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नयनजोर के बाबू : रबीन्द्रनाथ टैगोर की महान कहानी
आज से सौ वर्षों से भी अधिक पुराना कथानक है| भारत में अंग्रेजों का राज था, कलकत्ता पूरे भारत की की राजधानी हुआ करती थी| कहानी का नायक एक उच्चशिक्षित युवा है जिसे पड़ौस में रहने वाले नयनजोर रियासत के जमींदार कैलाश बाबू इसलिए अच्छे नहीं लगते कि वे रियासत का सारा वैभव समाप्त होने के बाद भी अपना स्वाभिमान नहीं छोड़ते| एक समय बंगाल का गौरव रही नयनजोर रियासत के स्वामी कैलाश बाबू अब निहायत ही दयनीय हालत में कलकत्ता के एक साधारण और छोटे से मकान में अपनी युवा पोती कुसुम के साथ रहने को विवश हैं| नायक जो देखने में स्मार्ट है, कलकत्ता विश्वविद्यालय से "एम.ए" की शिक्षा प्राप्त है, के पास पूरे बंगाल से शादी के प्रस्ताव आ रहे हैं लेकिन उसे एक ऐसी लड़की चाहिए जो देखने में अप्सरा जैसी खूबसूरत हो, अपने माता पित
21 pages, Kindle Edition
Published April 6, 2021
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April 26, 2021Bahut Sundar Lekhan
Bahut hi sundar lekhan hai. Padhkar man prasann ho gaya. Tagore ji ki pustak peheli baar padhi maine. Atul ji ko dhanyawad.
Bahut hi sundar lekhan hai. Padhkar man prasann ho gaya. Tagore ji ki pustak peheli baar padhi maine. Atul ji ko dhanyawad.
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