वह लोगों के लिए एक पहेली थी। कोई नहीं जानता था कि वह कहाँ रहती थी और कैसे जीवन-यापन करती थी। न तो वह दिन के उजाले में दिखती थी और न ही रात के अँधेरे में। उसके दिखने का जो वक्त मुक़र्रर था, वह पूर्णमासी की रात थी और जो स्थान मुक़र्रर था, वह यक्षिणी-मंदिर का तालाब था। उस रहस्यमयी औरत की हैरतअंगेज दास्तान, जिसकी निगाहों का मारा मौत का मुसाफ़िर बन जाता था।
कहानी पूरी तरह से कसी हुई. सुनेस्त्रा का किरदार बहुत रहस्य भरा हुआ था उसके साथ साकेत की समझ बढ़िया रही। पटकथा पूरी तरह कसी हुई थी खासतौर पर कहानी ने जब दामोदर की तरफ मोड़ लिया उस समय लगा कि कहीं जरूरत से ज्यादा एक्शन तो नहीं है पर लेखक की शानदार लेखनी ने थ्रिलर की तरफ मोड़ कर कमाल कर दिया। कुल मिलाकर पढ़ने में मजा आया रोचक और फाइव स्टार कहानी जरूर पढ़ें।
Novel ki language aur kahani ka pravah lajawab hai. Per vahi galti jo aajkal ke naye lekhak lagatar kar rahe hain ki apne likhe ka dimag mein koi record nahi rakhte. is liye akhri mein kai baaton ka khulasa nahi kiya. End ko jaldbaji mein likhte hain apne notes nahi banate. Jaise Hero ki bimari kaise sahi hui aur bhi bshut kuchh.
Although the ending was a slight letdown, the whole story was superbly written with ample amount of suspense and thrill. A very good page-turner by Chandraprakash Pandey... I am just glad that an author is exploring the horror genre in Hindi literature.