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Ishq Express

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172 pages, Paperback

First published July 10, 2021

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November 29, 2021
पुस्तक समीक्षा : इश्क़ एक्सप्रेस
लेखक : पीयूष बैंदाड़ा
प्रकाशक : हिन्द युग्म ब्लू
सी 31, सेक्टर20, नोएडा (यू पी) 201301,

प्रेम सभी के जीवन में एक बार ज़रूर आता है और उस व्यक्ति की जीवन बदल जाती है। हर किसी की प्रेम कहानी अलग होती है। अधिकतर लोगों की प्रेम कहानीयां कॉलेज में शुरू होती है। बहुत सारे लोगों की प्रेम की नाव इश्क़ की नदी के किनारे पहुँच ही जाती है और वो मिल जाते हैं लेकिन बहुत सारे प्रेमियों की प्रेम कहानी कभी मज़हब के नाम पर, कभी जाति के नाम पर, कभी घर वालों के नही मानने से तो कभी समाज के डर से तो कभी किसी अन्य कारणों से अधूरा ही रह जाता है।

"इश्क़ एक्सप्रेस" भी एक खूबसूरत प्रेम कहानी है। "जिग्ना और पलाश" की प्रेम कहानी। पलाश राजस्थान का लड़का है जो स्नातक की पढ़ाई के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय में दाखिला लेता है और जिग्ना दिल्ली की लड़की है जो दिल्ली में ही पढ़ती है। ये पढ़ना बहुत रोचक लगेगा कि इतने अलग-अलग जगह से आने वाले और अलग-अलग रहने वाले ये दो छात्र कैसे मिलकर एक दूसरे के लिए जीने लगते हैं। एक दूसरे के साथ प्रेम धागे में बंध जाते हैं।

इस उपन्यास में और भी कुछ किरदार हैं लेकिन इन सभी को लेखक ने नियति से सिर्फ उस समय पर इन दो मुख्य किरदारों से जुड़े हुए दिखाया है और ये सभी अपने-अपने किरदार निभाते चले जाते हैं। इसमें हॉस्टल का जीवन भी दर्शाया गया है और साथ ही यात्राओं को भी लिखा गया है। "जिग्ना और पलाश" की प्रेम कहानी भी एक यात्रा ही है।

जब दो लोग प्रेम करते हैं तो उन्हें दुनिया के एक कोने से दूसरा कोना भी बस कुछ ही दूर लगता है। इस उपन्यास में भी "जिग्ना और पलाश" के कुछ घंटों की मुलाकात के लिए पलाश हमेशा रात भर की यात्रा रेल से करता है और शायद यही कारण रहा है कि इस कहानी को "इश्क़ एक्सप्रेस" नाम भी दिया गया है।

इस उपन्यास को पढ़ते हुए मैंने समझा कि दो प्रेमी, प्रेम में पड़कर कैसे कमज़ोर पड़ जाते हैं और एक दूसरे से मिलने के लिए कुछ भी करते हैं। इसे पढ़ते हुए आपको प्रेम महसूस होगा। लेकिन कहानी ख़त्म होते-होते इसके दूसरे भाग की बात कहते हुए ख़त्म हो जाती है। लेखक ने हर अध्याय ख़त्म करते समय कुछ सवाल छोड़ दिया है जिससे आगे की कहानी पढ़ने के लिए उत्साह बना रहता है।

लेखक परिचय:

डॉ. पीयूष बैंदाड़ा अमेरिका के कोलम्बिया में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिसौरी के स्कूल ऑफ़ मेडिसिन के आणविक माइक्रोबायोलॉजी तथा इम्यूनोलॉजी विभाग में शोध-वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। पीयूष ने भारत में हरित क्रांति की जननी, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से कृषि में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। तत्पश्चात इन्होंने अपने शोध करियर का आरंभ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के स्कूल ऑफ लाइफ़ साइंसेज़ से किया और इसके बाद सीएसआईआर- इंस्टीट्यूट ऑफ़ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़ से माइक्रोबायोलॉजी में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। "इश्क़ एक्सप्रेस" उनका दूसरा उपन्यास है।.

आपको ये किताब क्यों पढ़नी चाहिए?

