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गाँधी की सुंदरता

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महात्मा गाँधी पर एक नई समझ समय की ज़रूरत है। हमें लगता है कि हम गाँधीजी को जानते हैं, जबकि वैसा है नहीं। हालात तब और जटिल हो जाते हैं, जब हम देखते हैं कि विपरीत लक्ष्यों को लेकर चलने वाली विचारधाराएँ गाँधी-विचार की खंडित व्याख्याएँ करते हुए उन्हें अपने हितपोषण के लिए अपहृत करती हैं। आज हम देखते हैं कि यत्र-तत्र गाँधीजी को लेकर सतही सूचनाओं का घटाटोप है, किंतु एक उजली और धारदार समझ उससे नहीं बन पाती है। यह पुस्तक इस अभाव की पूर्ति करती है। इसे आप गाँधी-विचार में प्रवेश की प्राथमिकी भी कह सकते हैं। यह गाँधीजी से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर यथेष्ट गम्भीरता, प्रामाणिकता और सुस्पष्टता से व्याख्यान करती है और हमारे सामने उनके उचित परिप्रेक्ष्यों को प्रकट करती है। यह एक महात्मा के भीतर के मानुष को प्रकाशित करने का उद्यम भी है। इस छोटी-सी पुस्तक में गाँधीजी को समझने की सिलसिलेवार कुंजियाँ निहित हैं।

160 pages, Paperback

First published October 1, 2020

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About the author

Sushobhit

18 books4 followers

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Displaying 1 - 7 of 7 reviews
Profile Image for Aditya Shukla .
78 reviews16 followers
May 18, 2021
बेहद ही घटिया क़िताब। सुशोभित सक्तावत न सिर्फ़ एक दोयम दर्जे का साहित्यिक snob है बल्कि अपराधी किस्म का धार्मिक उद्दंड है। पिछले वर्षों में उसकी अपार लोकप्रियता सिर्फ़ और सिर्फ़ उसके इस्लामोफोबिया पर टिकी हुई है वरना कोई उसकी बीथोवन और काफ़्का पर लिखे लेखों को कोई नहीं पूछता। अब उसने गांधी नाम का एक बहुत बड़ा पासा फेंका है, उसका गांधीवाद सिर्फ और सिर्फ गांधी का appropriation करने के लिए है। फिलहाल वह एक बहुत बड़े संघी परियोजना पर काम कर रहा है जिसका एक मात्र उद्देश्य गांधी को भारतीय बौद्धिक केंद्रों से उतारकर संघ के रंग में रंगना है जिसका भविष्य में संघ मूर्ख उदारवादियों को बरगलाने में करेगा। सुशोभित की बात पर सिर्फ दो तरह के लोग यकीन करते हैं: इस्लामोफोब और सॉफ्ट हिंदुत्व वाले उदारवादी। सुशोभित का साहित्य किसी सुधी पाठक के काम का नहीं है। सुशोभित पिछले कुछ वर्षों से संघ का प्रतिनिधि साहित्यकार बनने की व्यग्र कोशिश करने में लगा हुआ है लेकिन उसे यह समझ लेना चाहिए कि प्रोपगेंडा चलाकर चाहे वह लोकप्रियता हासिल कर ले, साहित्यिक इतिहास के गलियारों में उसे कोई जगह नहीं मिलेगी। उसका साहित्य उसके जीवनकाल में ही नष्ट हो जाएगा, ऐसा मैं दावे के साथ यहाँ ऑन रिकॉर्ड लिख रहा हूँ।
Profile Image for Himanshu Pandey.
65 reviews
September 7, 2025

ऐसे दौर में जब गांधी और गांधी-विचार की रोज़ाना हत्या होती है, सुशोभित की किताब “गांधी की सुंदरता” एक बेहद ज़रूरी पाठ के रूप में सामने आती है। यह किताब हमें यह याद दिलाती है कि गांधी केवल एक राजनेता या स्वतंत्रता संग्राम के कर्ताधर्ता भर नहीं थे, बल्कि उससे कहीं गहरे—एक संत, एक नैतिक शिक्षक और एक संवेदनशील मानव थे।

लेखक ने गांधी के व्यक्तित्व की परत-दर-परत परतें खोलते हुए उनके भीतर छिपे विभिन्न खूबसूरत पहलुओं को उजागर किया है। यह किताब बताती है कि गांधी की सोच, उनकी सादगी, उनका आत्मबल और उनका नैतिक आग्रह आज भी कितने प्रासंगिक हैं। दरअसल, वर्तमान समय में गांधी की ज़रूरत और प्रासंगिकता पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ गई है।

भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और आत्मीय है, जो पाठक को गांधी के विचारों से जोड़ती है। किताब पढ़ते हुए बार-बार महसूस होता है कि गांधी की असली ताक़त उनकी राजनीति में नहीं, बल्कि उनकी मानवीयता और नैतिक दृष्टि में थी।

