यह पंद्रह कहानियों का संग्रह है जो यथार्थ और कल्पना के बीच में एक पुल बनाती हैं। सृजन करती हैं एक फेंटसी का जिसके भीतर कई फेंटसी गुँथी हुई हैं। कहानियों का शिल्प चित्रात्मक और सूत्रात्मक है, जो मनोवैज्ञानिक और मनोविश्लेषणात्मक होने के साथ-साथ बहुत सारी परतों को खोलती हैं, बंद करती हैं और फिर खोलती हैं। यह कहानियाँ अद्भुत रोमांच, रोमांस, धोखे और तिलिस्म के महीन धागों से बुनी गई हैं। रिश्तों में आई अदृश्य दरारें, प्रेम के छद्म रूप, जीवन यात्रा के साथ लगातार बदलते जीवन मूल्य का सूक्ष्म विश्लेषण करती कहानियाँ, महानगरों से लेकर छोटे क़स्बों तक आप को लेकर जाएँगी। लेखिका का अपने नए शिल्प के साथ कहानी के प्रवाह को रचना और तोड़ना दोनों बेहद ख़ूबसूरत हैं। अलग क़िस्म की भावुक सजगता, आईने से संवाद करती तस्वीरों से किरदार, यथार्थ से जूझते सच, इन तीनों के भीतर-बाहर की काव्यात्मक क़िस्सागोई दिलकश और मौलिक है। कहानियाँ पाठक को संवेदनशीलता के चरम पर ले जाती हैं और उतनी ही गति से वह आपको यथार्थ के धरातल पर मज़बूती से खड़ा करती हैं।
➡️यह कहानी संग्रह मूलत: महिलाओं की परेशानियां पर आधारित है। महिलाएं जगत को कैसे देखती है, महिलाएं पुरुष को कैसे समझती है, महिलाएं पुरुष से क्या चाहती है आदि।
➡️लेखिका ने 21 शताब्दी को ध्यान मे रखकर कहानियां रची है।इसमें आपको एक ऐसी महिला के बारें मे पढ़ने को मिलेगा जो आजादी चाहती है।वह चाहती है कि पुरुष उसको मात्र भोग की वस्तु ना समझे उसे मानव समझे।
➡️इसमें घरेलू यौन शौषण को भी तरजीह दी गई, समलैंगिकता पर , प्रेम के बारें मे बताया गया जो शायद स्त्रियां चाहती है। परन्तु पुरुष उसे समझ नहीं पाते।
The writing is extremely deep & layered. I found it tough at times to decipher the meanings of lines but if you can, it can be a heart-wrenching read. All in all was a nice read but recommended only for advanced readers.