यदि आप प्रेम कहानियां पसंद करते हैं तो ये किताब आपके लिए ही है। आपको ये किताब इसलिए भी पढ़ना चाहिए क्योंकि इसमें प्रेम का संघर्ष और समर्पण दिखाया गया है। प्रेमियों का आत्मविश्वास ही होता है जो दोनो को हर परिस्थिति में सकारात्मक रहना सिखाता है। पढ़कर आपको भी अपनी पहली प्रेम कहानी और प्रेमी या प्रेमिका की ज़रूर याद आ जायेगी। इसमें ये भी सीखने को मिलता है कि यदि आप पूरी निष्ठा के साथ अपने प्रेम को निभाते चलते हैं तो आप कभी भी असफलता की तरफ नही जाते। प्रेम में एक दूसरे के लिए निष्ठा और समर्पण ही दोनो को मिलने का कारण बनता है।

यदि आपने कभी अपने जीवन में किसी से भी प्रेम किया है तो फिर उस प्रेम को जीने का एक मौका है ये "इश्क़ एक्सप्रेस"। और फिर दूसरी एक एक्सप्रेस आएगी जिसमे इस प्रेम कहानी के अंत में छोड़े गए सवालों के जवाब होंगे। ये पुस्तक पढ़कर ख़त्म करेंगे तो फिर एक और किताब के आने का इंतजार करने लगेंगे।

आपको किताब में क्या कमी लग सकती है?

किताब पढ़ते हुए इसमें "जिग्ना और पलाश" की प्रेम कहानी आपको शुरू में थोड़ी अजीब लग सकती हैं, जैसे कि दोनों का शहर इतना दूर है फिर भी कैसे मिल जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों की नियति और भविष्य ऐसा ही लिखा होता है और उन्हें मिलना ही होता है। कुछ प्रेम कहानियां तो मुल्क की सरहदें फलांग कर एक दूसरे से मिल ही जाती हैं। बाकी बीच में कभी-कभी पढ़ते हुए ऐसा लगने लगता है जैसे बस पलाश अपने प्रेम से मिलने के लिए रेल की सफर कर रहा है, मिल रहा है और वापस हॉस्टल चला जाता है। बार-बार ये पढ़ना थोड़ा सा उबाऊ हो जाता है।

लेकिन इसे पूर्ण करने के लिए लेखक ने अपनी पूरी कोशिश की है कि वह सभी अध्याय के बाद कुछ सवाल छोड़ दे जो पाठकों को बाँधे रखे और ये बहुत हद तक काम भी कर जाती है और आप कहानी से जुड़े रहते हैं और आगे पढ़ने में उत्सुकता बनी रहती है।

इस किताब की कुछ पंक्तियाँ बहुत पसंद आयी...

• मनुष्य समय के हाथ का खिलौना ही है। समय हमें हमारे लक्ष्य के मुहाने तक पहुँचाकर छोड़ देता है।

• कर्म ही जीवन का सार है और कर्म में ही वह शक्ति है जो एक बार नियति को भी अपने पक्ष में घटित होने को बाध्य कर सकती है।

• प्यार अंधा, बहरा और गूँगा होता है। प्यार किसी की नही सुनता और न ही उसे कोई सीमाओं में बाँध सकता है।

• अक्सर माता-पिता अपने जीवन के अनुभव अपने बच्चों को सिखाने की चाह में यह भूल जाते हैं कि बचपन की अपनी एक अलग ही आज़ादी होती है।

• प्यार, प्यार ही होता है और वो किसी रिश्ते के नाम का मोहताज नही होता। लेकिन हमारे समाज ने प्यार के लिए भी रिश्तों की बेड़ियाँ बना ही ली हैं और आख़िरकार प्यार उन बेड़ियों में बँधकर रह जाता है।

किताब अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।

~"अहमद"
Profile Image for भारमल गर्ग.
1 review
September 15, 2021



इश्क़ एक्स्प्रेस "उपन्यास"

प्रेम वो भावना है जो किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, जीवों और अपने ईश्वर के लिए निःस्वार्थ पैदा होती है। इसीलिए हम कह सकते हैं कि प्रेम एक भावना या मनोविकार है। आज के समय में ज्यादातर प्रेम शब्द को स्त्री-पुरूष के प्रेम प्रसंग से जोड़ कर देखा जाता है। मन के भाव आदि के प्रकट होने,करने या स्पष्ट रूप से सामने आने की क्रिया या भाव स्मरण यथार्थ में वर्णित होता है।