ज़रूर पढ़ें
Profile Image for Abhishek.
68 reviews2 followers
May 23, 2021
गांधी पर ये आखिरी पुस्तक नहीं है और ना ही प्रथम. गांधी पर ये एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है. आज जब फेक न्यूज, झूठ, घोटाला अपनी उन्नति पर हैं और सामाजिक और व्यक्तिगत आचरण अपने निम्नतम स्तर पर है, जब गांधी को लोगों ने ब्रिटिश एजेंट से लेकर मीम मटीरियल तक बना दिया है, ऐसे समय में इस पुस्तक का आना पुस्तकों की दुनिया में अवतार लेने जैसा है. यह किताब गाँधी को उनका सम्मान वापस दिलाने आयी है जिसके वे हकदार हैं.
5 reviews
October 4, 2022
हर एक को को यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए
Profile Image for Pradeep Rajput.
105 reviews6 followers
October 27, 2021
सुशोभित, इस पुस्तक में गांधी जी की सुंदरता को प्रकट करने का प्रयास कर रहे हैं। पर वे अपने क्रोध को भी नहीं छिपा पा रहे, गांधी विरोधियों के प्रति उनका रोष पुस्तक में बार बार उभर कर आ रहा है।

गांधी जी से जुड़े हर पहलू को सुशोभित ने बहुत कम शब्दों में समझाने का भरपूर प्रयास किया है। आज के समय में बहुत कम समय मिल पाता है एक लंबी पुस्तक को पढ़ पाने का। इस कारण सुशोभित का यह प्रयास सराहनीय ही है जो उन्होंने १५८ पृष्ठों में गांधी जी का समस्त जीवन लिख दिया।

वैसे तो गांधी जी पर ५०,००० पृष्ठों का 'गांधी वांग्मय' उपलब्ध है, तब भी समय समय पर गांधी जी पर लिखा जाता ही रहा है। गांधी जी से प्रभावित हुए बिना कोई नहीं रह सकता, यदि वह उनके लिखे को पढ़ ले, इस बात को सुशोभित ने सही ही लिखा है।

'हिन्द स्वराज' का एक बड़ा प्रशंसक वर्ग है, पर उसके आलोचक बहुतेरे हैं। धरमपाल ने 'गांधी को समझें' में हिन्द स्वराज को बहुत सधे हुए शब्दों में बड़ी सुंदरता से समझाया है।

धरमपाल जी के बाद भी बहुत से लेखकों ने गांधी जी पर लिखा है, पर हिन्द स्वराज का जो सही अर्थ धरमपाल ने समझाया है, वही गांधी जी का सच्चा हिन्द स्वराज है। सुशोभित ने भी उसे उसी ढंग में लिया है, और उसे वर्तमान समय का उदाहरण दिखा कर समझाने का प्रयत्न भी किया है।

पर जिनके प्रति सुशोभित का रोष प्रकट हुआ है, मैंने उन्हें भी पढ़ा है। आप क्रांतिकारी तरीक़े को पसंद नहीं करते, ये सही है। पर आप क्रांतिकारियों के शौर्य को अराजकतावादी भी नहीं ही कह सकते।

क्या 'बिस्मिल की आत्मकथा' पढ़कर आप उन्हें अराजक कह पाएंगे, या सावरकर की 'मेरा आजीवन कारावास' पढ़कर सावरकर से द्वेष रख पाएंगे। आपने ये स्पष्ट किया है कि आपकी भावना किसी के प्रति द्वेष की नहीं है। आप एक समझदार और सुलझे हुए व्यक्तित्व के धनी हैं, पर आपका पाठक वर्ग ऐसा न हो।

धरमपाल ने जिस सरलता से गांधी को समझाने का प्रयास किया है, उसमें किसी के प्रति रोष अथवा क्रोध प्रकट नहीं होता। आपकी शब्दावली में रोष उभर कर सामने आता है।

गांधी किसी से द्वेष नहीं रखते थे, न उनके मन में क्रोध के लिए ही जगह थी। आप इससे भी अच्छा लिख सकते हैं, गांधी जी के बारे में अभी बहुत कुछ है, और मैं आशा करता हूँ आप ऐसे ही इनके बारे में लिखते रहेंगे।

धन्यवाद
Profile Image for अभय  कुमार .
23 reviews4 followers
June 6, 2021
गाँधी की चारित्रिक और वैचारिक महानता को समझने के लिए, यह एक महत्वपूर्ण, खूबसूरत और उत्कृष्ट कृति है। बाकी सुशोभित की लेखन शैली और वाक्य संरचना ही आप को सम्मोहित करने के लिए पर्याप्त है।
33 reviews7 followers
July 27, 2023
A magnificent work that goads the reader to revisit the most influential social and political character of modern Indian history.
Displaying 1 - 7 of 7 reviews

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