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Devangana - (देवांगना)
वैशाली की नगरवधू, वयं रक्षामः और सोमनाथ जैसे सुप्रसिद्ध उपन्यासों के लेखक आचार्य चतुरसेन के इस उपन्यास की पृष्ठभूमि बारहवीं ईस्वी सदी का बिहार है जब बौद्ध धर्म कुरीतियों के कारण पतन की ओर तेज़ी से बढ़ रहा था। कहानी है बौद्ध भिक्षु दिवोदास की, जो धर्म के नाम पर होने वाले दुराचारों को देखकर विद्रोह कर डालता है जिसके लिए उसे कारागार और पागलखाने में डाल दिया जाता है। वहां पर उसे एक देवदासी और एक भूतपूर्व सेवक सहारा देते हैं और उनकी सहायता से दिवोदास धर्म के नाम पर किए जाने वाले अत्याचारों का भंडाफोड़ करता है। आचार्य चतुरसेन ने किस्सागोई के अपने खास अंदाज़ में, इस कथानक के जरिये धर्म और धर्म के ढोंग को बहुत ही भावनात्मक और रोचक ढंग से चित्रित किया है और दिखाया है कि भारत से बौद्धधर्म का लोप किन कारणों से हुआ। पठनीयता इतनी है कि शुरू से अंत तक पाठक को बाँधे रखती है।
- GenresHistorical Fiction
114 pages, Kindle Edition
First published August 19, 2014
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Community Reviews
Displaying 1 - 15 of 15 reviews
June 26, 2021
धर्म और पाखंड
धर्म के नामपर जो पाखंड होता आ रहा है, वह सभी धर्मों में विकराल है। ऐसे ही एक पाखंड को इस उपन्यास में उजागर किया गया है।
धर्म के नामपर जो पाखंड होता आ रहा है, वह सभी धर्मों में विकराल है। ऐसे ही एक पाखंड को इस उपन्यास में उजागर किया गया है।
April 27, 2021
Portraying gradual decline in essence of Buddhism, the author has weaved a love story around the plot of conspiracy among kingdoms. His narration of religious decadence and creeping of senseless rituals and lust of priestly class gets reflected to this day.
July 17, 2021
आचार्य चतुरसेन कृत देवांगना बौद्ध धर्म के पतन के समय को दर्शाता है l परन्तु कहानी में पात्र और विषय वस्तु का चित्रण पूर्णतया सही सा नहीं लगता I पढ़ते हुए ऐसा जान पड़ता है कि बड़ी जल्दी में कहानी रच कर एक कार्य से निवृत्ति ली गई है l
December 19, 2019
A classic book by Acharya Chatursen https://www.anuradhagoyal.com/devanga...
June 30, 2021
A good historical book written around time of fall of Budhdhism in ancient India.
September 25, 2026
Recommended if you want to understand how ancient Buddhist monasteries gradually evolved into institutions plagued by heresy, factionalism, and political interference, as well as the complex religious and social conditions of 12th-century India. Arun Shourie rightly said in in Eminent Historians, that "Every movement triumphs, by dint of some unusual characteristic, and when it falls, that point of pride becomes its chief element of weakness."
September 26, 2026
बहुत ही शानदार रचना। इस उपन्यास में बौद्ध धर्म के नाम पर हो रहे पाखंड को उजागर किया गया है। यह बहुत ही चुस्त और तेज़ गति से आगे बढ़ने वाली कहानी है।
June 23, 2023
I am amazed with the strong relevance this book still holds. The narrative elegantly describes how treachery and mistrust led Buddhism to a declining stage through the love story between a follower and devdasi.
I wish the author provided more details on the socio-political scenario prevalent at the time which had given the story a more strong base.
I wish the author provided more details on the socio-political scenario prevalent at the time which had given the story a more strong base.
