आप डिस्क्रिप्शन बॉक्स में पढ़कर अंदाजा लगाना चाह रहे हैं कि उज्ज्वल मल्हावनी नाम के इस विचित्र लेखक ने ‘शर्मा जी का लड़का’ जैसे अटपटे शीर्षक के साथ जाने क्या लिख दिया है जिसे पढ़ने का आग्रह किया जा रहा है। दरअसल प्रेम, इश्क़, प्यार, मोहब्बत, और भी तरह-तरह के नामों से पुकारे जाने वाले इस रोग के बारे में अथाह लिखा जा चुका है, जिन्हें पढ़ने वाला इंसान उन किताबों को पढ़ने के बाद एक रोगी बनकर बाहर निकलता है। ‘शर्मा जी का लड़का’ ऐसे ही रोगियों की दवा है। इस किताब में न सिर्फ आशिकी वाला लाल रंग है बल्कि जीवन के विविध रंग भी हैं। संग्रह की हर कहानी हिंदी साहित्य में वर्तमान लेखन की बँधी हुई परिपाटी तोड़कर अपना रास्ता बनाना चाहती है और यह आपके साथ से ही संभव है।
Ujjwal Malhawni is a poet and fiction writer from Pichhore, Madhya Pradesh, who writes about social issues like poverty, casteism, misuse of power, corruption etc. He has shown his potential in writing some extraordinary poems about the relationship between God and man. He has done his graduation in Political Science from University of Delhi and holds an MA in Hindi from Chitrakoot University. His first short story book ‘Sharma ji ka ladka’ is highly praised by all sections of society. Some of his stories also got prizes in different competitions. His work is published in notable magazines like Devputra. He Has also got appreciation from Divya Prakash Dubey, well known writer, for his short stories.
उज्जवल मल्हावनी की कहानी संग्रह “शर्मा जी का लड़का” एक ऐसी किताब है जो आम ज़िंदगी की छोटी-छोटी बातों में छिपे बड़े अर्थों को बेहद सादगी और गहराई से सामने लाती है। इस पुस्तक में कुल 11 कहानियाँ हैं, और हर कहानी अपने आप में एक अलग संसार रचती है — कभी परिवार की गर्माहट का अहसास कराती है, कभी समाज की सच्चाइयों का आइना दिखाती है, तो कभी मनुष्य के भीतर के संघर्षों को शब्द देती है। जैसा कि शीर्षक से स्पष्ट है, इस संग्रह की प्रमुख कहानी “शर्मा जी का लड़का” है, और यही कहानी इस पुस्तक का हृदय है। यह कहानी केवल एक पात्र की नहीं, बल्कि हमारे समाज की उस मानसिकता की कहानी है जहाँ तुलना, ईर्ष्या और सामाजिक दबाव इंसानियत से बड़ा रूप ले लेते हैं। कहानी के माध्यम से लेखक ने बड़ी खूबसूरती से दिखाया है कि कैसे हमारे आस-पास हमेशा कुछ “परफेक्ट” लोग नज़र आते हैं — जो हर काम में अव्वल होते हैं, जिनकी तुलना में बाकी सब “कमतर” ठहराए जाते हैं। लेकिन लेखक ने यह भी बताया है कि यह पूर्णता और तुलना का भाव समाज में एक ऐसी दूरी पैदा कर देता है जहाँ लोग एक-दूसरे से प्रेरणा लेने के बजाय जलन महसूस करने लगते हैं। यही भाव कहानी को वास्तविक और मार्मिक बनाता है। इस कहानी ने मुझे (पाठक को) गहराई से प्रभावित किया। “शर्मा जी का लड़का” पढ़ते हुए ऐसा लगा जैसे मैं अपने ही बचपन के दिनों में लौट गई हूँ — जब माता-पिता, पड़ोसी या अध्यापक बच्चों की तुलना करने में पीछे नहीं रहते थे। इस कहानी ने सिखाया कि हमें अपने आसपास के बच्चों के प्रयासों को पहचानना चाहिए, उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए, विशेषकर उन बच्चों को जो पढ़ाई में थोड़े कमजोर हैं। क्योंकि कभी-कभी उनका एक छोटा-सा प्रयास भी बड़ा हौसला मांगता है। लेखक ने यह बहुत संवेदनशील ढंग से दिखाया है कि “क्लास के टॉपर” से तुलना करने की आदत किस तरह एक बच्चे के आत्मविश्वास को भीतर तक तोड़ देती है। पुस्तक की बाकी कहानियाँ भी कम प्रभावशाली नहीं हैं। इनमें से कुछ कहानियाँ परिवारिक संबंधों की जटिलताओं को उजागर करती हैं, कुछ कहानियाँ क्रिकेट प्रेमियों के जुनून और कुछ कहानियाँ समाज की छोटी-छोटी परतों को धीरे-धीरे खोलती हैं। हर कहानी के पात्र इतने जीवंत हैं कि पाठक उन्हें अपने आस-पास महसूस कर सकता है। “शर्मा जी का लड़का” केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के कई रंगों का आईना है — जहाँ प्रेम है, परिवार है, दोस्ती है, सपने हैं, ईर्ष्या है, और सबसे बढ़कर इंसानियत की सीख है। यह पुस्तक उन सभी के लिए है जो कहानियों में ज़िंदगी ढूंढते हैं, जो अपने भीतर झाँकने का साहस रखते हैं, और जो यह समझना चाहते हैं कि दूसरों से तुलना करने से बेहतर है — खुद को समझना और स्वीकारना।
This book is a mixture of horror nd crime stories and according to tittle it got only one story my take is total waste of time nonsense somehow i ended this.