Jump to ratings and reviews
Rate this book

Ghar Badar

Rate this book
घर बदर, यह कुंदू यानी कुंदन दूबे की जीवन कथा है। कुंदू जो जीवन भर घर बदर रहे, केवल वे ही नहीं, उनके पुरखे तक। जीवनपर्यंत वे केवल एक अदद घर का सपना देखते हैं और देखते ही रह जाते हैं कुछ-कुछ गोदान के होरी की तरह। एक निम्न मध्यवर्गीय व्यक्ति के लिए इस सपने की क्या कीमत है? या इस सपने के लिए उसे क्या कुछ कीमत चुकानी पड़ सकती है? उसकी कथा-अंतर्कथा से यह उपन्यास पाठकों को बखूबी रूबरू कराएगा। खास बात यह कि कई मायनों में फिर यह कथा-अंतर्कथा कुंदू के जीवन की ही कथा नहीं रह जाती। जैसे-जैसे कुंदू का जीवन आपके समक्ष खुलता जाएगा; जैसे-जैसे उसके भय, उसकी कमजोरियाँ, मजबूरियाँ यहाँ तक कि कुछ हद तक छोटे-छोटे स्वार्थ और चालाकियाँ भी आपके सामने आएँगी, वैसे-वैसे यह उपन्यास अपने दायरे का विस्तार करता जाएगा। कुंदू य

Paperback

Published January 1, 2020

About the author

Santosh Dixit

33 books

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
0 (0%)
4 stars
1 (100%)
3 stars
0 (0%)
2 stars
0 (0%)
1 star
0 (0%)
No one has reviewed this book yet.

Can't find what you're looking for?

Get help and learn more about the design.