Read
November 16, 2023So it was vajrayan 😱😱
February 4, 2019
सुन्दर और सरल
ऐसा पहला उपन्यास जो भाषाई स्तर पर समझने और पढ़ने में पर्याप्त सरल था कि मुझे कुछ ही घण्टे लगे इसे पूरा करने में।
सरल किन्तु प्रभावी कि इसका रंगमंचीय प्रस्तुतिकरण किया जा सकता है।
यह सुखान्त प्रेम कथा है ।
बौद्ध धर्म के पतनशील रूप 'वज़्रयान' का विवरण मिलता है जो बताता है कि ईसा की बारहवीं शताब्दी में किस तरह के आडम्बर, पाखण्ड, अत्याचार, अनाचार और कुरीतियाँ व्याप्त हो गईं थीं बौद्ध धर्म में कि जिन दोषों के कारण इस शान्ति एवं सम्यकता की आधारशिला रखने वाली शाख को अपने ही मूल यानि कि भारत वर्ष से ही विलग होना पड़ गया था।
मठ और विहार की निरंकुशता, मनमानी और लिच्छवी राजसत्ता के राजकोष की प्राप्ति के लिए हुए संघर्ष के बीच एक मधुर प्रेम कहानी है, साथ ही देवदासी की मुक्तिसंघर्ष की गाथा भी है।
आचार्य चतुरसेन, पाठक के हृदय पर इस उपन्यास की सरल सुगम स्पष्ट भाषा एवम चित्रात्मक वर्णनात्मक शैली के द्वारा अपनी कथ्यात्मकता का पूर्ण सफल प्रभाव छोड़ते हैं।
एक बार पढ़ने योग्य है।
पुस्तक का सारांश लेखक द्वारा भूमिका में भर दिया गया है, जो तमाम ऐतिहासिक तथ्यों से भी अवगत कराता है।
ऐसा पहला उपन्यास जो भाषाई स्तर पर समझने और पढ़ने में पर्याप्त सरल था कि मुझे कुछ ही घण्टे लगे इसे पूरा करने में।
सरल किन्तु प्रभावी कि इसका रंगमंचीय प्रस्तुतिकरण किया जा सकता है।
यह सुखान्त प्रेम कथा है ।
बौद्ध धर्म के पतनशील रूप 'वज़्रयान' का विवरण मिलता है जो बताता है कि ईसा की बारहवीं शताब्दी में किस तरह के आडम्बर, पाखण्ड, अत्याचार, अनाचार और कुरीतियाँ व्याप्त हो गईं थीं बौद्ध धर्म में कि जिन दोषों के कारण इस शान्ति एवं सम्यकता की आधारशिला रखने वाली शाख को अपने ही मूल यानि कि भारत वर्ष से ही विलग होना पड़ गया था।
मठ और विहार की निरंकुशता, मनमानी और लिच्छवी राजसत्ता के राजकोष की प्राप्ति के लिए हुए संघर्ष के बीच एक मधुर प्रेम कहानी है, साथ ही देवदासी की मुक्तिसंघर्ष की गाथा भी है।
आचार्य चतुरसेन, पाठक के हृदय पर इस उपन्यास की सरल सुगम स्पष्ट भाषा एवम चित्रात्मक वर्णनात्मक शैली के द्वारा अपनी कथ्यात्मकता का पूर्ण सफल प्रभाव छोड़ते हैं।
एक बार पढ़ने योग्य है।
पुस्तक का सारांश लेखक द्वारा भूमिका में भर दिया गया है, जो तमाम ऐतिहासिक तथ्यों से भी अवगत कराता है।
April 27, 2018
देवांगना में आचार्य चतुरसेन ने एक प्रेम-कथानक के माध्यम से बौद्ध एवं अन्य हिन्दू सम्प्रदायों में भयानक आकर ले चुके आडम्बर, तंत्रवाद और छद्म का बड़ी कुशलता से वर्णन किया है। बौद्ध मठों में एक नए साधू के दीक्षित होने की प्रक्रिया का बारीक वर्णन मुझे बहुत सुन्दर लगा। इसके अलावा तथाकथित धर्म के केंद्र (पाखंड के केंद्र कहना अधिक उचित होगा) मंदिर-मठादि की सत्तात्मक शक्ति और प्रभुत्व का भी कुशल वर्णन किया गया है। उपन्यास के अंत होते होते बौद्ध सम्प्रदाय के भारत भूमि से विलुप्त हो जाने के कारण स्पष्ट होने लगते हैं।
June 1, 2016
Though a ok enough book, its not on the level of other Achrya Chatursen's classics. The plot seems superficial where few incidents were pointed out to describe the whole picture. It seems as if the author was hurried throughout the novel.
June 27, 2016
चतुरसेन जी की इस पुस्तक में काफ़ी रोचक तथ्य तो है पर कहीं ना कहीं लेखक इस कहानी में तेज़ी लाने का प्रयास कर रहे थे. बारहवीं सदी और उसके आसपास के दौरान भारतवर्ष में धर्म के छद्म आवरण को इतिहास के संग जोड़ने और उसे उकेरने के लिए आचार्य चतुरसेन जी के द्वारा किया हुआ ये प्रयास अत्यंत सराहनिये हैं.
January 23, 2016
Amazing language....I like historical fiction.....The musicality of pure Hindi is interesting.
October 21, 2016
nothing
This entire review has been hidden because of spoilers.
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