स्कूल के आखिरी और काॅलेज के शुरुआती वर्षों का यादगार और अलमस्त समय! जब स्कूल के अनुशासन से छूटे और जवानी की दहलीज़ पर खड़े छात्र अपनी आज़ादी और महत्वाकांक्षाओं की उड़ान को परखने लगते हैं। जीवन के कठोर यथार्थ से बेपरवाह ये समां होता है दोस्त बनाने का, सपने देखने का। भिलाई के एक स्कूल में पढ़ने वाले कुछ दोस्तों की ऐसी ही कहानी है गुगली। दोस्त जो एक दूसरे पर जान छिड़कते हैं और आजीवन दोस्ती की कसमें खाते हैं। सब क्रिकेट के दीवाने हैं और इनका कैलेंडर एक टैस्ट मैच से दूसरे टैस्ट मैच तक चलता है। दोस्ती और क्रिकेट के बीच पहला-पहला प्यार भी अंकुरित होता है। दोस्तों की प्रगाढ़ मित्रता, क्रिकेट के लिए जुनून, जीवन और कैरियर की जद्दोजहद, सच्चे प्यार को शिद्दत से पाने की प्रबल इच्छा को लेखक ने बहुत खूबसूरत
गुगली ज्ञानेश साहू का पहला उपन्यास है जिसमें दोस्ती, क्रिकेट , मस्ती और प्यार का अद्भुत समावेश है। कहानी 2007 के वर्ल्ड कप से शुरू होती है और 2011 के वर्ल्ड कप पर खत्म होती है। इसके बीच दोस्तों की घनिष्ठ मित्रता, प्यार का अंकुरण, क्रिकेट का जुनून, स्कूल के दिनों की मस्ती आदि सब देखने को मिलता है। कहानी के शुरुआत से ही आप खुद को उस में खोया हुआ पाओगे। साथ ही कहानी में भिलाई और चित्रकोट जलप्रपात के बारे में जानने को मिला। लेखक ने सरल भाषा में कहानी का अद्भुत वर्णन किया है। जिसे पढ़कर आप भी बचपन को दोबारा जी लेने वाले हो।
कहानी सच्ची दोस्ती की सच्ची परिभाषा भी प्रस्तुत करती है। और अपनी सरलता के साथ पाठकों के मन पर प्रभाव डालती है।
दोस्ती, प्यार और क्रिकेट की अनोखी कहानी है गुगली। छत्तीसगढ़ के भिलाई में शुरू हुई ये कहानी आपको वो हर रंग से रूबरू करायेगी जो आपने बचपन में रंगलेप् किये थे। कुछ दोस्तो से शुरू हुई ये गुगली ज़िंदगी का अच्छा बुरा भी आपको ज़रूर दिखाएगी । यूँ तो मुझे भी बहुत शौक है क्रिकेट का और बचपन में खेला भी बहुत है अपने छोटे से गाँव में। मुझे 2011 के वर्ल्ड कप का पढ़के अपना वो दिन याद आ गया जिसकी याद पर शायद अब धूल जमने लगी थी। आकाश, शिल्पा, खिलेश, योगेश, राकेश इनकी कहानी तो बचपन से चली आ रही थी। दिलचस्प बात ये हुई की किसी नई लड़की का स्कूल में दाखिला लेना और उसका इन सबकी दोस्ती पर फर्क पड़ना , पर क्या दोस्ती के रिश्ते इतने कच्चे हैं जो टूट जाए जी नहीं इनकी दोस्ती तो और मजबूत होगी। मुझे एक बात जो सबसे अच्छी लगी वो थी शिल्पा और आकाश के रिश्ते को दोस्ती की ट्रेन तक ही रखना। उसे प्यार जैसे कठिन शब्द से ना जोड़ना , क्योंकि दोस्ती जहाँ रिश्तों को सुलझा देती है वहीं प्यार उसे उतना ही उलझाता चला जाता है। और माही ( जो स्कूल में नई आई थी) के पापा ने भी तो कहा है कि कच्ची उम्र का प्यार भले ही सच्चा हो, लेकिन पक्का नही होता। लेकिन कुछ घटना ऐसे घटी की अब तो दोस्ती में भी कुछ दरारे आगयी हैं, पर क्या यही है इस कहानी का अंत या फिर किसी खूबसूरत मोड़ पर आके खतम होगी अब भाई ये सब तो आपको पढ़के ही पता चलेगा ना तो ज़रूर पढ़िये इसे बिना किसी संकोच के। किसी बेतुके ढंग में ना लिखके ये कहानी आपकी ,मेरी, तुम्हारी और हम सबके बचपन के कुछ ना कुछ पल ज़रूर चुराके बैठी है जो मजबूर कर देगी के काश एक बार फिर चले जाएँ वो बचपन में जहाँ खेल में हार जाना सबसे बड़ी हार मानी जाती थी,और कुछ अच्छे दोस्त बनाके रखना सबसे बड़ी जीत।
