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कबीर हैं कि मरते नहीं
बिन अक्षर ज्ञान पन्द्रहवीं सदी के सामाजिक क्रांतिकारी कबीर, पाखंडी विचारधारा के विरुद्ध लड़ने वाले निराले, फक्कड़ और भयमुक्त संत हैं । वह हिन्दू और मुसलमानों के पाखण्डों को समान रूप से ललकारते हैं । वह जातिवाद को नकारते हैं। वह ब्राह्मणवादी आडंबरों की अधिकता और दुरूहता को देखते हुए उन पर ज्यादा निशाना लगाते हैं। वह वाचिक परंपरा से अर्जित ज्ञान में, सरलता से दुरूहता तक की यात्रा करते हैं । वह श्रमशील जुलाहे के बुनकर कर्म के साथ, श्रमशील समाज का मार्गदर्शक बन, धार्मिक विभाजन को नकारते हैं और अंततः सामाजिक समरसता तथा प्रेम-साधना की यात्रा में विद्रोही तेवर अख्तियार करते नजर आते हैं। वह गृहस्थ आस्तिक होते हुए भी समतामूलक नास्तिक हैं । हम कह सकते हैं कि उनकी आस्तिकता प्रतीकात्मक &#
111 pages, Kindle Edition
Published July 15, 2020
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Community Reviews
Displaying 1 - 1 of 1 review
January 7, 2022
good book to know about Kabir.
I really enjoyed. Many interesting stories, rumours and facts about Kabir.
Good book to know your social background.
Thank you!!
I really enjoyed. Many interesting stories, rumours and facts about Kabir.
Good book to know your social background.
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