे पहले मैं वहीं गया था । वहां पहले तो किसी ने मुझसे सीधे मुंह बात भी नहीं की थी । बहुत मिन्नत-समाजत करने के बाद जब वे लोग मुझसे बात करने को तैयार हुए थे तो मुझे यही मालूम हुआ था कि वह एक विज्ञापन था और विज्ञापन में जिस मॉडल की तस्वीर इस्तेमाल की गई थी, उसके बारे में वे कतई कुछ नहीं जानते थे ।”
“आप विज्ञापन देने वाली कम्पनी के पास - मेरा मतलब है उस ब्रा और पैंटी के निर्माता के पास - गए होते जिसके विज्ञापन में आपकी बेटी की तस्वीर दिखाई दे रही है ।” “मैं गया था, जनाब” - वह व्यग्र भाव से बोला - “वहां भी गया था । वहां से मुझे यह सुनने को मिला था कि उनके ऐसे सारे काम एक एडवरटाइजिंग एजेन्सी करती थी । फिर मैं उस एडवरटाइजिंग एजेन्सी में भी गया था, लेकिन उन्होंने मुझे यह कहकर चलता कर दिया था कि अपने मॉडल के बारे में वे लोगों को जानकारी नहीं देते थे ।” “आपने उन्हें बताया होता कि आप उस लड़की के पिता थे ।”
March 26, 2023
Not exactly a murder mystery, although there are few murders in it. It's more like treasure hunt, where the treasure is a beautiful woman. It also is not very difficult to figure out the murderer. Sunil himself identifies them and say so in the story.
Anyways, not a bad one. Quick to read and nJoyable. Any longer, and it would have been boring.
Anyways, not a bad one. Quick to read and nJoyable. Any longer, and it would have been boring.
August 23, 2013
A very fast paced mystery. Loved the way Sunil traces the clues. Great read.
Displaying 1 - 3 of 3 reviews




