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Idea Se Parde Tak

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Ramkumar Singh

8 books2 followers
रामकुमार सिंह
दिलचस्‍प किस्‍सागोई के साथ मौलिक और जमीन से जुड़े कथाकार के रूप में पहचान। सिनेमा और साहित्‍य में समान रूप से सक्रिय। फतेहपुर शेखावाटी, राजस्‍थान के बिरानियां गांव में 1975 में किसान परिवार में पैदा हुए। हिंदी साहित्‍य से एमए। राजस्‍थान में हिंदी पत्रकारिता में नाम कमाया। पुरस्‍कृत भी हुए। कहानियां लिखीं। देश की प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं में छपे। कहानियों के अनुवाद दूसरी भाषाओं में भी हुए। पहला कहानी संग्रह ‘भोभर तथा अन्‍य कहानियां’ चर्चित और प्रशंसित। गजेंद्र श्रोत्रिय की चर्चित राजस्‍थानी फिल्‍म ‘भोभर’ की कथा, संवाद और गीत लिखे। उपन्‍यास ‘जेड प्‍लस’ पर इसी नाम से डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी के निर्देशन में फिल्‍म बनी। इस फिल्‍म की पटकथा और संवाद लिखे। रामगोपाल वर्मा की चर्चित सरकार सीरिज में ‘सरकार3’ के संवाद लिखे। अविनाश दास की फिल्‍म ‘अनारकली ऑव आरा’ के कुछ गीत लिखे। इन दिनों मुंबई में फिल्‍म इंडस्‍ट्री में कार्यरत हैं। लोककथाओं को दिलचस्‍प अंदाज में पुनर्पाठ के साथ ‘बातपोश’ नाम से पॉडकास्‍ट कर रहे हैं, जो काफी लोकप्रिय हो रहा है। अगला उपन्‍यास आने वाला है।
वेबसाइट - www.baatposh.com/ ईमेल- baatposhindia@gmail.com/ पॉडकास्‍ट- https://anchor.fm/ramkumar-singhs-pod... फेसबुक- https://www.facebook.com/ramkumar.singh/ ट्विटर- https://twitter.com/indiark/ इंस्टाग्राम-https://www.instagram.com/iindiark
https://www.imdb.com/name/nm4394357/
https://en.wikipedia.org/wiki/Ramkuma...

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Profile Image for Avinash Jain.
32 reviews3 followers
September 11, 2023
रामकुमार सिंह और सत्यांशु सिंह द्वारा लिखित "आइडिया से परदे तक" फ़िल्म-लेखन पर एक प्रभावपूर्ण मास्टर क्लास की तरह है"

अक्सर हम जब फिल्मों की बातें करते हैं तो हमारी आंखों के सामने तैर आते हैं कुछ सितारों के चेहरे। कानों में गुंजायमान होते हैं फ़िल्म के गीत। और बहुत-से-बहुत स्मरण हो आता है निर्देशक का नाम। पर इन सब के बीच हम भूल जाते हैं, फ़िल्म बनने की पूरी प्रक्रिया और जटिल तंत्र की वह इकाई जिसके मन और बुद्धि के ७० मि.मी. के पटल पर इस फ़िल्म का सर्वप्रथम आविर्भाव हुआ था - फ़िल्म का लेखक।
माया नगरी की चकाचौंध भरी दुनिया में अगर ग्लैमर और प्रसिद्धि के मोहपाश में बंधे बिना, साधना कर सकते हैं तो आप पटकथा लेखन में आपका स्वागत है। सचमुच, यह किताब पढ़ कर समझ आता है कि शो-बिजनेस में पटकथा लेखक होना, एक तपस्या ही है। यह उस किसान की भांति है जिसने बीज बोए, खेत सींचे, हल चलाया, अन्न और साग उगाए और हम खाने की मेज़ पर, स्वाद के चटख़ारे‌ लेते हुए महराज की तारीफ में कसीदे तो पढ़ें पर कभी, भूले-चूके किसान का ज़िक्र तक ना करें‌।

पटकथा-लेखन, नाटक या उपन्यास लेखन से बहुत भिन्न है। यह एक तकनीकी दस्तावेज़ है, जिसमें कला और कौशल का सामानता से महत्व है। इस पुस्तक के लेखकों ने सराहनीय ढंग से बहुत विस्तृत विषय को १६० पन्नों में बड़ी ही प्रासंगिकता के साथ संकलित किया है। यूं तो पटकथा लेखन पर आपको दर्जनों किताबें उपलब्ध हो जाएंगी परंतु हिंदी में शायद ही कोई किताब हो। और हो भी तो इतनी सहज-सरल हो पाना, आसान नहीं।
बड़े ही सलीके और सिलसिलेवार ढंग से लेखकों ने क़िताब का मज़मून तय किया है। किसी भी लेखक (या पटकथा लेखक) को आइडिया कैसे मिलता है और उस आइडिया की परिपक्वता की कसौटी कैसी हो, इस छोर से शुरू होकर, किरदार, कहानी, ढांचा, दृश्य, संवाद आदि पड़ावों से होती यह क़िताब हुई उसे छोर तक आपको पहुंचती है जहां आप स्वयं पटकथा लेखन, एक विश्वास के साथ शुरू और खत्म कर‌ सकें।
कला‌ और कौशल के अलावा यह किताब उन विभिन्न साधनों से भी अवगत कराती है जो इस यात्रा में उपयोगी हैं। जैसे कौन से सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किए जाएं, लेखन के बाद अगले कदम क्या हों या अपने लिखे को कॉपीराइट कहां करें आदि इत्यादि। अगर आपको फिल्में देखना पसंद है या पटकथा लेखन को समझना-सीखना चाहते हैं, तो यह किताब आपके लिए पथप्रदर्शक सिद्ध होगी
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