शीर्षक व मुख्य पृष्ठ का छायाचित्र कहानी, कल्पनाएं, वास्तविकता सौंदर्य भाव उजागर करता है। पाठकों के लिए मातृभाषा हिंदी का प्रयोग किया गया है। अभी तू किंचित मात्र शब्दों का चयन अंग्रेजी साहित्य के अनुसार किया गया है दैनिक जीवन में जिसका यथावत सभी उपयोग करते हैं काकी कोई पाठकों के लिए पढ़ने हेतु बाधाएं उत्पन्न नहीं हो। आप अपने हृदय की उन आस्थाओं से जुड़ सकें जो कहीं मन में पनपती है। पात्र काल्पनिक या वास्तविक आप स्वयं अपने त्रि भाव से मनन,चिंतन,विश्वास,दृढ़ता और संकल्प यथावत इसका इश्क एक्सप्रेस "उपन्यास" सभी पात्रों को भूलकर आप स्वयं से कहानी की अनुभूति करेंगे।

इश्क एक्सप्रेस "उपन्यास" रेल निर्दिष्ट समय पर नियमित रूप से रेलगाड़ियाँ ठहरा करती हैं । उसमें से एक रेलगाड़ी के ठहरने के पुनः रवाना होने पर यह कहनी से प्रा��ंभ हुई।
इस उपन्यास में दो सच्चे प्रेम के पंछी उनका चित्रण किया गया है।


कहानी का प्रारंभ दृढ़ विश्वास, कठिन परिश्रम, संघर्षशील पलाश नामक युवा शिक्षण हेतु जयपुर से अपनी यात्रा प्रारंभ करता है। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय उत्तराखंड की ओर आत्म विश्वास, भय, संभ्रम पाठकों के लिए रोचक सभी तथ्यों में विपरीत अनुभूतियां। अपनी आत्मशक्ति घर से मीलो तक की यात्रा नौजवान अपना विश्वविद्यालय में अपना प्रवेश लेने के साथ-साथ रहना, खाना, पीना आदि व्यवस्था स्वयं करता है। छात्र जब यात्रा प्रारंभ करता है अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचते ही उसको कहीं अनावरण का सामना करना पड़ता है जो उसके जीवन को नई दिशा भी दे सकते हैं। प्रेम,सद्भावना,संयोग, पीड़ा है, प्रेम "मन" वेदना,कुटमार इन सभी में उतार-चढ़ाव सैकड़ों स्रोत से।

एक स्थान से दूरियां समान होती है "रेल" ने राजस्थान तथा बिहार दो प्रदेश को एक कहानी में जोड़ा समझे प्रेम की बात। नायक और नायिका का प्रेम अर्थात जिन्ना-पलाश बिल्कुल शांत, सरल स्वभाव, निस्वार्थ भावना। उपन्यास में स्पष्ट किया हुआ है कि नीति "कर्म" का जो लिखा हुआ है वह होकर रहेगा । दो दशक तक कहानी का चलना नायक और नायिका का वही आकर्षण बना रहना। छात्रावास परिसर हमेशा बड़ा होता है परंतु प्रत्येक छात्र को यांत्रिक संसाधनों का उपयोग करने कुछ क्षण मिलता है।

पलाश और जिन्ना "मुख्य किरदार" जिनके सैकड़ों प्रश्न उत्पन्न करता है उन प्रश्नों का जवाब आपको उपन्यास पढ़कर मिलेगा क्या दोनों का विवाह हो जाता है ? क्या दोनों की प्रेम कहानी बीच में ही रुक जाती है ? यहां कोई जीवन नया रास्ता बता देगा ? दिल्ली से कहानी का प्रारंभ सामान्य बोगी से यात्रा, घंटों इंतजार पल ! जातिवाद,व्यक्ति विशेष, कहीं दृश्य इस उपन्यास में उजागर होते हैं।

इश्क एक्सप्रेस-प्रेम,पर्यावरण, पारिवारिकता,हरित क्रांति,
सैकड़ों अन्य विषयों को साथ में लेकर चलने वाला उपन्यास ।


समीक्षक:- भारमल गर्ग सांचौर
पुलिस लाईन जालौर (राजस्थान)
bhamugarg@gmail.com
+91- 8890370911
This entire review has been hidden because of spoilers.
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Author 2 books1 follower
August 19, 2021
📙 Book: Ishq Express । इश्क़ एक्सप्रेस
Author: Piyush Baindara (@piyush.baindara)

इश्क एक्सप्रेस पलाश और जिग्ना की एक बेहतरीन कहानी है। पलाश मूल रूप से राजस्थान के रहने वाला हैं और पंतनगर विश्वविद्यालय से स्नातक करने जाता है। पंतनगर विश्वविद्यालय जो एक बहुत बड़ा और प्रसिद्ध विश्वविद्यालय है और उत्तराखंड में स्थित है। कहानी की शुरुआत में, लेखक ने विश्वविद्यालय को खूबसूरती से वर्णित किया है।

