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लकीर का फकीर

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चैत मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा मनाया जाता है। शुरुआत में गुड़ी पड़वा को सिर्फ महाराष्ट्र में मनाया जाता था, लेकिन इधर कुछ वर्षो से भारत के अन्य राज्यों में भी मनाने की परम्परागत शुरुआत हो गयी है। गुड़ी पड़वा शब्द का अर्थ मराठी में गुड़ी यानि किला और पड़वा यानि गिराना या पाड़ना है, अर्थात किला या साम्राज्य को गिराना, कब्जा करना है। रोमन तिथि के अनुसार 11 मार्च 1689 ईस्वी को छत्रपति संभाजी महाराज की ब्राह्मणों ने मनुस्मृति के नियमानुसार नाक, कान, और चमड़ी उधेड़ते हुए हत्या कर दी थी और उसके बाद उनके सर को भाले (बांस में नुकीला बना हुआ औजार) में लटकाकर ब्राह्मणों ने अपने गांव में जुलूस निकाल कर व शक्कर बांटकर खुशी मनाया था। मृतक संभाजी के सर को भाले पर लटकाकर ब्राह्मणों ने यह सन्देश दिया था

28 pages, Kindle Edition

Published October 22, 2020

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Rajeev Patel

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