क्रिकेट के माध्यम से ज़िंदगी की जंग को जो जोड़ा गया है कहानी में आप और जोश के साथ पढ़ेंगे और अपने वो दिन ज़रूर याद करेंगे मुझे तो याद आ गए जब मेरे uncle ka एक्सीडेंट हुआ तो कुछ दिन बाद हम क्रिकेट खेलने लगे और अब उनसे भागा तो जायेगा नही तो जो run लेने दोड़ती वो थी मैं क्योंकि छोटी जो थी घर में , बस यही योगदान था उस समय क्रिकेट में मेरा भाग के run लेना और इसमें ही इतनी खुशी मिलती थी। और तो और लेखक ने आखिरी के 20000 शब्द कुछ 2 हफ़्तों में लिखें हैं जो की अपने आप में ही बहुत बड़ी उपलब्धि है । "दुनिया में गम सिर्फ उस बात का करना चाहिए , जिसे वापिस न पाया जा सके और बाकी के गम तो सिर्फ अपनी नाकामयाबियों को छिपाने के बहाने हैं" और दुबे सर ने कहा है अगर किसी मुश्किल रास्ते पर निकल पड़े हो तो फिर वापिस पीछे मुड़कर मत देखना ।
✍गुगली भिलाई के ऐसे दोस्तों की कहानी है जो अपनी जिंदगी के सबसे हसीन दौर से गुजर रहे हैं और लेखक भी इस कहानी का एक हिसा है। कहानी में प्यार, सपने, उम्मीद और आशाएं हमें कभी बनती हुई दिखाई देंगी तो कभी भिखरी हुई दिखाई देंगी। हर कहानी की तरह इस कहानी में भी प्यार छुटेगा, सपने टूटेंगे लेकिन लेखक अभी हार नहीं मानता है वो जीवन में आगे बढ़ता रहता है।
✍ कहानी में मुख्य किरदार आकाश, योगेश, शिल्पा, माहिरा, कमलेश, खिलेश और राकेश है। ये सभी बहुत अच्छे दोस्त होते हैं। माहिरा का भी उनकी दोस्ती में शामील होना इस कहानी का मजेदार किस्सा है।अब कहानी की शुरुआत कॉलोनी के सभी लोग और बच्चे मैदान में प्रोजेक्टर पर क्रिकेट देखने से होती है। आकाश के सभी दोस्त क्रिकेट के बहुत ज्यादा दिवाने होते हैं। भारत में क्रिकेट लड़कों का पसंदीदा खेल होता है। ईस कहानी में लेखक अपने स्कूल के आखिरी दिनो और कॉलेज के शुरुआती साल की यादें के बारे में दिलचस्प बात करते हैं। लेखक बताते है की हम सभी स्कूल से निकलने के बाद अपनी कॉलेज लाइफ को आज़ाद पंछी की तरह जीते हैं क्योंकि कॉलेज का समय हमारी जिंदगी का सबसे हसीन दौर होता है।
✍इस कहानी में मैं देखती हूं कि लेखक और उसके मित्र के बीच गहरा संबंध है। सभी दोस्त एक दूसरे पर न्यौछावर रहते हैं। ऐसी दोस्ती और क्रिकेट के बीच प्यार भी अंकुरित होता है। लेखक ने कहानी में क्रिकेट के लिए जूनून और दोस्ती और करियर के लिए संघर्ष और आखिर में प्रेम को पाने की प्रबल इच्छा को बहुत अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया है। इस कहानी को पढ़ने के बाद यह मेरी निजी पसंदीदा कहानियों में शामील हो गई है। लेखक सरल हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं। आप लोगों को इस कहानी को पढ़ना चाहिए। यह कहानी आपको कॉलेज के दिनों को याद दिलाती है।
इस किताब को गाड़ी में और एक नाश्ता-केंद्र में बैठ लगभग सवा घंटे में बाँच गया। शीर्षक और आवरण से किताब का खाका मिल जाता है। नियति-कथा जैसे ‘आलकेमिस्ट’ आदि हैं, उसका माइक्रो-वर्जन है। इसलिए सुखांत भी है, और शनिवार के हल्के मूड के लिए बिल्कुल ठीक है। लगेगा कि दुनिया में सब कुछ घुमा-फिरा कर बढ़िया चल रहा है। हार भी जीत के रास्ते का मील का पत्थर है। विरह मिलन के रास्ते का। असफलता सफलता के रास्ते का। ये सभी रास्ते किसी दैवीय योग से एक-दूसरे के करीब आते-आते मिल जाते हैं। आज कल ‘बचपन का स्कूली प्यार’ वायरल चल रहा है। मुझे इस तर्ज़ पर दूसरा गाना पसंद है, जो मैं यह पढ़ते हुए सुन रहा था- ‘इस्कूल के टेम पे, आजा गोरी डेम पे’।
एक और बात। औद्योगिकीकरण के बाद भारत में कई कॉलोनियाँ बन गयी, जहाँ देश भर से लोग आकर रहने लगे, और छोटे-छोटे भारत बनने लगे। जैसे जमशेदपुर, नासिक, कोरबा, भिलाई, पूसा आदि। यहाँ के स्कूली जीवन में एक अलग कलेवर होता है, जैसे पूरा शहर एक परिवार ही बन गया हो। इस कथा का केंद्र भी उनमें से एक है।