देव जो पलाश का कजिन है और दिल्ली के मयूर विहार में रहता है। पलाश देव के घर जाता रहता है। दिल्ली में पलाश की मुलाकात देव की एक दोस्त जिग्ना से होती है, चंद लम्हे की मुलाकात कब प्यार में बदल जाती है दोनों को पता ही नहीं चलता। नियति यह है की आगे दोनो के प्यार में बहुत सारी अड़चन आने वाली है। लेकिन नियति ही पलाश बाबू का हर कदम पर साथ देती है। पलाश को जिग्ना से मिलने के लिए रानीखेत एक्सप्रेस के जनरल डब्बे में पूरी रात का सफर तय करना पड़ता है। जनाब अब आप पूछेंगे जनरल डब्बा ही क्यों? इसका कारण जानने के लिए आपको पुस्तक पढ़नी होगी। लेकिन ये इश्क का फितूर ही तो है जो आशिक को आग का दरिया पार करा दे यह तो सिर्फ रात का सफर है और चाँद घंटो का हमेशा मिलने से पहले इंतज़ार। जिग्ना पलाश से मिलने EDM मॉल अपनी कोचिंग क्लास बंक कर के आती है।

जैसा की हमारे भारतीय समाज के मध्यम वर्गीय परिवार का एक ढाँचा होता है वैसे ही दोनों के परिवार का ढांचा भी है जिसमे जिग्ना के पिताजी जो की बहुत सख्त मिजाज के है। लेकिन माँ एक सामान्य गृहिणी की तरह अपने बच्चों की बात समझती है। खैर दोनों का प्यार परवान चढ़ता है और शुरू के कुछ महीनो में ही जिग्ना अपने और पलाश के रिश्ते को ले कर अपनी मंशा साफ़ ज़ाहिर कर देती है।

पलाश और जिग्ना की प्रेमकथा के साथ साथ पलाश का विश्वविद्यालय हॉस्टल में बिताए वक़्त का वर्णन भी बेहद खूबी से लिखा है।

पलाश और जिग्ना के प्यार का अंजाम क्या होगा?
क्या पलाश अपने प्यार के लिए खड़ा होगा या मुश्किलों को देख कर पीछे हट जाएगा?

इस कहानी को पढ़ कर मैं इतना तो यकीनी तौर पर कह सकता हूँ, जिस किसी इंसान ने प्यार किया हो और उसे अंजाम तक पहुंचाने की ठानी हो इस पुस्तक में लिखी सभी परिस्थितिओं से हर किसी को गुज़ारना पड़ा होगा। अंजाम तक वो लोग पहुंच पाए होंगे जिनका विश्वास चट्टान की तरह मजबूत होगा।
Profile Image for Literature World.
56 reviews7 followers
October 24, 2021
चले एक प्यार भरे सफर पर, इश्क एक्सप्रेस के साथ।।
इस प्यार भरे सफर में आपको प्यार के संघर्ष देखने को मिलेगा।

इश्क एक्सप्रेस पीयूष बैंदाडा जी का दूसरा उपन्यास है। यह उपन्यास 2004-07 तक के बीच की कहानी का वर्णन करता है।

कहानी का मुख्य पात्र पलाश जोकि राजस्थान का रहने वाला है ,और अपने आगे की पढ़ाई के लिए पतंग नगर आया है। पलाश की जिंदगी का सफर यहीं से शुरू हुआ है, जो पलाश के जीवन में खुशी, प्यार, संघर्ष आदि लाने वाला था।

पलाश की आंटी दिल्ली में रहती थी, और देव पलाश का पक्का दोस्त था। पलाश किसी काम से दिल्ली देव के पास दिल्ली जाता है, जहां एक दिन उसकी मुलाकात देव की दोस्त जिया व जिग्ना से होती है। और पलाश के दिल में जिग्ना के प्रति प्यार की चिंगारी भड़क उठती है, पर दूसरी साइड से भी ग्रीन सिगनल आना जरूरी था। इसलिए पलाश ज्यादा जल्दी न करते हुए जाते समय जिग्ना को अपना नंबर देकर चला जाता है और जिग्ना के फोन का वेट करता है पर जिग्ना का फोन नहीं आता।

