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लकीर का फकीर

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चैत मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा मनाया जाता है। शुरुआत में गुड़ी पड़वा को सिर्फ महाराष्ट्र में मनाया जाता था, लेकिन इधर कुछ वर्षो से भारत के अन्य राज्यों में भी मनाने की परम्परागत शुरुआत हो गयी है।

गुड़ी पड़वा शब्द का अर्थ मराठी में गुड़ी यानि किला और पड़वा यानि गिराना या पाड़ना है, अर्थात किला या साम्राज्य को गिराना, कब्जा करना है।

रोमन तिथि के अनुसार 11 मार्च 1689 ईस्वी को छत्रपति संभाजी महाराज की ब्राह्मणों ने मनुस्मृति के नियमानुसार नाक, कान, और चमड़ी उधेड़ते हुए हत्या कर दी थी और उसके बाद उनके सर को भाले (बांस में नुकीला बना हुआ औजार) में लटकाकर ब्राह्मणों ने अपने गांव में जुलूस निकाल कर व शक्कर बांटकर खुशी मनाया था।

मृतक संभाजी के सर को भाले पर लटकाकर ब्राह्मणों ने यह सन्देश दिया था कि आज से कोई भी स्वराज्य हेतु आंदोलन करेगा तो उसका भी हश्र संभाजी के जैसा ही किया जायेगा। इसे आज भी सांकेतिक रूप से ब्राह्मणो द्वारा एक बांस या भाले में सर के जैसा प्रतीकात्मक रूप से लोटा को उल्टा करके लटकाया जाता है और उसके साथ में बांस के सहारे महिलाओं का साड़ी बलाउज भी बाँधा जाता है।

इस परम्परा पर ब्राह्मणों की ऐसी मान्यता है कि हमारे मनुस्मृति के खिलाफ जो भी स्वराज्य या शासन चलाने की सोच रखेगा उसका हश्र ऐसा ही करते हुए बांस से उल्टा लटका देंगे और साड़ी बलाउज बांधने का अर्थ है कि तुम्हारी घर की महिलाओं का सम्मान भी अपने अधीन कर लेंगे। ब्राह्मण समाज इस परम्परा को उसी समय से मनाते चला आ रहा है और इस निश्चित दिन को संभाजी की हत्या और अपनी विजय जुलूस की खुशी मानते हुए शाम को गुड़ी को उतार देता है और रात्रि में मिष्टान भोजन का आनंद लेता है।

लेकिन आज इस परम्परा को ब्राह्मणों के साथ-साथ बहुजन समाज के लोग भी देखा - देखी मनाने लगे हैं। ब्राह्मण समाज इस परम्परा पर दो प्रकार का फटका बनाकर समाज के लोगों को दिखाता है। पहला फटका यह बताता है कि यह हत्या और उसके सर को प्रतीकात्मक रूप से लटकाने की परम्परा रावण की हत्या से चली आ रही है।

ब्राह्मणों ने क्या फटका मारा है!

रावण की हत्या किस काल में? (ईसा से 600 वर्ष पूर्व के पहले की कहानी कोई भी कुछ जान नहीं पाता है, लेकिन ये ब्राह्मण 11 रुपया में मंगल और शनि ग्रह तक की जानकारी को लेकर आ जाता है।)

रावण की हत्या की खुशी है तो सिर्फ महाराष्ट्र में ही क्यों, पूरे भारत में क्यों नहीं?

आज ब्राह्मण इसी गुड़ी-पड़वा को आगे बढ़ाते हुए समस्त भारत में एक नए पर्व के रूप में दिखाने लगा है। यानि ब्राह्मणों ने शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित स्वराज्य को आज ही के दिन खत्म करते हुए नए रूप से पुनः ब्राह्मणी राज्य स्थापित किया था।

इस “लकीर का फकीर” रूपी फटका को समझने वाले बहु - जन अभी भी ब्राह्मणों के दीवाने ज्यादा लगतें हैं।

28 pages, Kindle Edition

Published October 22, 2020

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Rajeev Patel

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Profile Image for Shivam Yadav.
78 reviews4 followers
July 6, 2022
Great Book but I'm skeptical about some of the content.
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