वो छह की मंडली थी ,विभिन्न जगहों पर कार्यरत अपने अपने व्यवसायों में व्यस्त लेकिन कोविड19 की आपदा की वजह से लगे लॉकडाउन ने उन्हें मौक़ा दिया अपने पैतृक गाँव के शांत और कोरोना से सुरक्षित वातावरण में इकट्ठा होने का लेकिन....... इस बार इनका इंतज़ार वो कर रही थी ‘वो’ जो बारह वर्ष पहले भी आई थी लेकिन क़ैद कर दो गई थी गहन अंधकार में ‘वो ‘ जो बारह वर्षों की क़ैद में अपनी लगन से चक्र दर चक्र पार करके प्रेतयोनि के आखिरी चक्र में आ चुकी थी और बेहिसाब शक्तिशाली हो चुकी थी ‘वो’ जो अब उस कैद से आज़ाद हो गई थी और इस बार उसे रोक पाना मुश्किल ही नही नामुमकिन था ‘वो ‘ जो चुरा लेना चाहती थी समय के चक्र में से थोड़ा सा वर्तमान , क्योंकि उसके पास अतीत तो था, भविष्य भी था किंतु वर्तमान नही था। ‘वो’ जो तलाश में थी उसकी जिसके ë
Cheesy, pulpy, at times stupid and problematic, at times engaging...especially when the story goes into flashback and when the whole story shifts it's genre. I liked that "crime/drama" shift in genre the most because the "horror" aspects were...whatever. It's a timepass book at it's best.
My thirst for a world class horror story in Hindi remains unquenched.