संगम का मतलब मिलना ही नहीं होता, बिछड़ना भी होता है।
हजारों किलोमीटर तक फैली भारतीय रेल की पटरियों पर हजारों ट्रेनें भागती हैं और इन तमाम ट्रेनों में करोड़ों लोग रोज़ सफर करते हैं।इन्हीं किसी ट्रेन की गेट पर खड़े राज ने प्लेटफॉर्म पर भागती सिमरन का हाथ पकड़ कर अन्दर खींच लिया था।इन्हीं किसी ट्रेन में ठाकुर बलदेव सिंह, जय और वीरू के हाथों में हथकड़ी डालकर जेल ले जा रहे थे।इन्हीं किसी ट्रेन में समीर भी वर्षा से पहली बार मिलता है।
समीर नौकरी के सिलसिले में मुंबई जा रहा है और वर्षा सहेली की शादी में इलाहाबाद। वर्षा तो इलाहाबाद में उतर जाती है लेकिन समीर के दिल में घर कर जाती है।
यहाँ से ये कहानी ज़िन्दगी की पटरियों पर दौड़ती हुई, अपनी मंज़िल की तलाश में आगे बढ़ती है,औ&#
🔟 में से 7️⃣ कर पाएँगे 'काशी एक्सप्रेस' में यात्रा 📖
प्रेम कथाओं और उपन्यासों की बाढ़ के बीच एक नवीन और रोचक कथानक गढ़ कर प्रस्तुत कर पाना कोई छोटी चुनौती नहीं। ये पुस्तक इसका एक निष्ठावान प्रयास तो करती है, किन्तु लेखन में परिपक्वता का अभाव उसे कुछ ढक लेता है। कथानक और उसे समर्थन देते घटनाक्रम निश्चय ही रोचक हैं, किन्तु आवश्यक विस्तार और गहराई के आभाव में उनके साथ न्याय नहीं हो पाया।
प्रचलित भाषा के अनुरूप दिखने के लिए अंग्रेज़ी शब्दों का बहुतायत प्रयोग तो समझ आता है, किन्तु उनके लेखन में कभी रोमन तो कभी देवनागरी का प्रयोग अटपटा है। यदि हिन्दी के पाठकों को अंग्रेज़ी पढ़ना या उन शब्दों का अर्थ न आता हो, तो ये उपन्यास उनकी पहुँच से बाहर होगा।
हिन्दी एवं अंग्रेजी में ऐसी ही विस्तृत तथा पूर्ण समीक्षाएँ पढ़ने के लिए देखिये @pustak_darpan 👍
I Think as an Indian and having hindi as a mother tongue connects me with hindi writers and their way of telling stories .
When I started this , I felt it is a very short book and how can such small book have much of interesting story, my mind was deliberately telling me toh put down the book but I insisted and read it and trust me it has a good ending , literally this book ending made me cry a little bit , I literally felt that I got connect with the author and I felt the story.
This novel is written in very easy to understand language and can engage you and you can't make yourself detach with that story .