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Muktibodh ki Aatmkatha
कवि-विचारक गजानन माधव मुक्तिबोध की प्रामाणिक जीवनी:
मालवा के पठारों में पैदा हुआ एक मामूली आदमी, जिसने एक मामूली जीवन जिया - और एक दुखद मृत्यु में जिसके जीवन की पीड़ाओं का अंत हुआ, कैसे जीवन को बदलने की रचना-प्रक्रिया का पाठ बन गया? क्या था उस जीवन में, जिसने सफलता के चक्करदार घेरों की बजाय समाज के रूपांतरण के अग्नि-स्फुुलिंग अपनी रचनाओं में इकट्ठा किए? भावी-क्रांति के अग्नि-काष्ठ वह बीनता रहा। मुक्तिबोध का आत्मसंघर्ष क्यों इतना मूल्यवान बन गया? मुक्तिबोध की यह जीवनी उनके इसी आत्मसंघर्ष का महाकाव्यात्मक आख्यान है। इसमें समूचा एक युग अपनी संपूर्ण प्रेरणा और हलचल के साथ मौजूद है। हिंदी की वैचारिक विरासत की एक अनमोल थाती।
मालवा के पठारों में पैदा हुआ एक मामूली आदमी, जिसने एक मामूली जीवन जिया - और एक दुखद मृत्यु में जिसके जीवन की पीड़ाओं का अंत हुआ, कैसे जीवन को बदलने की रचना-प्रक्रिया का पाठ बन गया? क्या था उस जीवन में, जिसने सफलता के चक्करदार घेरों की बजाय समाज के रूपांतरण के अग्नि-स्फुुलिंग अपनी रचनाओं में इकट्ठा किए? भावी-क्रांति के अग्नि-काष्ठ वह बीनता रहा। मुक्तिबोध का आत्मसंघर्ष क्यों इतना मूल्यवान बन गया? मुक्तिबोध की यह जीवनी उनके इसी आत्मसंघर्ष का महाकाव्यात्मक आख्यान है। इसमें समूचा एक युग अपनी संपूर्ण प्रेरणा और हलचल के साथ मौजूद है। हिंदी की वैचारिक विरासत की एक अनमोल थाती।
496 pages, Hardcover
Published July 1, 2010
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Community Reviews
Displaying 1 - 1 of 1 review
July 22, 2024
मुक्तिबोध एक ऐसे वृहद समुद्र हैं जिसमें डूबने पर जीवन मूल्यों से नजरे बचा निकल जाना नामुमकिन है। बेहद सराहनीय कृति है यह आत्मकथा। हालांकि मुक्तिबोध शायद ही कभी शब्दों के भीतर पूरी तरह समा पाएं, वो यहां भी एकदम ठोस लेकिन किसी मेटाफिजिकल सत्य की तरह अपना दायरा बढ़ाते जाते हैं। मुक्तिबोध के जीवनकाल और उसके समसामयिक घटनाओं पर उनके विचारों को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया गया है। नमन गजानन माधव मुक्तिबोध. 🫂
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