लेकिन एक महीने बाद जिग्ना पलाश को फोन करती है और यहीं से दोनों के प्यार की गाड़ी चल पड़ती है। इस प्यार की गाड़ी में बहुत सारे ट्विस्ट है, जो कहानी को और भी रोचक बनाते हैं।
आगे आपको पढ़ने को मिलेगा की पलाश के साथ क्या-क्या हुआ? पलाश व जिग्ना का प्यार कितना आगे बढ़ा? उनके जीवन में क्या-क्या संघर्ष आए? आदि।

इस इश्क एक्सप्रेस में आपको आगे बहुत ही ट्विस्ट मिलेंगे और साथ ही यह गाड़ी कितनी बाधाओं को पार कर अपने गंतव्य तक पहुंचेगी यह जानने के लिए आपको बुक पढ़नी पड़ेगी।

कहानी के पात्रों की बात करें तो कहानी में मुख्य पात्र पलाश व जिग्ना है तथा सहायक पात्र देव, पार्थ, अंकित, अंकल आदि है।

बुक का कवर कहानी के अनुरूप है, और शीर्षक को पढ़ने पर आपको भी इस ट्रेन में रिजर्वेशन करवाने का मन करेगा। साथ ही कहानी रोचक है, कहीं ना कहीं दैनिक जीवन से जुड़ी हुई है।
Profile Image for Vandana.
32 reviews4 followers
September 17, 2021
आज के बदलते दौर में हम अपनी मातृभाषा तथा उसकी खूबसूरती को कहीं न कहीं भूल रहे हैं। स्कूल जीवन के बाद शायद मैंने ये पहली हिंदी किताब पढ़ी है।

इस पुस्तक का नाम है - "इश्क एक्सप्रेस"। किताब के नाम और तस्वीर से ही उसकी कहानी का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह एक प्रेम कहानी है - कहानी के प्रमुख किरदार हैं पलाश और जिग्ना। हालाँकि कहानी कोई नयी नहीं है, परंतु पूरी किताब में बड़े ही विस्तार से आज से 10-12 साल पहले की कॉलेज लाइफ़ और हॉस्टल लाइफ़ को दर्शाया गया ह��, जब ना तो मोबाइल फोन होते थे और ना ही इंटरनेट का ज्यादा चलन था। चूँकि लेखक @ Piyush.baindara स्वयं पंतनगर हॉस्टल में रह चुके हैं इसी वजह से उन्होंने वहाँ की हॉस्टल लाइफ के काफ़ी रोचक किस्से किताब में सम्मलित किये हैं, जो किताब को दिलचस्प बनाते हैं।

किताब में लिखी भाषा बहुत ही सरल हिंदी में लिखी हुई है, जिसके कारण इसे पढ़ना काफ़ी आसान है।

अगर आप किसी हिंदी किताब को पढ़ने का विचार कर रहे हैं तो आप इस किताब से शुरुआत कर सकते हैं।
Profile Image for Rashmi.
158 reviews1 follower
October 15, 2021
इश्क़ एक्स्प्रेस
डॉ. पीयूष बैंदाड़ा

इश्क एक्स्प्रेस लेखक का दूसरा उपन्यास है।
यह कहानी है एक राजस्थानी लड़के पलाश की जो उच्च शिक्षा के लिए उत्तराखण्ड आता है।

वहॉं रह्ते हुए कुछ समय बाद वह अपने cousin देव के पास दिल्ली जाता है, जहां उसकी मुलाकात जिग्ना से होती है ।

पहले मुलाकात फिर दोस्ती और फिर प्यार तक दोनों का सफर बड़ी खूबसूरती से और जल्द ही तय हो जाता है।

लेकिन प्यार इतना आसान कभी हुआ है भला??

इसके बाद ही शुरू होता है सफर (suffer) ।

लेकिन मुद्दा ये है कि क्या सारी परेशानियों के बाद भी उनका प्यार पूरा होता है?? या मुश्किलों के सामने घुटने टेक देता है??

लेखक ने कहानी को खूबसूरत और आसान बनाया है, पढ़ते समय आप उत्तराखण्ड की ठंडी हवा महसूस कर सकते हैं। और सबसे महत्वपूर्ण बात खत्म होने तक इस किताब को बंद करना मुश्किल है।

मुझे यह book अच्छी लगी, आप भी पढ़िए और बताइये आपको कैसी लगी??
Profile Image for MONASHREE.
9 reviews
August 8, 2021
This story is related to a love story between Palash and Jigna. It's pure. The book cover is amazing. This story describes Palash's struggle for his love. If you are searching for a 90th-century love story then you can also take this book.
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