आलोचना के नाम पर सिर्फ़ यह कहूँगा कि पुरुष पात्रों के नाम खिलेश, योगेश, कमलेश, राकेश जैसे होने से मेरे जैसे जल्दी पढ़ने वाले भटक जाते हैं। सभी में ‘एश’ ही है, तो कौन राकेश था, कौन योगेश, यहाँ कंफ्यूज़ हो जाते हैं। युवतियों के नाम ठीक हैं, जहाँ मन में ऐसा गंडमगोल नहीं होता।
क्रिकेट की घटनाओं को रोमांस से जोड़ने वाली कहानी चेतन भगत ने भी लिखी है। यह भी उस कड़ी में एक बढ़िया हल्की-फुल्की कहान�� है। युवाओं को, ख़ास कर पंद्रह से पैंतीस वर्ष के पाठकों को मज़ा आएगा।
It's a light read. Beautiful story of friendship, love and cricket. Times of 2008 and environment in schools. You will miss your childhood frnds while reading it. It's a beautiful story with amazing narration and simple language. Story started with 2007 world Cup and ended with 2011 world Cup. In between many cute, lovely, hilarious and life changinging incidents happened. I highly recommend this book to everyone.
Googly – A Story That Bowls You Over With Nostalgia
Reading Googly felt like revisiting the streets of my own past. Every page is infused with the essence of Bhilai – school grounds, neighborhood corners, friendships, and the little moments that stay with you for life.
The author has beautifully balanced emotion and storytelling, making the narrative feel warm and personal. At times, my eyes welled up with memories, while at others, I couldn’t help but smile. That’s the magic of a city like Bhilai – no matter how many years pass, it always finds a way to bowl you over with its “googly.”
If you have roots in small towns, or a connection with Bhilai in particular, this book will touch you deeply. A heartfelt story, written with simplicity and soul.
*सुबह से लेकर शाम तक✨💫, दोस्ती से लेकर क्रिकेट के बुखार तक" दोस्ती प्यार और क्रिकेट की गुगली 🤝 यह किताब @author_gyanesh ji की लिखी पहली किताब हैं😍 किताब के पहले पन्ने में जिक्र होता हैं 'दोस्ती का🫂, लेखक कहते हैं, "मैं दोस्ती हूं" और किसी भी रिश्ते में दोस्ती हो तो वो रिश्ता प्यार कभी ख़त्म नहीं होता हैं,💫
मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि इस किताब को पढ़ते हुए आप अपने बचपन को जिएंगे, बिछड़े हुए दोस्त को याद करेंगे, अपने स्कूल को और उन चार यार को ज़रूर याद करेंगे💯🔥
कुछ मेरे जैसे लोग होंगे जो क्रिकेट को बिल्कुल पसंद नहीं करते होंगे, लेकिन यहाँ कुछ नौजवानों के उत्साह को और खेल के प्रति पागलपन को देखकर आप भी उतने ही उत्साह के साथ यह किताब पढ़ेंगे ,🤡👻
दोस्ती और क्रिकेट के बीच पनपते प्यार को महसूस करेंगे,🤓🥳
दोस्ती पे लिखे तमाम गाने की धुन को गुनगुनाएंगे दोस्ती पर जान निछावर है, इस किरदार को निभाते हुए आप पाएंगे कहानी के मुख्य किरदार जिसमें लेखक भी शामिल है योगेश ,कमलेश, माहिरा ,आकाश, शिल्पा, अखिलेश और राकेश कहानी इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है,✨💫 अगर हम भाषा की बात करें तो काफी सरल है पढ़ने में कोई कठिनाई नहीं होगी, साथ ही अगर आप भिलाई नहीं गए हैं तो आपका रिश्ता भिलाई से भी जुड़ जाएगा इस किताब को पढ़ने के बाद, इस किताब को पढ़ने के बाद मेरे कुछ दोस्त याद आ रहे थे ,🤝😍 जिसकी बातें इस किताब से टकरा रहीं थी ,
ओवरऑल इस किताब को एक बार ज़रुर पढ़ें अपने स्कूल अपने कॉलेज को याद करें अपने चार दोस्तों को याद करें दोस्ती क्या है इसको महसूस करें✨🌻